लखीमपुर हिंसा: विपक्ष पर CM योगी का वार, कहा- ये कोई सद्भावना के दूत नहीं, सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेंक रहे
गोरखपुर, 8 अक्टूबर: लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के बाद से हो रही सियासत को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहला बयान सामने आया है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लखीमपुर हादसा दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन जिस तरह से वहां जाने के लिए विपक्षी पार्टियों के नेताओं की होड़ लगी है, उससे साफ है कि सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए यह दिखावा है। ये कोई सद्भावना के दूत नहीं है।

सीएम योगी ने पूछा- क्या इनमें से कोई छत्तीसगढ़ गया?
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विपक्षी दल के नेताओं को लगा कि लखीमपुर एक बहाना है, लेकिन ऐसा नहीं हो पायेगा। सरकार की पहली प्राथमिकता होती है शांति और सौहार्द बनाना, सरकार ने वही किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ के कर्वधा में जो हुआ, क्या वहां कोई गया इनमें से? जिन लोगों को पुलिस ने गोलियों से भूना, क्या कोई उनसे मिलने गया?
अखिलेश यादव पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री योगी ने सपा अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अखिलेश यादव को पढ़ने-लिखने की फुर्सत कहां है, वो तो बड़े बाप के बड़े बेटे हैं। स्वाभाविक रूप से उनकी जिंदगी है और उनकी अपनी कार्य पद्धति है। देश और दुनिया से उन्हें क्या मतलब है?
एआईएमआईएम चीफ ओवैसी पर सीएम योगी का हमला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एआईएमआईएम चीफ पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ओवैसी अगर कश्मीर में निशाना बन रहे हिंदुओं और सिक्खों के प्रति भी सहानुभूति व्यक्त कर देते, तो लोग उनको नेता मान लेते। जो लोग लखीमपुर में हिन्दुओं और सिक्खों को आपस में लड़ाना चाह रहे हैं, उनको कश्मीर का आईना दिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लखीमपुर का राजनीतिकरण करने वालों को तालिबान का आईना दिखाना चाहिए। देश के अंदर लखीमपुर मुद्दे का राजनीतिकरण कौन कर रहे हैं? वही जो काबुल में तालिबान का समर्थन कर रहे हैं।
SC ने कहा- यूपी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से संतुष्ट नहीं
बता दें, मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की जांच में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से संतुष्ट नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपने डीजीपी से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि जब तक कोई अन्य एजेंसी इसे संभालती है तब तक मामले के सबूत सुरक्षित रहें। कोर्ट ने यूपी सरकार को एक वैकल्पिक एजेंसी के बारे में अदालत को अवगत कराने के लिए कहा है जो मामले की जांच कर सकती है।












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