UP: गोरखपुर को आयुष हब बनाने के लिए की जाएगी यह खास पहल
गोरखपुर आयुष विश्वविद्यालय ने इस क्षेत्र के किसानों की मिट्टी में पोषक तत्वों की जांच करने की योजना बनाई है। जिससे औषधीय पौधों को बढ़ावा दिया जा सके।

Gorakhpur News: गोरखपुर सहित पूरे क्षेत्र को आयुष हब बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए औषधीय खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे पूर्व प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय गुरु गोरखनाथ ने इस क्षेत्र की मिट्टी की उर्वरता जांच करने की तैयारी की है।
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आयुष विश्वविद्यालय, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ मिलकर किसानों के खेतों की उर्वरा शक्ति की जांच कराएगा। इसके बाद क्षेत्र के गांवों में आयुष खेती को बढ़ावा देकर औषधीय पौधों की पैदावार पर बल देगा।
आयुष विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एके सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय आयुष खेती को बढ़ावा देने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का सहयोग लिया जाएगा। यहां मरीजों के लिए ओपीडी सेवा का शुभारंभ हो चुका है। प्रतिदिन भारी संख्या में यहां मरीज आ रहे हैं। ऐसे में औषधीय पौधों की ज्यादा आवश्कता है। ताकि दवा तैयार की जा सके। मिट्टी की जांच करानी इसलिए आवश्यक है जिससे मिट्टी में किस तत्व की कमी है इसका पता चल सके। उस कमी को दूर किया जा सके। अलग-अलग औषधीय पौधों के लिए अलग-अलग मिट्टी की आवश्यकता होती है। पौधों के अनुकूल कौन सी मिट्टी है इसका पता लगाया जा सकेगा।
मिट्टी की पहचान कर औषधीय खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। कई और विश्वविद्यालय भी इस कार्य में सहयोग करेंगे। मिट्टी में 17 प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं। मिट्टी का नमूना लेने के लिए खेत में पहले आठ से दस निशान बना लेना चाहिए। चिन्हित स्थानों से 15 सेमी वी आकार का गढ्ढा खोद ले। इसके बाद दो सेमी ऊपर से मिट्टी निकाल लें। मिट्टी को सापकर गोल ढे़र बना लें। ढ़ेर को चार बराबर भागों में बांट लें। इसके बाद मिट्टी को जांच के लिए भेजें।












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