चीन से ज्यादा भारत को होगा यूक्रेन युद्ध का नुकसानः आईएमएफ

भारत में भी महंगाई बढ़ रही है

नई दिल्ली, 18 मार्च। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि यूक्रेन युद्ध का चीन को फौरी आर्थिक नुकसान भारत को होने वाले नुकसान की तुलना में काफी कम होगा. आईएमएफ के कम्यूनिकेशन डायरेक्टर गेरी राइस ने मीडिया से बातचीत में गुरुवार को कहा, "ऐसी आशंका है कि यूक्रेन युद्ध भारत की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर डालेगा. विभिन्न रास्तों से होने वाला यह नुकसान कोविड-19 के दौरान हुए नुकसान से अलग होगा."

राइस ने कहा कि तेल की कीमतों में भारी वृद्धि व्यापक आर्थिक नुकसान को दिखाती है. उन्होंने कहा कि इससे महंगाई बढ़ेगी और देशों का घाटा भी. 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था जिसके बाद कच्चे तेल के दामों में काफी बढ़ोतरी हो चुकी है.

निर्यात का फायदा होगा

राइस ने संभावना जताई कि कुछ बातें भारत के पक्ष में जा सकती हैं. उन्होंने कहा, "गेहूं जैसी चीजों के निर्यात से भारत के आर्थिक घाटे में कुछ हद तक कमी हो सकती है." रूस और यूक्रेन दोनों ही गेहूं के बड़े निर्यातक हैं लेकिन युद्धरत होने के कारण निर्यात नहीं कर पा रहे हैं.इसका फायदा भारत को हो रहा है जिसका गेहूं अंतरराष्ट्रीय खरीददारों के लिए विकल्प बन गया हैइसका फायदा भारत को हो रहा है जिसका गेहूं अंतरराष्ट्रीय खरीददारों के लिए विकल्प बन गया है.

राइस ने कहा कि इस निर्यात का फायदा उतना नहीं होगा क्योंकि युद्ध का अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन की अर्थव्यवस्थाओं पर भी बुरा असर होगा और उनकी आयात क्षमता घट जाएगी. इससे भारत का निर्यात प्रभावित होगा. इसके अलावा सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं का असर भारत के आयात पर पड़ेगा और उसे महंगाई झेलनी होगी. राइस ने कहा, "तंग होतीं वित्तीय स्थितियों और बढ़ती अनिश्चितता के कारण भी घरेलू मांग पर असर पड़ेगा और मौद्रिक हालात तंग होंगे क्योंकि लोगों का अर्थव्यवस्था में भरोसा कम रहेगा."

आईएमएफ ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर खासी अनिश्चितता जताई है. राइस ने पत्रकारों से कहा, "संक्षेप में मुझे लगता है कि भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर खासी अनिश्चितता है. मैं तो यही कहूंगा कि अनिश्चितता और बढ़ गई है और इस बात पर निर्भर करेगी कि कितना बड़ा धक्का लगता है और व्यापक आर्थिक स्तर पर उठाए जा रहे खतरों का फायदा पहुंचता है या नहीं. और बेशक, इस बात पर भी कि ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार क्या नीतियां अपनाती है."

चीन को नुकसान कम

चीन के बारे में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की आशंकाएं इतनी गंभीर नहीं हैं. राइस ने कहा कि यूक्रेन युद्ध का चीन पर इतना ज्यादा असर नहीं होगा. उन्होंने कहा, "चीन पर इस संघर्ष का फौरी असर तुलनात्मक रूप से कम होगा. ऊंची तेल कीमतें घरेलू उपभोग को प्रभावित कर सकती हैं जिसका असर निवेश पर होगा लेकिन कीमतों की तय सीमा इस असर को कम कर देगी."

भारत की नजर सस्ते रूसी तेल पर

उन्होंने कहा कि चीन का रूस को निर्यात उसके कुल निर्यात का बहुत छोटा हिस्सा है लेकिन बाकी देशों पर होने वाले असर के नुकसान उसे झेलने पड़ सकते हैं. उन्होंने कहा, "उसके व्यापार साझीदारों पर होने वाले असर उसकी वृद्धि को धीमा कर सकते हैं. सप्लाई चेन में बाधाओं और वित्तीय बाजारों में बहुत ज्यादा उथल-पुथल होती है तो भी चीन प्रभावित हो सकता है."

अगले महीने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं की संभावना बताने वाली रिपोर्ट जारी होनी है. राइस ने कहा कि इस रिपोर्ट में तस्वीर और ज्यादा स्पष्ट हो पाएगी

रिपोर्टः विवेक कुमार (एएफपी)

Source: DW

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