नर्मदा के पानी में ऑक्सीजन से ज्यादा सल्फाइड, जल संकट से त्रस्त गुजराती कैसे पीएंगे इसे!

water crisis gujarat news, गांधीनगर। जलसंकट की वजह से गुजरात के ग्रामीण इलाकों में लोगों को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। लोगों की आखिरी उम्मीद नर्मदा बांध का पानी है, मगर वह भी पीने लायक नहीं रह गया है। पर्यावरणविदों द्वारा नर्मदा निगम प्राधिकरण को लिखे गए पत्र से यही उजागर होता है। पर्यावरणविदों के सवालों पर नर्मदा विभाग औऱ निगम अधिकारियों ने पानी की गुणवत्ता जांची, जिसमें कुछ दिनों पहले पाया गया कि यहां के पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम था और सल्फाइड में वृद्धि हो रही थी। जिसके परिणामस्वरूप हजारों मछलियां मर गई थीं। बाद में इस लोगों को इस पानी की सप्लाई रोक दी गई।

oxygen and sulfide standard bad in narmada dam water, Gujarat

नर्मदा बांध के पानी को लेकर पर्यावरणविदों ने नर्मदा निगम प्राधिकरण से जवाब मांगा है कि नर्मदा के जल की गुणवत्ता के पीछे के कारणों में चुप्पी क्यों दिखाई जा रही है। सरकार खुद नर्मदा के पानी की जांच क्यों नहीं कर रही है। गुजरात में अभी नर्मदा बांध का पानी पीने के लिये दिया जा रहा है, लेकिन उसमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन की मात्रा कम हो गई है। ऐसे सवाल दागने के साथ ही पर्यावरणविदों ने नर्मदा प्राधिकरण को गुजरात के लोगों को सूचित करने के लिये कहा है और इसमें जांच करने का अनुरोध किया है।

इससे पहले फरवरी महीने में नर्मदा के पानी ने लोगों को नुकसान पहुंचाया था। पानी की गुणवत्ता इतनी खराब पाई गई थी कि, बांध के आसपास के इलाकों में पानी की सप्लाई केा रोकना पड़ा था। उस समय नर्मदा निगम प्राधिकरण ने समझाया कि यह छोटे-छोटे भूकंप के कारण हो सकता है। किंतु अब पर्यावरणविदों ने प्राधिकरण से कहा है कि आप पता लगायें कि नर्मदा बांध के नीचे नेचुरल गैस निकलने की वजह से पानी में ऑक्सीजन कम और सल्फाइड की मात्रा ज्यादा है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोलॉजी के विशेषज्ञों को बुलाकर बांध में पानी की गुणवत्ता के लिये जांच होनी चाहिये और दूषित पानी का हल करना चाहिये।

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बता दें कि, गुजरात के ज्यादातर बांधो में पानी नहीं बचा है, जिनमें है वो काफी कम रह गया है। केवल नर्मदा कैनाल का पानी गुजरात के शहरों में और गांवों में जाता है। लोग ये पानी अमृत समझ कर पी रहे हैं, लेकिन उसकी गुणवत्ता पर काफी सवाल उठे हैं। ऐसे में उसका निराकरण आ जाना चाहिये। नर्मदा प्राधिकरण के अधिकारियों को देखना चाहिये कि पानी में ऑक्सीजन कितना है और सल्फाइड की मात्रा कितनी है।

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