गुजरात: भाजपा के क्लीन स्वीप से पहले कांग्रेस भी जीत चुकी है 25 सीटें,शुरूआत से अब तक ऐसे रहे चुनाव

Lok sabha elections 2019 News, गांधीनगर। मोदी लहर के चलते 2014 में भाजपा ने गुजरात की 26 लोकसभा सीटें जीत लीं। कांग्रेस को किसी भी सीट पर सफलता नहीं मिल पाई। मगर, एक दौर ऐसा भी था जब कांग्रेस ने गुजरात में 25 सीटें जीत ली थीं। यह वह समय था, जब भाजपा का उदय नहीं हुआ था। तब कांग्रेस ने इंदिरा गांधी की अगुवाई में जनता दल को करारी हार दी थी। तब जनता दल को गुजरात में महज एक ही सीट मिल पाई थी। इसके बाद भी कांग्रेस ने 80 के दशक में ही गुजरात में 24 सीटें जीतकर बेहतर प्रदर्शन किया था।

मोदी ने तुड़वा दिया इंदिरा का रिकॉर्ड

मोदी ने तुड़वा दिया इंदिरा का रिकॉर्ड

1980 और 1984 के चुनावों पर नजर डाली जाए तो गुजरात में कांग्रेस का प्रदर्शन इन्दिरा गांधी या राजीव गांधी के समय पर बहुत अच्छा रहा। हालांकि, इन दोनों के रहते भी ये पार्टी गुजरात में कभी क्लीन स्वीप नहीं कर पाई। बल्कि, भाजपा की स्थापना के बाद कांग्रेस गुजरात में कमजोर होती चली गई। भाजपा को अपने पहले लोकसभा चुनाव में, जो कि इंदिरा की हत्या के बाद 1984 में हुए थे, एक ही सीट मिली थी। उसके बाद 1989 में भाजपा ने 12 सीटें जीतीं और कांग्रेस महज 3 सीटें ही जीत पाई। 1989 के समय से ही कांग्रेस गुजरात में कभी भाजपा से ज्यादा सीटें नहीं जीत पाई। 2014 के चुनाव में मोदी लहर पर सवार भाजपा ने सभी 26 सीटें जीत लीं।

इन्दिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या हुई, तब भी कांग्रेस जीती

इन्दिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या हुई, तब भी कांग्रेस जीती

सियासत के स्थानीय जानकारों की मानें तो भाजपा का ये रिकॉर्ड अब शायद ही टूटे। जब प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी और फिर प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या हुई तो पूरे देश में आमजन के बीच कांग्रेस के प्रति सुहानुभूति का वातावरण हो गया, हालांकि, तब भी गुजरात में कांग्रेस को सभी सीटें नहीं मिल पाईं। इस बार 2019 के चुनाव में भाजपा फिर 26 सीटें लाने का दावा कर रही है, जो कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए नामुमकिन लग रहा है।

गुजरात में पहले लोकसभा चुनाव से अब तक का सफर जानिए

गुजरात में पहले लोकसभा चुनाव से अब तक का सफर जानिए

गुजरात में पहले लोकसभा चुनाव 1962 में हुए थे, तब यहां कुल 22 सीटें थीं। जिनमें से कांग्रेस को 16 सीटें मिली थीं, स्वतंत्र पार्टी को 4 और पीएसपी एवं एनजेपी को एक-एक सीट मिली।इसके बाद 1967 में हुए दूसरे चुनाव में कुल 24 सीटों में से स्वतंत्र पार्टी को 12 सीटें और कांग्रेस को 11 सीटें मिली थीं। उस समय एक निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीता था। 1967 के बाद राज्य में तीसरे चुनाव 1971 में हुए। तब कुल 24 सीटों में से कांग्रेस को 11 सीटें, एनसीओ को 11 और स्वतंत्र पार्टी को 2 सीटें मिलीं।

इंदिरा की अगुवाई में कांग्रेस ने किया था कमाल

इंदिरा की अगुवाई में कांग्रेस ने किया था कमाल

वर्ष 1977 में जनता पार्टी बीएलडी ने मैदान मारा, तब उसे राज्य की कुल 26 लोकसभा सीटों मेंं से 16 सीटें मिल गईं। जबकि, कांग्रेस 10 सीटें ही जीत पाई। इसके बाद 1980 में राज्य में 7वें लोकसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उसे यहां इंदिरा की अगुवाई में 26 में से 25 सीटें मिलीं। जबकि, एक सीट पर जनता पार्टी का उम्मीदवार जीता था। इसके बाद 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 24 सीटें मिलीं।

1989 से गुजरात में कांग्रेस की हार शुरू हुई, कभी भाजपा से नहीं जीती

1989 से गुजरात में कांग्रेस की हार शुरू हुई, कभी भाजपा से नहीं जीती

वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव से गुजरात में कांग्रेस की हार होती चली गई, क्योंकि, भाजपा की वजह से उसका प्रदर्शन घटता चला गया। 1989 के चुनाव में जनता पार्टी को 11 सीटें तो भाजपा को 12 सीटें मिलीं। कांग्रेस को 3 सीटों से संतोष करना पड़ा। 1991 के चुनाव में भी कांग्रेस बुरे हालत में चली गई, जब भाजपा ने सभी 26 में से 20 सीटें जीत लीं। तब कांग्रेस को 5 और जनता दल को एक सीट मिली। इसके बाद 1996 में भाजपा को 16 और कांग्रेस को 10 सीटें मिली। 1998 में भाजपा को 19 और कांग्रेस को 7 सीटें मिलीं। 1999 में भाजपा ने फिर 20 सीटें जीतीं और कांग्रेस ने बाकी 6 सीटें जीत लीं। इसके बाद 2004 के चुनावों में भाजपा को गुजरात में 14 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस 12 सीटों पर जीती।

​फिर हुई कांग्रेस की सबसे बड़ी हार और भाजपा की सबसे बड़ी जीत

​फिर हुई कांग्रेस की सबसे बड़ी हार और भाजपा की सबसे बड़ी जीत

2009 के चुनावों में गुजरात में भाजपा को 15 और कांग्रेस को 11 सीटें मिलीं। इसके बाद पांच साल पहले 2014 के इलेक्शन में गुजरात से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। यूपीए सरकार पर घोटालों के आरोप और उसकी मुस्लिम तुष्टिकरण नीति के खिलाफ मुद्दा बनाकर भाजपा ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। जिसके बाद मोदी लहर चल निकली।

भाजपा ने 282 सीटें जीतीं, कांग्रेस महज 44 ही जीत पाई

भाजपा ने 282 सीटें जीतीं, कांग्रेस महज 44 ही जीत पाई

मोदी की अगुवाई में भाजपा से मुकाबला करते हुए कांग्रेस ने पहले कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हारे, उसके बाद लोकसभा चुनाव भी हार गई। 2014 में देशभर में कांग्रेस महज 44 सीटें ही जीत पाई, ये कांग्रेस के इतिहास की सबसे बड़ी हार थी। वहीं, भाजपा के इतिहास की ये सबसे बड़ी जीत साबित हुई, भाजपा ने 282 सीटें जीतीं। एनडीए की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 336 पहुंच गई और 20 करोड़ से ज्यादा वोट मिले।

लोकसभा चुनाव 2019: गुजरात की सभी सीटों की जानकारी यहां पढ़ें

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