हाईकोर्ट ने गुजरात में लाखों कर्मचारियों को दी राहत, दोषी पाए जाने तक नौकरी से नहीं निकाल सकती सरकार

Gujarat News, गांधीनगर। गुजरात उच्च न्यायालय ने सरकार को उन कर्मचारियों को नियमित वेतनदारों की तरह सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है, जिन्हें गुजरात सरकार के अलग-अलग विभागो में फिक्स-पे औऱ कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम के आधार पर नौकरी मिली है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद गुजरात सरकार अब कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों नौकरी से हटा नहीं सकती है। अगर गैरबर्ताव के कारण कर्मचारी को हटाना जरूरी है, तो पहले विभाग में जांच-पडताल होगी। उसके बाद अगर कर्मचारी दोषी साबित होता है तो उनको हटाया जा सकता है। यानी सरकार कर्मचारियों को दोषी साबित होने तक नौकरी से नहीं हटा सकती।

सरकार अब कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों नौकरी से हटा नहीं सकती

सरकार अब कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों नौकरी से हटा नहीं सकती

हाईकोर्ट ने गुजरात सरकार को एक आदेश में कहा, ''लाखों कर्मचारी, जिन्हें निश्चित वेतन या संविदा नियुक्ति मिली है, उनके पास अब वही कानून होंगे जो सरकारी नौकरियों में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों के होते हैं।'' बता दें कि अभी तक ऐसा होता था कि, सरकार में यदि कोई भी कर्मचारी फिक्स-पे औऱ कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम के आधार पर नौकरी में काम करता है और उनका सरकार की ओर अच्छा बर्ताव नहीं होता था या कोई उपद्रव करता था तो सरकार उनको बिना नोटिस या कार्यवाही हटा देती थी। फिक्स-पे कर्मचारियों के बने सिस्टम में लाखों कर्मचारी काम कर रहे हैं। उनको नौकरी में असलामती महसूस होती है जब उनको नौकरी से निकाल दिया जाता है।

कर्मचारी को खुद की सफाई देने का मौका मिलेगा

कर्मचारी को खुद की सफाई देने का मौका मिलेगा

किंतु अब गुजरात हाइकोर्ट के आदेश बाद सरकार अपने फिक्स-पे कर्मचारी या कॉन्ट्रैक्ट बेज कर्मचारी को विभागिय जांच के बिना हटा नहीं सकती है। इन कर्मचारियों को सरकार के रेग्युलर कर्मचारी जैसा कानून मिलेगा। अगर कोई कर्मचारी का सरकार में व्यवहार ठीक नहीं है तो विभाग में उनकी जांच होगी औऱ आगे की कार्यवाही करने के लिये प्रस्ताव पारित करना होगा। इस प्रक्रिया में कर्मचारी को खुद की सफाई देने का मौका भी मिलेगा।

लाखों कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी

लाखों कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी

अगर कोई कर्मचारी सरकार के सामने बगावत पर उतर आया है या विभाग में कोई ऐसा काम किया है जो शर्मनाक है, तब सरकार को पुलिस की एफआईआर को ध्यान में रखते हुए पहले विभागीय जांच करनी होगी। सभी प्रक्रियाओं के बाद कर्मचारी को नौकरी से निलंबित या हटाया जा सकेगा। हाईकोर्ट के आदेश से राज्य में फिक्स या कॉन्ट्रैक्ट से नौकरी पाने वाले लाखों कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी।

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