जमीन नहीं, गुजरात में अब समुद्र में भी खेती कर रहे किसान, ऐसा करने वाला ये देश का पहला राज्य
Gujarat News, गांधीनगर। गुजरात सरकार पिछले दो दशकों से उद्योगों के लिये कृषि-भूमि के अधिग्रहण कर रही है। किसान संगठनों को लगता है कि यही सिलसिला जारी रहा तो एक दिन ऐसा भी आ जाएगा, जब यहां खेती करने लिए जमीन नहीं बचेगी। ऐसे में बढती अन्न की मांग और धटती जमीन के चलते यहां कृषि विशेषज्ञों ने एक आइडिया खोजा है, जिसे सूबे के किसानों ने अपनाते हुए खुद ही लागू करना शुरू कर दिया है।

समुद्र में भी होने लगी गुजरात में खेती
वैसे तो अभी विदेशों में मल्टीस्टोरियेड एग्रीकल्चर मशहूर है, लेकिन गुजरात के किसान अब समुद्र में खेती कर रहे है। गुजरात देश में पहला स्टेट होगा, जहां किसानों ने कृषि विशेषज्ञों कि मदद से समुद्र में खेती का रास्ता अपनाया है। अब गुजरात दूसरे उन राज्यों को दिशा निर्देश करेगा, जिनके पास समुद्री तट है।

कहां हुई सी-वाइड फार्मिंग?
गुजरात में 1600 किलोमीट लंबा समुद्र तट है। यदि पोर्ट क्षेत्र को छोड़ दिया जाये, तो महासागर का दूसरा हिस्सा वह है जहां कोई गतिविधि नहीं है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सी-वाइड फार्मिंग एक नई अवधारणा है। इस प्रकार की खेती जापान, कोरिया, चीन, फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देशों में की जाती है, लेकिन अब गुजरात में ये खेती की जाएगी।

किसानों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
गुजरात के भावनगर स्थित सेन्ट्रल सोल्ट एन्ड मरीन केमिकल्स रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा जिले के 18 किसानों को प्रशिक्षित दिया गया है, जिन्हें गिर-सोमनाथ के पास सिमर और राजपारा गाँवों में घास की खेती करना सिखाया गया है। इस प्रक्रिया को एक सायकल पूरा करने में 40 दिन लगते हैं। इन किसानों ने दो सायकल में 5.9 टन घास की खेती कर के 1.15 लाख रुपये एकत्र किए हैं।

सरकार ने दिया 2 करोड़ का अनुदान
इस इंस्टीट्यूट के एक विशेषज्ञ ने बताया कि हम 2019 में जिले के 162 किसानों को प्रशिक्षित करने वाले है। किसानो को प्रशिक्षित करने के लिये हमारी इंस्टीट्यूट को केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड को दो करोड़ रुपये का अनुदान भी दिया गया है।
फल-सब्जियां भी समुद्र में उगाएंगे
समुद्र में घास की खेती के अलावा कृषि विशेषज्ञों इस बात पर विचार कर रहे हैं कि, किसान अब समुद्र में घास के अलावा सब्जियां और फूल की खेती भी कर सकें। इस बारे में उन्होंने एक एक्शन प्लान भी बनाया है, जिसके माध्यम से इंस्टीट्यूट किसानों को प्रशिक्षित करेगी।












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