गुजरात की ये 10 सीटें ऐसी, जहां भाजपा-कांग्रेस ने चुनाव में उतारे हैं एक ही जाति के उम्मीदवार

Gujarat News in Hindi, गांधीनगर। गुजरात में सत्ताधारी भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने अपनी-अपनी जीत की खातिर 10 लोकसभा सीटों पर ऐसे उम्मीदवार चुने हैं जो एक ही समाज (जाति) के हैं। जैसे, बनासकांठा में चौधरी उम्मीदवारों के बीच स्पर्धा है। साबरकांठा और पाटण में ठाकोर समुदाय के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। महेसाणा, अमरेली और पोरबंदर में पाटीदारों के बीच प्रतिस्पर्धा है। सुरेंद्रनगर और जूनागढ़ में कोली उम्मीदवारों के बीच दंगल हैं। राज्य में 4 एसटी सीटें हैं, जिनमें दाहोद, छोटा उदयपुर, बारडोली और वलसाड आती हैं। एससी सीटों के बीच एससी उम्मीदवारों के बीच संघर्ष है। एकमात्र आनंद सीट ऐसी है, जिसमें विभिन्न जाति के उम्मीदवार खड़े किए गए हैं।

सांसद बनने के लिए चुनाव लड़ रहे 13 विधायक, जीते तो कराना पड़ेगा उपचुनाव

सांसद बनने के लिए चुनाव लड़ रहे 13 विधायक, जीते तो कराना पड़ेगा उपचुनाव

सूबे में दोनों पार्टी (भाजपा-कांग्रेस) कुल 13 विधायकों को लोकसभा चुनाव लड़ा रही हैं। अगर ये जीतते हैं तो राज्य की 13 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव कराना पड़ेगा। चुनाव लड़ रहे ये 13 वो नेता हैं, जो 15 महीने में ही दूसरा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। इससे पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा कांग्रेस से कुछ ही सीटों के अंतर से चुनाव जीतकर लगातार चौथी बार सत्ता पर काबिज हुई। अब कांग्रेस के पास 71 विधायक हैं, वहीं भाजपा के विधायकों की संख्या 100 है। कांग्रेस ने अपने 9 विधायकों को सांसद पद के लिए फिर चुनाव में उतारा है।

पहले हार चुके 50% उम्मीदवारों को फिर चुनाव लड़ा रही कांग्रेस

पहले हार चुके 50% उम्मीदवारों को फिर चुनाव लड़ा रही कांग्रेस

2019 के लोकसभा चुनाव के लिए तय किए गए 26 उम्मीदवारों में से कांग्रेस के पास 50% ऐसे हैं, जो पिछले चुनाव में हार गए थे। यानी, हारे हुए नेताओं को फिर चुनाव लड़ाया जा रहा है। वहीं, राजनीतिज्ञ मानते हैं कि राज्य में लोकसभा टिकट नहीं मिलने की वजह से भाजपा की 10 और कांग्रेस की 12 सीटें प्रभावित हो सकती हैं, इसकी वजह है इन सीटों पर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का नाराज होना। भाजपा ने अपने 26 उम्मीदवारों में 16 सांसदों को दुबारा चुनाव लड़ने का मौका दिया है, जबकि 10 सांसदों की जगह नए उम्मीदवार चुने हैं। अब वे 10 सांसद और उनके समर्थक भाजपा से नाराज चल रहे हैं। 26 उम्मीदवारों में भाजपा 4 विधायकों को लोकसभा चुनाव लड़ा रही है।

जानिए, भाजपा-कांग्रेस के लिए कौन सी सीटों पर जीतना आसान

जानिए, भाजपा-कांग्रेस के लिए कौन सी सीटों पर जीतना आसान

वहीं, कांग्रेस के पास अहमदाबाद, गांधीनगर, जामनगर, भावनगर, वडोदरा, सूरत और राजकोट के शहरी क्षेत्र में खास चेहरे नहीं मिल पाए। पिछला रिकॉर्ड देखा जाए तो भाजपा के लिए गांधीनगर, अहमदाबाद पूर्व, अहमदाबाद पश्चिम, राजकोट, जामनगर, भावनगर, खेड़ा, पंचमहल, वड़ोदरा, भरूच, सूरत और नवसारी सीट पर जीत आसान रहेगी। इन सभी सीटों पर 2014 में भाजपा के ही उम्मीदवार जीते थे। इनके अलावा जिन सीटों पर इस बार कड़ा मुकाबला है, उनमें कच्छ, सुरेंद्रनगर, पोरबंदर, जूनागढ़, अमरेली, बनासकांठा, साबरकांठा, महेसाणा, पाटण, आनंद, दाहोद, छोटा उदयपुर, बारडोली और वलसाड सीट आती हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने इन इलाकों में भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी।

कांग्रेस ने 9 ओबीसी और 8 पाटीदार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा

कांग्रेस ने 9 ओबीसी और 8 पाटीदार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा

इतिहास देखा जाए तो ज्यादातर लोकसभा चुनाव गुजरात में जातिवाद के आधार पर लड़े और जीते गए। राज्य में दोनों बड़े दलों ने इस बार सबसे अधिक आबादी वाले जाति के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया है। भाजपा की तरह कांग्रेस ने भी 9 ओबीसी और 8 पाटीदार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। गुजरात में बीजेपी ने किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है, लेकिन भरूच सीट पर कांग्रेस ने मुस्लिम उम्मीदवार खड़ा किया है। कांग्रेस में सबसे अधिक 20 ऐसे उम्मीदवार हैं, जो पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं।

गुजरात: लोकसभा चुनाव 2019 से जुड़ी सभी जानकारी यहां पढ़ें

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