हादसे, हत्याएं और हमलेः सैकड़ों की जान ले गया खूनी वीकेंड

सप्ताहांत पर भारत और दक्षिण कोरिया में हुए जानलेवा हादसों में सैकड़ों लोगों की जान चली गई. भारत के गुजरात में एक पुल गिर जाने से कम से कम 91 लोग मारे गए जबकि दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में हैलोवीन मनाने पहुंचे 150 से ज्यादा लोग अधिक भीड़ के कारण दम घुटने से मर गए.
भारत में हादसा गुजरात के अहमदाबाद से करीब 200 किलोमीटर दूर मोरबी में हुआ, जहां 150 साल से ज्यादा पुराना पुल गिरने से सौ से ज्यादा लोग नदी में जा गिरे. इस पुल को मरम्मत के बाद हाल ही में लोगों के लिए खोला गया था. रविवार को छठ के मौके पर लगभग 500 लोग इस पुल पर एक साथ जमा हो गए, जिनका वजन यह नहीं उठा पाया.
अधिकारियों के मुताबिक यह एक सस्पेंशन ब्रिज था, जिसकी केबल इतने लोगों का वजन सहन नहीं कर पाईं. पुल के गिरने से वहां मौजूद लोग माछू नदी में जा गिरे. राज्य सरकार के एक मंत्री ब्रजेश मेरजा ने बताया कि 80 ज्यादा लोगों को नदी से बचाया गया.
एक चश्मदीद ने स्थानीय मीडिया को बताया, "जब पुल गिरा तो लोग एक दूसरे के ऊपर गिरने लगे. उनमें बहुत सारे बच्चे और औरतें थीं." सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे कुछ वीडियो देखने में दर्दनाक हैं. उनमें लोगों को लटके हुए पुल पर पानी में डूबने से बचने की कोशिश करते हुए देखा जा सकता है.
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माछू नदी पर बना यह पुल 233 मीटर लंबा और मात्र डेढ़ मीटर चौड़ा था. इसे 1880 में अंग्रेज अधिकारियों ने बनवाया था. इसके निर्माण में ब्रिटेन से लाया गया सामान प्रयोग किया गया था. एनडीटीवी के मुताबिक सात महीने की मरम्मत के बाद पुल को बीते बुधवार ही जनता के लिए खोला गया था. हालांकि रिपोर्ट कहती है कि उसे बिना सुरक्षा प्रमाणपत्र लिए ही खोल दिया गया. हादसे के वक्त भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गुजरात की यात्रा पर थे. उन्होंने पीड़ितों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है.
सोल में दर्दनाक मंजर
दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में शनिवार की रात देश के सबसे दर्दनाक हादसों में से एक पेश आया, जब हैलोवीन मनाने इताइवोन इलाके में हजारों लोग एक साथ पहुंच गए. भीड़ इतनी बढ़ गई कि लोग भीड़ में पिस गए और 151 लोगों की दम घुटने से मौत हो गई.
इताइवोन राजधानी सोल का एक चहल-पहल वाला इलाका है जहां दर्जनों पब और रेस्तरां हैं. कुछ लोगों के मुताबिक शनिवार को वहां करीब एक लाख लोग हैलोवीन मनाने पहुंचे थे. पिछले दो साल से कोविड के कारण सार्वजनिक उत्सव नहीं मनाए जा रहे थे, इसलिए भी लोगों की संख्या ज्यादा थी.
32 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर नूहील अहमद ने बीबीसी को बताया कि पिछले साल पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित किया था लेकिन इस बार हालत अलग थी. उन्होंने कहा, "इस बार तो पागलपन था. शाम 5 बजे से ही बहुत सारे लोग सड़कों पर आ गए थे. मैं सोच रहा था कि 7-8 बजे तक क्या होगा."
उस वक्त भी कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि भीड़ इतनी ज्यादा है कि उन्हें असुरक्षित लग रहा है. रात करीब 11 बजे माहौल में घबराहट और तनाव बढ़ गया जब लोग एक दूसरे को धकेलने लगे. मोहम्मद ने बताया, "लोग पीछे एक दूसरे को धकेल रहे थे. यह किसी लहर जैसा था. आप कुछ भी नहीं कर सकते थे. आप हिलें भी ना, तो भी कुछ लोग आपको आगे से धकेल रहे थे और कुछ पीछे से."
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स्थानीय मीडिया के मुताबिक रात करीब साढ़े दस बजे हादसे की शुरुआत हुई, जब गली दोनों तरफ से भीड़ इतनी बढ़ गई कि ढलान से कुछ लोग गिर गए. बाकी लोगों ने खुद को बचाने के लिए पीछे वालों को और धकेलना शुरू कर दिया और सैकड़ों लोग पिस गए. उनमें से 150 लोगों की वहीं जान चली गई.
मोगादिशू में 100 मौतें
सोमालिया की राजधानी मोगदिशू में भी सप्ताहांत काल बनकर आया, जब दो कार बम धमाकों ने शहर को हिला दिया. राष्ट्रपति हसन शेख महमूद ने कहा है कि शनिवार को हुए इन बम धमाकों में कम से कम सौ लोग मारे गए हैं. उन्होंने कहा कि मारे गए लोगों में "अपने बच्चों को बाहों में लिए औरतें" भी थीं. कम से कम तीन सौ लोग घायल हुए हैं.

स्थानीय मीडिया के मुताबिक अल-कायदा से संबद्ध आतंकवादी संगठन अल-शबाब ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. पांच साल पहले ही सत्ता संभालने वाले राष्ट्रपति महमूद के मुताबिक हमलों में शिक्षा मंत्रालय को निशाना बनाया गया था. धमाके एक दूसरे के कुछ ही मिनटों के भीतर हुए. पहला हमला शिक्षा मंत्रालय के बाहर हुआ और जब वहां राहत और बचाव कार्य शुरू हुआ, तब दूसरा धमाका हुआ. यह वही जगह है जहां करीब पांच साल पहले एक बम धमाके में 500 लोगों की मौत हुई थी.
अल-शबाब एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है जो सोमालिया में लगातार हमले करता रहा है. अगस्त में ही उसने मोगादिशू के एक प्रसिद्ध होटल को निशाना बनाया था. उस हमले में 21 लोगों की जान गई थी. तबमहमूद ने आतंकवादियों के खिलाफ 'संपूर्ण युद्ध' का ऐलान किया था.
रिपोर्टः विवेक कुमार (रॉयटर्स, एपी, एएफपी)
Source: DW
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