नो टोबैको डे: आपकी सेहत ही नहीं जेब पर भी तंबाकू डालती है बड़ा असर

बैंगलोर। 31 मई को पूरी दुनिया में वर्ल्‍ड नो टौबैको डे मनाया जाएगा। तंबाकू एक साइलेंट किलर के नाम से जाना जाता है। लेकिन इसका एक पहलू ऐसा भी है जिस पर शायद ही किसी की नजर जाती होगी।

भारत में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों का इलाज करने की वजह से अर्थव्‍यवस्‍था पर 1,04,500 करोड़ रुपए का अतिरिक्‍त भारत पड़ता है।

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की ओर से एक नई रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के इलाज पर आने वाला प्रत्‍यक्ष खर्च 16,800 करोड़ रुपए है और अप्रत्‍यक्ष तौर पर इसपर 14,700 रुपए खर्च होते हैं।

आगे की स्‍लाइड्स में इस रिपोर्ट की कुछ खास बातों पर भी एक नजर डालिए।

73,000 करोड़ रुपए का खर्च

73,000 करोड़ रुपए का खर्च

इसके अलावा समय से पहले होने वाली मौतों की वजह से 73,000 करोड़ रुपए खर्च हो जाते हैं। इसकी वजह से देश की उत्‍पादकता पर खासा असर पड़ता है। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉक्‍टर हर्षवर्धन की ओर से यह रिपोर्ट जारी की गई है।

जीडीपी पर 1.16 प्रतिशत का असर

जीडीपी पर 1.16 प्रतिशत का असर

वर्ष 2011 में तंबाकू की वजह से होने वाली बीमारियों ने जीडीपी पर 1.16 प्रतिशत असर डाला था। जो रिपोर्ट गुरुवार को जारी की गई है वह एक स्‍टडी पर आधारित है।

कैंसर, कार्डियोवस्‍कुलर और टीबी पर अध्‍ययन

कैंसर, कार्डियोवस्‍कुलर और टीबी पर अध्‍ययन

इस स्‍टडी में तंबाकू के प्रयोग के बाद प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष तौर पर आने वाले इलाज के खर्च पर एक अध्‍ययन किया गया था जिसमें दिल से जुड़ी बीमारियों, सांस नली की बीमारियों, टीबी और कैंसर पर खासा ध्‍यान दिया गया था।

सबसे ज्‍यादा खर्च कार्डियोवस्‍कुलर बीमारियों पर

सबसे ज्‍यादा खर्च कार्डियोवस्‍कुलर बीमारियों पर

रिपोर्ट की मानें तो दिल से जुड़ी बीमारियां यानी कार्डियोवस्‍कुलर डिजीज पर सबसे ज्‍यादा 3,600 करोड़ रुपए डायरेक्‍ट मेडिकल ट्रीटमेंट पर खर्च होते हैं। इसके बाद सांस से जुड़ी बीमारियों पर 2,800 करोड़ रुपए और टीबी पर 2,300 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। कैंसर के इलाज में यह आंकड़ा 1,400 करोड़ रुपए है।

गंभीर समस्‍या से निबटने के तरीके

गंभीर समस्‍या से निबटने के तरीके

इस स्‍टडी में शामिल शोधकर्ताओं की ओर से तंबाकू जैसी गंभीर समस्‍या से लड़ने के लिए कई तरह के उपाय भी दिए गए हैं। साथ ही तंबाकू की वजह से होने वाले नुकसान का सामना करने के तरीकों के बारे में भी बताया गया है।

70 प्रतिशत तक की जाए

70 प्रतिशत तक की जाए

शोधकर्ताओं की मानें तो तंबाकू से जुड़े उत्‍पादों पर एक्‍साइज ड्यूटी को बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर देना चाहिए। उनके मुताबिक रिटेल कीमतों पर अगर यह ड्यूटी बढ़ाई जाती है तो फिर इसका असर देखने को मिल सकेगा।

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