World Music Day: शास्त्रीय संगीत से बीमारियों का इलाज, जानें किस ‘राग’ से कौन सा ‘रोग’ होगा ठीक
World Music Day: आज विश्व संगीत दिवस है। संगीत सुनना हर किसी को पसंद होता है। संगीत हमेशा से ही लोगों के जीवन का हिस्सा रहा है। मगर संगीत दिवस मनाने का प्रस्ताव 1981 में फ्रांस के कल्चरल मिनिस्टर मौरिस फल्यूरेट ने रखा था। इसके बाद 1982 में पहली बार फ्रांस में तत्कालीन सांस्कृतिक मंत्री जैक लैंग ने देश में संगीत के प्रति लोगों की दीवानगी को देखते हुए संगीत दिवस मनाने की घोषणा की थी। साथ ही इस दिन को 'फेट ल म्यूजिक' कहा गया था। संगीत की इस बढ़ती लोकप्रियता के मद्देनजर जल्दी ही यह दिन वर्ल्ड म्यूजिक डे के रूप में पूरी दुनिया में मनाया जाने लगा।
कई देशों में होते हैं कार्यक्रम
फ्रांस में जब पहली बार संगीत दिवस मनाया गया तो इसे 32 से ज्यादा देशों का समर्थन मिला था। इस दौरान बहुत से कार्यक्रम भी आयोजित किए गए थे। देखते-देखते यह दिन काफी लोकप्रिय होता गया। मौजूदा समय में भारत, इटली, ग्रीस, रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, पेरू, ब्राजील, इक्वाडोर, मैक्सिको, कनाडा, जापान, चीन, मलेशिया समेत दुनिया के कई देशों में हर साल 21 जून को विश्व संगीत दिवस मनाया जाता है। विश्व संगीत दिवस के जरिए विश्व के सभी संगीत कलाकारों को एक मंच पर लाया जाता है। उन्हें सम्मानित किया जाता है। इसके साथ ही लोगों के बीच संगीत और वाद्ययंत्रों का सम्मान करना सिखाया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय संगीत दिवस और विश्व संगीत दिवस दोनों अलग हैं
आपको यह जानकारी शायद ही पता हो कि अंतरराष्ट्रीय संगीत दिवस और विश्व संगीत दिवस दोनों अलग-अलग दिन मनाए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय संगीत दिवस हर साल 1 अक्टूबर को मनाया जाता है। तो वहीं विश्व संगीत दिवस 21 जून को मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय संगीत दिवस की शुरुआत 1975 में हुई थी। तब अंतरराष्ट्रीय संगीत परिषद ने इस दिन को मनाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था।
साल 1949 में यूनेस्को ने संगीत से संबंधित मामलों पर सलाह देने के लिए एक सलाहकार निकाय अंतरराष्ट्रीय संगीत परिषद की स्थापना की थी। इसके बाद 1973 में स्विजरलैंड में 15वीं महासभा में संगीत के लिए एक विशेष दिन समर्पित करने का प्रस्ताव पारित किया। इसके बाद 1 अक्टूबर 1975 को पहला अंतरराष्ट्रीय संगीत दिवस मनाया गया था।
कई बीमारियों का इलाज है संगीत
संगीत का उपयोग बतौर थैरेपी भी किया जाता है। रागों के आधार पर तैयार संगीत अनेक रोगों के लिए लाभकारी साबित होता है। आज हम आपको बताएंगे कि किस राग को सुनकर आप कौन सी बीमारी से निजात पा सकते हैं। 'पद्म भूषण' से सम्मानित पंडित साजन मिश्र ने एक इंटरव्यू में इन बातों का जिक्र किया था। उन्होंने बताया कि अगर आप हृदयरोग से ग्रस्त हैं तो आपको राग दरबारी व राग सारंग सुनना चाहिए। अनिद्रा रोग के होने पर राग भैरवी व राग सोहनी सुनना लाभकारी होता है। पित्त रोग के होने पर राग खमाज सुनना चाहिए।
वहीं जिन लोगों की याददाश्त कम हो या कम हो रही हो, उन्हें राग शिवरंजनी सुनने से बहुत लाभ मिलता है। इसके साथ ही आपको बता दें कि राग पीलू रक्त की कमी के उपचार में काम आता है। तो राग जयजयवंती सामान्य शारीरिक कमजोरी में लाभ देता है। डाइजेशन संबंधी रोगों में राग देस व स्वेमराज सुनना लाभदायक होता है।
तबला वादक ओजस ने भी संगीत और बीमारियों से जुदा एक किस्सा बताया है। जिससे शास्त्रीय संगीत के महत्व को सबसे अच्छी तरह समझा जा सकता है। यह किस्सा कोमा में पड़े एक मरीज के बारे में है। जिसे राग दरबारी कान्हड़ा बहुत पसंद था। जब उस मरीज को राग दरबारी कान्हड़ा के स्वर और कंपन सुनाए गये, तो वह अगले ही दिन कोमा से बाहर आ गया था।
इसके अलावा, राग सारंग सिरदर्द को ठीक करता है। राग तोड़ी सिरदर्द और क्रोध से निजात दिलाता है। वहीं राग पंचम पेट के विकारों को कम करता है। राग वृंदावन सारंग से अवसाद को बड़ी सीमा तक कम किया जा सकता है।












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