World Hindi Day: विश्व में बढ़ रहा है हिंदी का दबदबा, तथ्य जानकर चौंक जाएंगे आप
विश्व के कई देशों में हिंदी बोली और पढ़ी जाती है। यही नहीं, दुनिया के 6 देशों में हिंदी को संवैधानिक दर्जा भी प्राप्त है।

World Hindi Day: आज विश्व हिंदी दिवस है। भारत के अलावा दुनिया के कई देशों में हिंदी बोली जाती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के अलावा पाकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव, सिंगापुर, थाईलैंड, चीन, जापान, ब्रिटेन, जर्मनी, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, मॉरिशस, यमन, युगांडा, कनाडा और फिजी जैसे कई देशों के लोग हिंदी भाषा का उपयोग करते हैं।
दक्षिण प्रशांत महासागर में ऐसा ही एक देश है जिसका नाम है फिजी। बड़ी बात यह है कि यह भारत के अलावा एक ऐसा देश है जहां की राजभाषाओं में हिंदी का नाम भी शामिल है। इस देश की आबादी में हिंदी भाषी लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। 'द इकोनोमिस्ट' के अनुसार 1977 में 255,000 की संख्या के साथ फिजी मूल के नागरिक अल्पसंख्यक हो गये थे। 600,000 की कुल जनसंख्या में से लगभग आधे नागरिक भारतीय मूल के थे, जबकि शेष चीनी, यूरोपीय और मिश्रित वंश के हैं।
वहीं फिजी की तरह गुआना, सूरीनाम, टोबोगो, ट्रिनिडाड तथा अरब अमीरात - इन देशों में भी हिंदी को अल्पसंख्यक भाषा के रूप में संवैधानिक दर्जा प्राप्त है। वैसे ये हमारी हिंदी के गर्व की बात है। WorldData.Info के मुताबिक हिंदी भारत सहित दुनियाभर में तकरीबन 577.10 मिलियन यानि 57 करोड़ 71 लाख लोग हिंदी बोलते हैं। वहीं दूसरी रिपोर्ट में हिंदी तकरीबन 70 से 80 करोड़ लोग बोलते हैं। कुल मिलाकर कहा जाए तो आंकड़े भी स्पष्ट व्याख्या नहीं करते हैं। हिंदी में ब्रज, अवधी, भोजपुरी, राजस्थानी, पहाड़ी, बुंदेली, बघेली, मागधी, छत्तीसगढ़ी और जाने कितनी उपजन भाषाओं का भंडार है।
संयुक्त राष्ट्र संघ में भी हिंदी को मिला दर्जा
संयुक्त राष्ट्र की प्रक्रिया नियम 51 से 57 में कार्य संचालन के लिए भाषाओं की व्यवस्था की गई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रथम अधिवेशन (1946) में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय को छोड़कर इसके सभी संगठनों के लिए अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी, चीनी और स्पेनिश को आधिकारिक भाषा के रुप में स्वीकार किया गया था। फिर बाद में साल 1973 में अरबी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा का दर्जा मिला लेकिन अब तक हिंदी को नहीं मिला।
हालांकि, साल 2022 के जून महीने में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पहली बार हिंदी भाषा से जुड़े भारत के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) के सभी जरूरी कामकाज और सूचनाओं को इसकी आधिकारिक भाषाओं के अलावा दूसरी भाषाओं जैसे- हिंदी में भी जारी किया जाए। बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के लिए ये कदम उठाया गया है। भारत की ओर से यह प्रस्ताव लाया गया था। यहां आपको बता दें कि हिंदी को अभी तक संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा नहीं बनाया गया है। वैसे भारत सरकार के द्वारा हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने का प्रयास लंबे वक्त से कूटनीतिक तौर पर किया जा रहा है।
गौर करने वाली बात ये है कि 3 जनवरी, 2018 को लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया था कि संयुक्त राष्ट्र संघ की सातवीं आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को स्थान दिलाने के लिए कुल 193 सदस्य देशों में से दो तिहाई बहुमत यानि न्यूनतम 129 सदस्य देशों के समर्थन की आवश्यकता है। इसके साथ ही हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा की मान्यता दिए जाने के बाद इस पर होने वाला खर्च भी भारत को ही उठाना होगा। एक अनुमान के मुताबिक तकरीबन एक अरब रुपये खर्च करने होंगे।
वहीं साल 2018 से ही करोड़ों हिंदी भाषी लोगों के लिए संयुक्त राष्ट्र ने हिंदी में ट्विटर अकाउंट और न्यूज पोर्टल की शुरुआत की थी। हर हफ्ते संयुक्त राष्ट्र का एक हिंदी ऑडियो बुलेटिन जारी होता है।
क्या हिंदी हमेशा से इतनी व्यापक रही है?
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक हिंदी सबसे व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषा है। यह देश में 52.8 करोड़ लोगों यानी 43.6% आबादी की मातृभाषा है। भौगोलिक स्थिति में हिंदी जानने वाले देश के आधे से अधिक क्षेत्र को कवर करते हैं। करीब 13.9 करोड़ (11% से अधिक) ने हिंदी को दूसरी भाषा बताया। ये इसे 55% आबादी की मातृभाषा या दूसरी भाषा बनाती है।
हर जनगणना में इसका हिस्सा बढ़ता रहा है। 1971 से 2011 के बीच, हिंदी भाषी 20.2 करोड़ से बढ़कर 52.8 करोड़ हो गए। यानी 40 साल में हिंदी वाले 161% बढ़े। बांग्ला 1971 में 8.17% लोगों के साथ दूसरी मातृभाषा थी। 2011 में इसकी संख्या मामूली घटकर 8.03% बची। हालांकि पंजाबी इस दौरान 2.57% से बढ़कर 2.74% हो गई।
हिंदी भाषा को लेकर पीएम मोदी
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हिंदी भाषा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रेम जगजाहिर है। कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी में भाषण देना पसंद करते हैं। साल 2022 के अक्टूबर महीने में ही कानून से जुड़े एक सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा था कि युवाओं के लिए मातृभाषा में एकेडमिक सिस्टम बनाना होगा, लॉ से जुड़े कोर्सेस हिंदी में हो। वहीं 14 सितंबर 2022 को उन्होंने कहा था कि हिंदी ने विश्वभर में भारत को एक विशिष्ट सम्मान दिलाया है। इसकी सरलता, सहजता और संवेदनशीलता हमेशा आकर्षित करती है। साथ ही कहा कि हिंदी दिवस पर मैं उन सभी लोगों को हृदय से अभिनंदन करता हूं, जिन्होंने इसे समृद्ध और सशक्त बनाने में अपना अथक योगदान दिया है। वहीं केंद्रीय गृहमंत्री भी कई बार बोल चुके हैं कि राज्यों को हिंदी को अंग्रेजी के विकल्प के रूप में आगे बढ़ाना चाहिए।
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