भारत नहीं अमेरिका में है दुनिया का सबसे लंबा रेल नेटवर्क

नई दिल्‍ली। रेल मंत्री सुरेश प्रभु आज अपना दूसरा रेलवे बजट पेश करेंगे। इस बजट पर हर आम आदमी की नजरें हैं।

अगले एक वर्ष के अंदर उसे कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी, इसके लिए हर आम यात्री दिल थामकर रेलवे बजट का इंतजार कर रहा है।

क्यों भारत में रेल बजट के लिए है अलग से प्रावधान

क्‍या आप जानते हैं कि दुनिया का वह कौन सा देश है जिसके पास सबसे लंबा रेलवे नेटवर्क होने का रिकॉर्ड है? वह देश भारत नहीं बल्कि अमेरिका है।

जी हां, अमेरिका के पास दुनिया का सबसे लंबा रेलवे नेटवर्क होने का रिकॉर्ड है। अमेरिका के बाद चीन का नंबर आता है फिर रूस का और फिर भारत का नंबर आता है।

सुरेश प्रभु आज कर सकते हैं ये 10 बड़े ऐलान

रेलवे की टेक्‍नोलॉजी पर नजर रखने वाली एक वेबसाइट की ओर से कुछ दिनों पहले एक रिपोट जारी की गई थी। इसी रिपोर्ट में दुनिया के टॉप 10 उन देशों का जिक्र था जहां सबसे ज्‍यादा दूरी तक रेलवे ट्रैक का जाल बिछा हुआ है।

आगे की स्‍लाइड्स पर क्लिक करिए और जानिए कौन से वे टॉप 10 देश जहां पर सबसे लंबा रेलवे नेटवर्क है।

अमेरिका- 250,000 किमी

अमेरिका- 250,000 किमी

अमेरिकी रेलवे दुनिया का सबसे लंबा रेल नेटवर्क यानी 250,000 किमी का नेटवर्क ऑपरेट करती है। अमेरिका में 80 प्रतिशत रेल नेटवर्क मालगाड़‍ियों के लिए है वहीं कुल पैसेंजर नेटवर्क 35,000 किमी तक का है। अब अमेरिका वर्ष 2030 तक 27,000 किमी के नेशनल हाईस्‍पीड रेल सिस्‍टम पर काम कर रहा है।

चीन-100,000 किमी

चीन-100,000 किमी

चीन का रेल नेटवर्क करीब 1000,000 किमी तक फैला है। चाइना रेलवे ने करीब 2.8 बिलियन पैसेंजर्स और 3.22 बिलियन मालभाड़े को ढोने का रिकॉर्ड अपने नाम किया था।

रूस- 85,500 किमी

रूस- 85,500 किमी

रूस का रेल नेटवर्क करीब 85,500 किमी तक फैला है। वर्ष 2013 में रूस ने 1.8 बिलियन पैसेंजर्स और 1.2 बिलियन बोझा ढोने का रिकॉर्ड अपने नाम किया था। हाल ही में रूस ने अपनी हाईस्‍पीड ट्रेन की शुरुआत कर दी है जो कि सेंट पीट्सबर्ग से कीव तक जाती है।

इंडियन रेलवे-65,000 किमी

इंडियन रेलवे-65,000 किमी

इंडियन रेलवे 65,000 किमी तक के नेटवर्क को ऑपरेट करती है। नेटवर्क के मामले में भले ही यह नंबर चार पर हो लेकिन पैंसेजर्स ढोने के लिहाज से यह नंबर वन है। करीब आठ बिलियन लोग भारत में रेल से सफर करत हैं तो वहीं 1.1 मिलियन बोझा इंडियन रेलवे ढोती है।

कनाडा - 48,000 किमी

कनाडा - 48,000 किमी

48,000 किमी के रेलवे ट्रैक को ऑपरेट करने वाली कनैडियन रेलवे दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी रेलवे है। 12,500 किमी तक जहां पैसेंजर लाइंस हैं तो वहीं देश में दो बड़े रेलवे ट्रैक हैं जो बोझा ढोने को काम करते हैं।

जर्मनी-41,000 किमी

जर्मनी-41,000 किमी

जर्मनी की डॉयचे बान इस देश में 41,000 किमी रेल नेटवर्क को ऑपरेट करने वाली कंपनी है। करीब 80 प्रतिशत माल ढुहाई का ट्रैफिक इस लाइन पर रिकॉर्ड किया गया है। वहीं करीब 99 प्रतिशत तक यात्री लंबी दूरी के लिए इस नेटवर्क का प्रयोग करते हैं। जर्मनी में करीब 150 प्राइवेट कंपनियां रेलवे के लिए काम करती हैं।

ऑस्‍ट्रेलिया- 40,000किमी

ऑस्‍ट्रेलिया- 40,000किमी

40,000 किमी वाले रेल नेटवर्क को ऑस्‍ट्रेलिया में भारत की ही तरह सरकार की ओर से मैनेज किया जाता है। इस देश में ज्‍यादातर रेलवे इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर में राज्‍यों की भी अहम भूमिका होती है। हालांकि बड़े रेल रूट्स को कई प्राइवेट कंपनियां मैनेज करने लगी हैं।

अर्जेंटीना-36,000 किमी

अर्जेंटीना-36,000 किमी

36,000 किमी वाले अर्जेंटीना के रेलवे नेटवर्क को किसी जमाने में ब्रिटेन और फ्रांस की कंपनियां मैनेज करती थीं। द्वितीय विश्‍व युद्ध के बाद अर्जेंटीना में 47,000 किमी तक का रेल नेटवर्क हुआ करता था।

फ्रांस-29,000 किमी

फ्रांस-29,000 किमी

29,00 किमी वाले फ्रांस रेल नेटवर्क यूरोप का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। फ्रांस में 50 प्रतिशत से ज्‍यादा रेलवे ट्रैक बिजली से ऑपरेट होते हैं।

ब्राजील-28,000 किमी

ब्राजील-28,000 किमी

ब्राजील में पहली रेलवे लाइन वर्ष 1984 में संचालित हुई थी। हालांकि इस देश में 1957 में रेलवे का राष्‍ट्रीयकरण हो गया था। वर्ष 2007 तक इस देश में रेलवे को निजी हाथों में दे दिया गया।

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