नरेंद्र मोदी को क्यों डरना चाहिये मुख्तार अंसारी से?
वाराणसी की कहानी पर आधारित रांझणा फिल्म में एक डॉयलॉग है, "मोहल्ले के लड़के का प्यार अकसर डॉक्टर और इंजीनियर ले जाते हैं, दिल छोटा न कर..." अगर लोकसभा चुनाव पर एक नजर डालें तो यहां मोहल्ले का लड़का मुख्तार अंसारी हैं, इंजीनियर केजरीवाल तो डॉक्टर नरेंद्र मोदी हैं। जी हां वाराणसी की फाइट भी कुछ ऐसी ही दिखाई दे रही है। अब अगर आप पूछेंगे कि ज़ोया कौन है, तो वो है वाराणसी की संसदीय क्षेत्र, जिसे पाने के लिये तीनों पूरी जुगत लगा देंगे।
मुख्तार अंसारी ऐलान कर चुके हैं, कि मोदी को हराने के लिये वो वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे, वहीं केजरीवाल बार-बार कह रहे हैं कि जनता ने हां कर दी तो वो मोदी को सीधी टक्कर देने के लिये तैयार हैं। यानी एक तरह से यहां एक ज़ोया के लिये तीन-तीन कुंदन सामने बैठे हैं। पहले कुंदन की बात करें तो वो नरेंद्र मोदी हैं, जो वाराणसी की संसदीय सीट से कहते हैं, "तुमसे प्यार करना मेरा टैलेंट है, इसमें तुम्हारा कोई हाथ नहीं तुम्हारी जगह कोई भी होती तो मैं उससे भी इतना ही टूट के प्यार करता....।"
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10-10 वाहनों के काफिलों में चलने का विरोध कर ऑटो और लोकल ट्रेन में सफर करने वाले केजरीवाल को जब इस वाराणसी नाम की जोया से प्यार हुआ तो उन्होंने कहा, "मेरे पीछे स्कूटर पर बैठना पड़ेगा।"
वहीं मुख्तार अंसारी जो सालों से वाराणसी, मऊ, गाजीपुर और जौनपुर की गलियों में सिक्का जमाये बैठे हैं उन पर सिर्फ एक डॉयलॉग फिट बैठता है- "साढ़े सात साल में तो शनीचर भी चला जाता है, ये चक्कर तो हम आठ नौ साल से देख रहे हैं..." जाहिर है मुख्तार अंसारी ने जिस तरह मोदी को चुनौती दी है, वो उनका पिछले कई वर्षों का एक्सपीरियंस ही है, कि वाराणसी व आस-पास के जिलों में उनका ही सिक्का चलता है, कितने आये, कितने चले गये।
अब खबर का गंभीर पहलु
खैर मजाक बहुत हुआ चलिये अब आपको ले चलते हैं इस खबर के गंभीर पहलु की ओर जहां बाहुबली मुख्तार भले ही जेल में बंद है, लेकिन इस इलाके में उनकी तूती आज भी बोलती है। अगर आप यह सोच रहे हैं कि नरेंद्र मोदी के 56 इंच के सीने और केजरीवाल के क्रांतिकारी अंदाज को वाराणसी में कोई खतरा नहीं, तो आप गलत हैं। कुछ बातें हैं, जो मुख्तार की इस सीट पर दावेदारी को मजबूत कर सकती हैं।
2009 में मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ अंसारी भले ही हार गये, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यहां पर उनका राजनीतिक दबदबा फीका पड़ गया। आगरा जेल में बंद 56 वर्षीय मुख्तार अंसारी की खुद की पार्टी कौमी एकता दल यहां के मुस्लिम वोट पर कब्जा करने की पूरी कोशिश में जुटी है। मुस्लिम वोट और अंसारी की दबंगई के समीकरण सलाइडर में पढ़ सकते हैं।

मोदी को खतरा कैसे
अगर केजरीवाल और अंसारी दोनों मैदान में उतरे तो मोदी के मुस्लिम वोट अंसारी काटेंगे और हिन्दू वोटों का बड़ा हिस्सा केजरीवाल के खाते में जा सकता है। ऊपर से मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी ने विजय प्रकाश जायसवाल भी अच्छी संख्या में दलित वोटों पर सेंध लगा सकते हैं।

मुख्तार अंसारी और वाराणसी का रिश्ता
गाजीपुर के मूल निवासी अंसारी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1927 में अध्यक्ष रहे मुख्तार अहमद अंसारी के परिवार से हैं। इस परिवार की आपराधिक गतिविधियों से हर कोई वाकिफ है।

पूर्वांचल के अपराधी
1990 के दशक में अंसारी पर हत्या के कई मामले दर्ज हुए। पूर्वांचल में अपराधियों के नेटवर्क को विस्तृत रूप देने में मुख्तार अंसारी का बड़ा हाथ माना जाता है।

अंसारी की हत्या की साजिश
बताया जाता है कि 2001 में पूर्वांचल के बाहुबली बृजेश सिंह ने अंसारी की हत्या करवाने की साजिश रची थी। मऊ से लखनऊ जाते वक्त हाइर्वे पर ही अंसारी के काफिले पर ताबड़तोड़ गोलीबारी हुई थी। उस हमले में अंसारी तो बच गये, लेकिन उनके तीन साथी मारे गये।

2005 में कृष्णानंद राय की हत्या
मुख्तार अंसारी के गुर्गों ने 2005 में कृष्णानंद राय के काफिले पर हमला किया और राय समेत 7 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। उस हमले में एके-47 का इस्तेमाल हुआ था।

जेल से भी जीते चुनाव
2009 में चुनाव हारने के बाद भी 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कौमी एकता दल से चौथी बार लगातार विधायकी का चुनाव जीते।












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