Madarsa Education: मदरसा शिक्षा पर क्यों लगता है आतंकवाद फैलाने का आरोप, जानें इससे जुड़े तथ्य
Madarsa Education: विदेशी चंदे से देश विरोधी गतिविधियों और जबरन धर्मांतरण को बढ़ावा मिलने की जानकारी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया है कि इसकी जांच एसआईटी से कराएंगे। मदरसा चलाने वाली संस्थाओं के विदेशी मुद्रा अर्जन खातों (ईईएफसी) में हुए लेनदेन की पूरी जांच की जाएगी। उत्तरप्रदेश में लगभग 4,000 ऐसे मदरसे हैं जिन्हें विदेशी फंडिंग मिलने की सूचना है। इनमें से कुछ मदरसों पर विदेशी चंदे के दम पर धर्मांतरण कराने और कट्टरता बढ़ाने वाला साहित्य बच्चों को पढ़ाने का आरोप है।
यह पहला मौका नहीं है जब किसी सरकार ने मदरसों की विदेशी फंडिंग और उसके उपयोग पर जांच कराने का फैलसा किया है। पूरी दुनिया में मदरसा शिक्षा और उसके प्रभावों के साथ कुछ खास मुस्लिम देशों द्वारा फंडिंग को लेकर चिंता जताई जा रही है और अलग अलग सरकारें इसकी जांच कर रही हैं। इस विषय की हम भी पूरी पड़ताल करने की कोशिश करते हैं।

दुनिया में मदरसा शिक्षा का फैलाव
दुनिया में मुसलमानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ईसाइयों के बाद दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक समूह इस्लाम के मानने वालों का है। प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, 2015 में दुनिया में 1.8 बिलियन मुस्लिम थे, जो 2030 तक बढ़कर 2.2 बिलियन हो जाएंगे। दुनिया की कुल आबादी की लगभग 26 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की होगी। लगभग 20 देश ऐसे हैं, जिनमें भारत प्रमुख है, जहां मुस्लिम आबादी बड़ी संख्या में है। इंडोनेशिया, पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश, तुर्की , अरब और ईरान जैसे देशों में मुस्लिम आबादी एक प्रमुख कम्युनिटी है।
जिन देशों में मदरसे प्रमुख रूप से मजहबी शिक्षा का केंद्र बने हुए हैं, उनमें अल्जीरिया, बांग्लादेश, मिस्र, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, कोसोवो, माली मोरक्को, पाकिस्तान रूस से अलग हुए देश, सऊदी अरब, सीरिया, ट्यूनीशिया, तुर्की और यमन हैं। मदरसे तो फ्रांस और ब्रिटेन में भी खुल गये थे लेकिन वहां सरकारें उन पर कड़ी नजर रखती है, और किसी भी शिकायत पर तत्काल करवाई करती है।
किस तरह की तालीम मिलती है मदरसा में
मदरसा एक इस्लामी धार्मिक विद्यालय है, जहां मुख्य रूप से धार्मिक शिक्षा, खास कर कुरान और हदीस सहित इस्लामी ग्रंथों के अध्ययन पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। मदरसे में अरबी भाषा और इस्लामी कानून पर भी जोर दिया जाता है। वे इस्लामिक स्कॉलर, जो दीन और दयानत को इस्लाम का अटूट अंग मानते हैं वे मदरसे को एक प्रशिक्षण केंद्र मानते हैं, जहां छोटे मुस्लिम बच्चों को सांसारिक शिक्षा के साथ उच्च इस्लामी शिक्षा प्रदान की जाती है न कि उन्हें जिहाद सिखा कर आतंकवादी बनाया जाता है।
ज्यादातर मामलों में मदरसा मस्जिद से जुड़े मौलवी द्वारा शुरू किया जाता है, जो पढ़ाने का शुल्क नहीं लेते। वह दिन में 5 बार नमाज अता करवाने से लेकर उर्दू और अरबी में कुरान पढ़ने का प्रशिक्षण देते हैं। मदरसे में पढ़ने वाले बच्चे बड़े होकर इस्लाम की शिक्षा देने और कुरान पढ़ने दूर दूर जाते हैं। लेकिन मदरसा शिक्षा का यह एक पहलू हैं, इसका दूसरा पहलू तालिबान, आईसआईएस, हमास और लश्कर जैसे आतंकवादी संगठन के वे खुंखार आतंकवादी हैं, जो मदरसा शिक्षा से ही बाहर निकले हैं। उनको देख कर ही दुनिया को मदरसा शिक्षा और उसके दर्शन से भय लगने लगा है।
एक नहीं सैकड़ों ऐसे उदहारण मिले हैं जिनसे इस बात की पुष्टि होती है कि मदरसा के जरिये ही वहाबीवाद की शिक्षा दी जा रही है। यह एक ऐसी शिक्षा है जो इस्लाम का एक क्रूर चेहरा प्रस्तुत करती है। गरीबों के नाम पर चलाये जा रहे मदरसों के पास अरबों की इमदाद आखिर किस उद्देश्य से आती है।
कौन देता है अरबों डॉलर मदरसों को
मदरसों को आर्थिक मदद देने वालों में सऊदी अरब का नाम सबसे ऊपर है। बताया जाता है कि पूर्व सोवियत संघ को अफ़ग़ानिस्तान से निकाल बाहर फेंकने के लिए सऊदी ने ही धन और दान के जरिये अफगान जिहादियों को तैयार किया था। मदरसों के जरिये ही हथियार चलाने और विस्फोटक तैयार करने की ट्रेनिंग दी गई थी।
1979-1989 के दौरान, पाकिस्तान-अफगानिस्तान क्षेत्र में एक नए तरह के मदरसे का उदय हुआ। यहां काफिरों के खिलाफ युद्ध की तैयारी शुरू करवाई गई। सोवियत संघ के खिलाफ यह लड़ाई आज पूरे पश्चिम के देशों के खिलाफ लड़ाई बन गई है, जिसमें मुख्य निशाना अमेरिका है। पूर्व अमेरिकी राजदूत रिचर्ड होलब्रुक का कहना है कि मदरसों के नेटवर्क,जो अल कायदा एक हिस्सा है, के लिए धन का मुख्य स्रोत सऊदी अरब है।
होलब्रुक के अनुसार आतंक और कट्टरता की अंतर्धारा अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में साथ-साथ चलती है और उज्बेकिस्तान तक फैली हुई है। इसके प्रतिबिंब बोस्निया, कोसोवो, इंडोनेशिया और फिलीपींस में भी देख सकते हैं। पाकिस्तान के मदरसे में अफगान और भारत युद्ध की ट्रेनिंग लड़ाके करते हैं। सऊदी फंडिंग के बिना पाकिस्तान, भारत और अफगानिस्तान में जिहाद का प्रसार नहीं हो सकता।
खुद पाकिस्तान ने 2015 में एक स्कूल में तालिबान द्वारा 150 से अधिक बच्चों के मार दिए जाने के बाद यह सवाल करना शुरू कर दिया था कि क्या मदरसों के नाम से आने वाले सऊदी अरब के धन से हिंसक चरमपंथ को तो बढ़ावा नहीं मिल रहा है।
भारत में मदरसों के जरिये हिंसा की कोशिश
भारत के कई राज्यों में मदरसों की आड़ में आतंक की गतिविधियां चलती हुई पाई गई हैं। 2022 में असम में छह मदरसा शिक्षकों समेत 17 लोगों को आतंकवादी समूहों से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उनका अल-कायदा (एक्यूआईएस) और बांग्लादेश स्थित अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) के साथ संबंध पाया गया। ये सभी बारपेटा और मोरीगांव जिलों मदरसा की आड़ में आतंकी नेटवर्क चला रहे थे। असम मुख्यमंत्री ही नहीं , बंगाल, बिहार, उत्तरप्रदेश , केरल और मध्यप्रदेश के मदरसों में भी देश विरोधी गतिविधियों के लिए छापे पड़ते रहते हैं।
चाहे नूपुर शर्मा के खिलाफ हो या फिर धर्मगुरु यति नरसिंहानंद के खिलाफ, इस्लामिक सस्थाओं के प्रदर्शन में "गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सजा, सर तन से जुदा" के नारे लगाने वाले 10 से 15 साल के बच्चे इन्हीं मदरसे से लाये जाते हैं। यह बताता है कि मदरसों में इस्लाम की शिक्षा के नाम पर छोटी उम्र से ही कट्टरपंथी इस्लाम की शिक्षा दी जाती है। भारतीय खुफिया एजेंसियों का भी मानना है कि मदरसे मुस्लिम बच्चों में कट्टरवाद और धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देते हैं, जो भविष्य में उनके दिमाग में भर दी गई भावनाओं के कारण आतंकवादी बन सकते हैं।
यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज में भी यह बताया गया है कि पाकिस्तानी मदरसे जम्मू-कश्मीर में कट्टरपंथ और धार्मिक आतंकवाद को बढ़ाने में सीधा योगदान दे रहे हैं। पाकिस्तान मदरसे अपने यहां छात्रों की भर्ती ही जम्मू-कश्मीर में लड़ने के लिए भेजने के नाम पर करते हैं। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) जैसे आतंक से जुड़े संगठन कट्टरपंथ और आतंकी विचारधारा के लिए मदरसों के साथ सांठगांठ कर रहे हैं। भारत के प्रति युवा मुसलमानों में नफरत को बढ़ावा देने के पीछे भी इन्ही संगठनों का हाथ है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों का लक्ष्य पूरे कश्मीर में भारत के लिए युद्ध जैसे माहौल पैदा करना था, उसके लिए भी जमात के इस्लामी 300 से ज्यादा मदरसों और स्कूलों की मदद ली जा रही थी। भारत सरकार ने इन सभी मदरसों को बंद कर उनके षड्यंत्र को विफल कर दिया।
क्या यूपी से निकलेगा मदरसा में सुधार का रास्ता
योगी आदित्यनाथ यूपी के मदरसों को बंद करने के बजाय उनमें सुधार के लगातार प्रयास कर रहे हैं। राज्य भर के लगभग 19,000 मदरसों में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें शुरू कर दी गई हैं। उर्दू के साथ साथ हिंदी और अंग्रेजी की पढाई अनिवार्य होगी। यूपी मदरसा बोर्ड का एक पोर्टल लॉन्च किया गया है जिसपर सभी इस्लामिक संस्थानों को अपनी प्रबंध समितियों, शिक्षकों और छात्रों के बारे में जानकारी अपलोड करना आवश्यक कर दिया गया है। सरकार सभी मान्यता प्राप्त मदरसों को आर्थिक मदद दे रही है और अब उन मदरसों पर नकेल भी कसा जाने वाला है, जो बाहरी मदद से अपनी गतिविधियां चला रहे हैं।
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