इतिहास के पन्नों से- बापू ने कहां दिया था अपना पहला भाषण

नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) महात्मा गांधी ने बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी की 14 जनवरी 1916 में स्थापना के अवसर पर एक जनसभा को संबोधित किया था। माना जाता है कि उनका वह भारत में दिया गया पहला सार्वजनिक संबोधन था।

गांधी जी जब बोल रहे थे तब वहां पर बहुत से खास अतिथिगण मौजूद थे। इनमें देश के अनेक गवर्नरों, राजे-रजवाड़ों तथा वाइसराय भी शामिल थे। इस मौके पर अनेक शिक्षाविद वैज्ञानिक एवं समाजसेवी भी उपस्थित थे।

उन्होंने अपने भाषण को अंग्रेजी में देते हुए कहा कि "उनमें इस बात से लज्जा तथा अपमान का भाव पैदा हो रहा है क्योंकि उन पर अपने देशवासियों को किसी विदेशी भाषा में संबोधित करने के लिए दबाव डाला गया।" उनकी इस साफगोई को सुनकर वहां पर मौजूद तमाम लोग सन्न रह गए।

वे यहां पर ही नहीं रूके। गांधी जी ने गहनों से लदे हुए युवराजों की तरफ मुखातिब होते हुए यह भी कहा, "भारत को तब तक आजादी (मुक्ति) नहीं मिलेगी जब तक आप इन गहनों को उतार नहीं नहीं देते।" उनकी इस टिप्पणी से खफा कई युवराज तो वहां से चले ही गए। बता दें कि सन 1916 में वसंत पंचमी के दिन वाराणसी में गंगातट पर बनारसहिंदू विश्वविद्यालय का शिलान्यास हुआ।

इतिहास के पन्नों से- बापू का साबरमती आश्रम

वहां पर तमाम लोग पंडित मदन मोहन मालवीय जी के निमंत्रण पर आए थे। इतिहासकार कहते हैं कि गांधी जी के उक्त भाषण को सुनकर लोगों को समझ आ गया था कि ये शख्स आगे चलकर देश को नेतृत्व देगा। ये अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभाएगा। यही हुआ भी।

साउथ अफ्रीका में

दरअसल गांधी भारत से पहले साउथ अफ्रीका में अश्वेतों के हक में लंबा संघर्ष कर चुके थे। शायद इसलिए सारी दुनिया के अश्वेत उनका आदर करते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी अपने 2010 की भारत यात्रा के समय कहा था कि अगर गांधी जी नहीं होते तो वे अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं बनते।

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