जब कांग्रेस के उम्मीदवारों का चयन खादी कोट का ब्रांड चेक करके किया जाता था
अंकुर सिंह। यह आदमी खादी नहीं पहनता है और सिर्फ यहां आने के लिए इसने ये खादी की वेशभूषा धारण की है। भीड़ में आयी इस आवाज को मोरारजी देसाई ने सुन लिया और उस आदमी को अपनी ओर बुलाया। देसाई जी ने उस व्यक्ति से उसकी खादी की कोटी दिखाने को कहा।
उस व्यक्ति को इस बात का बिल्कुल भी एहसास नहीं था कि मोरारजी वाकई में उसकी खादी की कोटी को देखना चाहते हैं। लेकिन जिस तरह से देसाई जी ने उस व्यक्ति की तरफ देखा उससे इस बात का अंदाजा हो गया था उस वक्ति को मोरारजी वाकई में यह देखना चाहते हैं।
मोरारजी ने उस व्यक्ति की कोटी की कॉलर को अपनी ओर खींचते हुए देखा कि वह किस ब्रांड की है। उन्होंने पाया कि वह कोटी खादी की नहीं बल्कि मिल ब्रांड की है, और इतना काफी था मोरारजी के लिए उस व्यक्ति को खारिज करने के लिए।
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दरअसल नवंबर 1956 में मोरारजी को पटना में कांग्रेस के पर्यवेक्षक के रूप में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन के लिए भेजा गया था, और मोरारजी चाहते थे कि वह बिना किसी पूर्वाग्रह, भेदभाव के सर्वश्रेष्ठ महिला या पुरुष उम्मीदवार को चयनित करें।
लेकिन जिस तरह से मोरारजी ने पटना में उम्मीदवारों का चयन किया उसका उन्हें आने वाले समय में आलोचना भी झेलनी पड़ी। अपनी अगली कड़ी में हम आपको बतायेंगे कि कैसे मोरारजी के इस तरीके की वजह से संसद के गलियारों में पेटीकोट का मजाक बनने लगा था।













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