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Criminal Laws: तीन अपराधिक कानूनों में क्या होंगे बदलाव, इन चार बिंदुओं में समझें

Criminal Laws: गृह मंत्री अमितशाह ने संसद में इंडियन पीनल कोड, कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर और इंडियन एविडेंस एक्ट को बदलने के विधेयकों को पेश किया तो उनके शब्द थे: "आज तीन विधेयक संसद में लेकर आया हूं, वे मोदी जी के पांच प्रण में से एक को पूरा करने वाले हैं। भारतीय दंड विधान अंग्रेजों ने बनाया था और उनकी संसद ने पास किया था। इंडियन पेनल कोड 1860 में बना था तो कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर 1898 में बना था और एविडेंस एक्ट 1872 में। इन तीनों कानूनों को खत्म कर नये कानून बनाने का हमारा प्रस्ताव है। प्रधानमंत्री मोदी के पांच प्रण हैं - विकसित भारत के निर्माण का विराट लक्ष्य हो, गुलामी की हर सोच से मुक्ति हो, भारत की विरासत पर गर्व की भावना हो, देश की एकता और एकजुटता को निरंतर सशक्त करना हो और अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि रखना हो।" अमित शाह गुलामी की हर सोच से मुक्ति के प्रधान मंत्री मोदी के प्रण की बात कर रहे थे।

यह जानना जरूरी है कि ये बदलाव किस तरह के हैं और हमारी न्याय व्यवस्था में इनका प्रभाव क्या होगा और नये कानूनों के पास हो जाने के बाद पुलिस व्यवस्था में क्या बदलाव आने हैं:

What will be the changes in three criminal laws, understand in these four points

1. इंडियन पीनल कोड, कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर और इंडियन एविडेंस एक्ट पूरी तहत समाप्त कर उनकी जगह नये कानून बनाए जा रहे हैं। इन कानूनों को अंग्रेजों ने बनाया था और समय के अनुसार इसमें कई संशोधन किए गए। विभिन्न न्यायाधीशों ने अपने फैसलों में भी इन पर कुछ टिप्पणियां की है। इसलिए जरूरी था कि आधुनिक भारतीय समाज की जरूरत के अनुसार कानून लाएं जाए। नये कानून में दंड के प्रावधान तो रहेंगे ही, क्योंकि क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में न्याय है तो अपराध के लिए दंड भी होगा। लेकिन हमारा समाज हमेशा सुधारात्मक उपायों का हामी रहा है। अब जुर्म का रूप बदल रहा है तो न्याय का दर्शन भी बदला है। बहुत सारी ऐसी धाराएं हैं जिनका कोई औचित्य नहीं बचा है। इसलिए नये कानून में अपराध के अनुपात में दंड का प्रावधान करने की बात कही जा रही है।

2. नये कानून में देशद्रोह को नये परिप्रेक्ष्य में देखा गया है। पुराने कानून में धारा 124 ए के तहत देशद्रोह के मुकदमे चलाए जाते थे। नये कानून में देशद्रोह के लिए धारा 150 के तहत केस दर्ज किए जाएंगे। यहा पर एक स्पष्टीकरण है कि नये कानून में देशद्रोह की जो परिभाषा दी गई है, उसे कड़े पैमाने पर नहीं रखा गया है। इसमें अधिकारी के विवेक पर ज्यादा जोर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी यह कहा है कि देशद्रोह के मुकदमे काफी सावाधानी से दायर किये जाने चाहिए, क्योंकि इस कानून का सबसे अधिक दुरूपयोग होता है। नये कानून में इनवेस्टीगेशन का दायरा बढ़ा दिया गया है।

3. नये कानून में पुलिस के अधिकार को लेकर एक नया दृष्टिकोण रखा गया है। कई जगह पर पुलिस पर अंकुश लगाया गया है और कुछ मामलों में उनका अधिकार बढ़ा दिया गया है। जैसे समय सीमा के अंदर जांच पूरी करना और चार्जशीट दाखिल करने के मामले में पुलिस पर बड़ी जिम्मेदारी डाली गई है। नये कानून का मकसद है पुलिस को उत्तरदायी बनाना। एक समय सीमा के अदंर जांच होने से ना सिर्फ दोषियों को समय से सजा मिलेगी, बल्कि निर्दोष को भी बहुत दिनों तक सताया नहीं जा सकेगा। अब पुलिस अधिकारी मनमाना ढंग से जांच लटका नहीं पाएंगे। न्यायालयों के लिए भी समय सीमा तय होनी चाहिए। नये कानूनों के बाद यदि जांच समय पर अदालतें पहुंच जाती हैं तो समय पर न्याय देने का दबाव भी कोर्ट पर स्वतः आ जाएगा।

4. एविडेंस एक्ट में बदलाव ऐतिहासिक होगा। क्योंकि इस समय अपराध की प्रकृति अलग अलग है। साइबर फ्रॉड का बोलबाला है। कोई किसी के बैंक से पैसा निकाल लेता है कोई ऑनलाइन धोखाधड़ी करता है तो कहीं किसी पोंजी स्कीम में पैसा डूब जाता है। नये एविडेंस कानून में इलेक्ट्रानिक एविडेंस को मान्यता मिलेगी। साथ में साइंटिफिक एविडेंस को भी परिभाषित किया गया है।

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