7.2 लाख वाली पैरामिलिट्री फोर्सेज के जवानों को कैसा और कितना खाना मिलता है
सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज यानी सीएपीएफ के जवानों को गृह मंत्रालय की ओर से तय राशि के तहत मिलती है राशन मनी। हर माह हर जवान के हिस्से आते हैं 2,905 रुपए।
नई दिल्ली। पिछले वर्ष सोशल मीडिया पर आए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के जवान तेज बहादुर यादव का वीडियो आने के बाद हर कोई जानना चाहता है कि आखिर सच क्या है? बीएसएफ और पैरामिलिट्री फोर्सेज के बाकी जवानो को आखिर कैसा खाना दिया जाता है। सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स यानी सीएपीएफ जिसमें बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआपीएफ और सीआईएसएफ आते हैं, उसके लिए खाने का एक स्टैंडर्ड तय किया गया है। जवानों को इसी स्टैंडर्ड के तहत ही खाना दिया जाता है। पढ़ें-जानिए भारत और दुनिया के बाकी सैनिक कैसा खाना खाते हैं
कैसा होता है ब्रेकफास्ट और लंच
9,000 फीट से कम ऊंचाई वाली जगहों पर तैनात सीएपीएफ जवानों को नाश्ते में पराठें,लंच और डिनर में रोटी, सब्जी, दाल, चावल दिया जाता है। कभी-कभी डिनर में खीर सर्व की जाती है। जवानों और ऑफिसर्स को मिलने वाले खाने में अंतर होता है। जहां जवानों को ऑफिसर्स की तुलना में ज्यादा दाल चावल मिलता है तो ऑफिसर्स को ज्यादा मीट और अंडे दिए जाते हैं। एक नजर डालिए कि पैरामिलिट्री फोर्सेज के सैनिकों को खाने में क्या मिलता है और कैसे दिया जाता है। इससे पहले आपको बता दें कि पैरामिलिट्री फोर्सेज की क्षमता वर्तमान समय में 7.2 लाख है। पढ़ें-BSF के एक मेस में पनीर, मछली और दाल

जवानों को मिलता है भत्ता
पैरामिलिट्री फोर्सेज के जवानों को हर माह राशन मनी मिलती है। हर जवान को 2,905 रुपए के हिसाब से हर माह राशन मनी दी जाती है। इस रकम से वह 3,850 कैलोरी प्रतिदिन लेने के अधिकारी हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक इस भत्त को वर्ष 2014 में संशोधित किया गया था। वर्ष 1980 में यह रकम 106 रुपए, वर्ष 1995 में 450 रुपए और वर्ष 2000 में 892 रुपए था।

सियाचिन और कारगिल में जवान
सियाचिन और कारगिल जैसे दुर्गम जगहों पर तैनात जवानों को प्रति दिन 191.04 रुपए स्पेशन राशन के तहत मिलते हैं। इसके अलावा इन्हें हर माह तय भत्ता तो दिया ही जाता है। हर माह जवान अपने राशन भत्त को इकट्ठा करके बटालियन के हेडक्वाटर्र को दे देते हैं। इसके बाद इस रकम को यूनिट्स में बांटा जाता है।

सेना की तरह ही खान-पान
9,000 फीट से कम और 9,000 और 12,000 फीट की ऊंचाई पर तैनात सैनिकों के खान-पान में अंतर होता है। 12,000 फीट से ज्यादा की ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात पैरामिलिट्री फोर्सेज के जवानों को सेना के बराबर ही खाना दिया जाता है। जवानों को रेगुलर राशन के अलावा ड्राई फ्रूट्स जिसमें बादाम और काजू शामिल होते हैं, चॉकलेट्स, इंस्टेंट नूडल्स और फ्रूट जूस दिया जाता है।

होती है एक फूड चेन
हर यूनिट का एक मेस कमांडर होता है जो हेड कॉन्सटेबल की रैंक का होता है। मेस में दो तरह के राशन आते हैं-ताजा राशन जैसे दूध, दही, पॉल्ट्री प्रॉडक्ट्स और दूसरे सामान। दूसरा-सूखा राशन जैसे गेहूं, दाल, चावल और चीन के जैसे बाकी चीजें। सूखे राशन के लिए राशन ऑफिसर या मेस कमांडर या फिर हर यूनिट की अपनी एक लिस्ट होती है। इस लिस्ट को बोर्ड ऑफ ऑफिसर्स के सामने हर माह पेश किया जाता है। बोर्ड की ओर से लिस्ट के मंजूरी दी जाती है। फिर से लोकल परचेज कमेटी यानी एलपीसी को भेजा जाता है। यह कमेटी बाजार में मौजूद अच्छे दामों पर अध्ययन करती है और फिर बेस्ट क्वालिटी के प्रॉडक्ट्स को खरीदती है।

कमेटी की ओर से सिफारिश
कमेटी राशन को फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया या फिर पास के बाजार से खरीदती है। अगर कमेटी को किसी वजह से खुले बाजार से राशन लेना होता है फिर एक सैंपल और उसके दामों के बारे में एक रिपोर्ट जमा करनी होती है। रिपोर्ट के साथ ही साथ कमेटी की सिफारिशें कमांडिंग ऑफिसर को भेजी जाती हैं। कमांडिंग ऑफिसर की ओर से खरीद को मंजूरी दी जाती है या फिर दामों को लेकर और स्पष्टीकरण मांगा जाता है।

ताजा राशन खरीद की प्रक्रिया
ताजा राशन खरीदने के लिए मेस कमांडर कैश का प्रयोग करता है और पास के मार्केट से राशन खरीदता है या फिर बाद में वह राशन का बिल अपने सीनियर्स को दे देता है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक तेज बहादुर वाले एपिसोड के बाद अब कैश लेस ट्रांजेक्शन पर विचार हो रहा है।

किसकी कितनी कैलोरी
पैरामिलिट्री फोर्स- 3,850
सेना
- मैदानी इलाकों में 3,906
- ऊंचाई वाले इलाकों में-4664 अमेरिकी सेना-4,000 से 5,000 कैलोरी












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