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Sugar Prices: चीनी के दाम में वृद्धि, उत्पादन में कमी या कोई और कारण?

Sugar Prices: पिछले कुछ समय से चीनी के दाम में वृद्धि देखी जा रही है। हालांकि वैश्विक स्तर पर भी चीनी के दाम उच्चतम स्तर पर पहुंच गये है। इसका असर भारत के घरेलू बाजार में भी देखा जा रहा है। खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में लगभग 9.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।2023 के सितंबर माह में यह सूचकांक 162.7 दर्ज किया गया, जो जनवरी 2011 (183.2) के बाद सर्वाधिक है।

विषेषज्ञों का मानना है कि आगामी चीनी सत्र में अल नीनो (जलवायु संबंधी घटना) के कारण गन्ने की पैदावार कम होने की संभावना है, जिससे चीनी उत्पादन में कमी होना स्वाभाविक है। इसी के चलते चीनी की कीमतों में वृद्धि देखी जा रही है। इस वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार चीनी के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को आगे भी जारी रख सकती है। वर्ष 2022-23 के दौरान भारत सरकार ने चीनी निर्यात को 60 लाख टन तक सीमित कर दिया था।

what is reason behind Increase in sugar prices and production

भारत में चीनी उत्पादन

भारत चीनी उत्पादन में ब्राजील के बाद दूसरे स्थान पर है। भारत में चीनी का उत्पादन अधिकतर गन्ने से ही होता है। अगर पिछले कुछ वर्षों में गन्ने की पैदावार व चीनी का उत्पादन देखें तो वर्ष 1990-91 में 36.9 लाख हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की पैदावार हुई, जिससे 122.32 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ। वहीं अगले एक दशक बाद, यानि 2000-01 में 43.2 लाख हेक्टेयर गन्ने की फसल से 176.65 लाख टन चीनी का उत्पादन किया गया। यानि इस दशक में करीब 17 प्रतिशत गन्ने की पैदावार बढ़ी, और लगभग 44.26 प्रतिशत से भी ज्यादा चीनी के उत्पादन में वृद्धि हुई।

वर्ष 2021-22 में 56 लाख हेक्टेयर गन्ने की खेती से 368 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ। इसके साथ-साथ 2022-23 गन्ना वर्ष के दौरान विषेषज्ञों का अनुमान था कि लगभग 358 लाख टन चीनी का उत्पादन होगा, परंतु यह घटकर 320 लाख टन रह गया है। यानि इस गन्ना वर्ष में पिछले गन्ना वर्ष की तुलना में 10.6 प्रतिशत चीनी का उत्पादन कम हुआ और इसका अगामी गन्ना वर्ष 2023-24 में भी कम होने की संभावना है।

भारत में चीनी खपत

भारत विश्व का सबसे बड़ा चीनी उपभोक्ता देश है। वर्ष 2018-19 में जहां 275 लाख टन चीनी की खपत थी, वहीं 2021-22 में यह 290 लाख टन पहुंच गई। वर्ष 2021-22 से चीनी की खपत में मामूली वृद्धि हुई है वहीं चीनी उत्पादन लगभग 320-350 टन प्रति वर्ष है। भारत में पिछले कुछ वर्षों में चीनी खपत में वृद्धि तो अवश्य हुई है, परंतु प्रति व्यक्ति चीनी खपत (प्रति वर्ष) में गिरावट दर्ज हुई है। वैश्विक स्तर पर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष चीनी की खपत औसत 22 किग्रा. है, जबकि भारत में यह खपत 19 किग्रा. है।

भारत का चीनी निर्यात

भारत मुख्यतः इंडोनेशिया, बांग्लादेश, सऊदी अरब, इराक व मलेशिया को चीनी निर्यात करता है। भारत ने वर्ष 2021-22 के दौरान लगभग 110 लाख टन चीनी (34,344.69 करोड़ रूपये मूल्य) का निर्यात किया था, जो अभी तक का चीनी का उच्चतम निर्यात है। जबकि इससे पहले 2017-18 में मात्र 6.2 लाख टन ही चीनी का निर्यात किया गया था। वहीं 2018-19 में 38 लाख टन, 2019-20 में 60 लाख टन व 2020-21 में 70 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया।

अप्रैल 2022 से जनवरी 2023 तक भारत ने 37,397.86 करोड़ रूपये की 50.04 लाख टन चीनी का निर्यात किया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 26,545.76 करोड़ रूपये की चीनी का निर्यात किया गया था।

सरकार ने देश में चीनी के दाम को नियंत्रित करने के लिए वर्ष 2022-23 के दौरान केवल 60 लाख चीनी निर्यात करने की अनुमति दी थी। संभावना जतायी जा रही है कि भारत सरकार द्वारा आगामी गन्ना वर्ष के दौरान भी चीनी के निर्यात पर यह प्रतिबंध जारी रह सकता है।

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