क्या है PMAY-G, जिस पर Kashmir में मचा है हंगामा?
जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा बेघर लोगों को जमीन देने के फैसले पर घाटी में विवाद छिड़ गया है। कश्मीर घाटी में राजनैतिक दलों का आरोप है कि इस ‘लैंड स्कीम' के जरिये सरकार बाहर से लाये गये।
जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा बेघर लोगों को जमीन देने के फैसले पर घाटी में विवाद छिड़ गया है। कश्मीर घाटी में राजनैतिक दलों का आरोप है कि इस 'लैंड स्कीम' के जरिये सरकार बाहर से लाये गये लाखों लोगों को राज्य में बसाने की योजना बना रही है। दरअसल, 3 जुलाई को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा था कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत सरकार भूमिहीनों को पांच मरला (लगभग 1,361 वर्ग फुट) जमीन देगी। अब इस फैसले को लेकर राजनैतिक गहमागहमी होनी शुरू हो गयी है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और राज्य के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने भी उपराज्यपाल से लाभार्थियों के संबंध में स्पष्टता की मांग की है।
क्या है जमीनों के आवंटन का मामला?
जम्मू और कश्मीर में इस स्कीम के तहत 'सभी के लिए आवास' के उद्देश्य के अनुरूप, केंद्र शासित प्रदेश सरकार ने एसईसीसी और आवास+श्रेणियों के तहत 1.99 लाख घरों को मंजूरी दी थी और अबतक लगभग 1.36 लाख घरों को पूरा कर लिया गया है। इसी बीच उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 2,711 मामलों में भूमिहीनों को जमीन देने के प्रस्ताव को मंजूर किया है। राज्यपाल ने स्पष्ट किया है कि जमीन का आवंटन सिर्फ उन लोगों के लिए है, जिन्हें मकान दिये जाने वालों की 2018-19 की स्थायी वेटिंग लिस्ट से बाहर रखा गया था।

महबूबा मुफ्ती ने उठाये ये सवाल?
महबूबा ने कहा कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद सरकार जम्मू और कश्मीर को इनाम के रूप में देख रही है। पुराने समय में युद्ध के बाद, पराजित राष्ट्र के लोगों और भूमि को इनाम के रूप में माना जाता था। उसी तरह, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद हमारी भूमि और हमारे संसाधनों को इनाम के रूप में माना जा रहा है। जम्मू और कश्मीर एक ग्रीन बेल्ट है और वर्तमान सरकार इसे स्लम में बदलना चाहती है। वह हमें उकसा रहे हैं।
प्रशासन का स्पष्टीकरण
इस पूरे मामले पर जम्मू और कश्मीर प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के बयान तथ्यात्मक रूप से गलत है और उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) की कोई समझ नहीं है। प्रशासन के मुताबिक पीएमएवाई (ग्रामीण) का पहला चरण 1 अप्रैल 2016 को शुरू हुआ था। जिसके दौरान 2011 के सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना (एसईसीसी) के आधार पर जम्मू और कश्मीर में तकरीबन 2.57 लाख बेघर मामलों की पहचान की गयी थी। उसके बाद ग्राम पंचायतों और सभाओं द्वारा सत्यापन के बाद लगभग 1.36 लाख मामले स्वीकृत किये गये।
इसके बाद सरकार ने 'पीएमएवाई चरण- II (आवास प्लस) ग्रामीण 2018-19 के सर्वेक्षण के आधार पर 2019 से शुरू किया (पूरे भारत में किया गया)। जिसमें जम्मू और कश्मीर में अब 2.65 लाख बेघर मामले दर्ज किये गये थे। जिसके तहत 2022 में केवल 63,426 घरों का लक्ष्य जम्मू और कश्मीर को दिया गया था। इस योजना का वर्तमान चरण 31 मार्च 2024 को समाप्त होगा।
घरों को मंजूरी देने और पूरा करने में जम्मू और कश्मीर के सराहनीय प्रदर्शन के चलते 30 मई 2023 को अतिरिक्त लगभग 1.99 लाख से ज्यादा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक विशेष छूट के रूप में मंजूरी दी गई थी। जो 2018-19 में लाभार्थीवार स्थायी प्रतीक्षा सूची (पीडब्ल्यूएल) का हिस्सा रहे हैं। सभी 2.65 लाख बेघर व्यक्तियों के लिए आवास सुनिश्चित करेगा।
इसी बीच जम्मू और कश्मीर सरकार ने कहा कि जो जमीन देने की बात हो रही है, वह केवल 2,711 लोगों के लिए है। यह वे बेघर लोग हैं जो 2018-19 में लाभार्थीवार स्थायी प्रतीक्षा सूची (पीडब्ल्यूएल) से बाहर कर दिये गये थे, क्योंकि उनके पास घर बनाने के लिए जमीन नहीं थी। इनमें से कुछ के पास थी लेकिन वह राज्य सरकार, वन या ऐसी भूमि थी जहां निर्माण की अनुमति नहीं है।
प्रधानमंत्री आवास योजना
केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गयी प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य पीएमएवाय-यू यानि अर्बन और पीएमएवाय-जी मतलब ग्रामीण के तहत शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सभी के लिए किफायती हाउसिंग सुलभ बनाना है। बता दें कि देश में बेघरों को घर देने की योजना सबसे पहले साल 1985 में 'इंदिरा आवास योजना' के रूप में शुरू की गयी। यह स्कीम भी इसी योजना से प्रेरित है लेकिन इसका नाम बदल गया है। यह प्रधानमंत्री आवास योजना 1 अप्रैल, 2016 में एनडीए सरकार द्वारा अपने 'सभी के लिए आवास (हाउसिंग फॉर ऑल)' के विजन को साकार करने के लिए 'पीएमएवाय' के रूप में फिर से शुरू की गयी है।
वहीं ग्रामीण विकास मंत्रालय के हवाले से जारी पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में साल 2022 तक 2.95 करोड़ मकान बनाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे 31 दिसंबर 2024 तक बढ़ा दिया गया है। इसमें ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को 2.94 करोड़ घरों का लक्ष्य आवंटित किया है। इनमें से लाभार्थियों को 2.85 करोड़ घर स्वीकृत किये हैं। जबकि 24 मार्च, 2023 तक 2.22 करोड़ घर पहले ही पूरे हो चुके हैं। फिलहाल पुडुचेरी और तेलंगाना इस योजना को लागू नहीं कर रहे हैं।
PMAY-G स्कीम में कैसे मिलता है लाभ?
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) के तहत लाभार्थी को मैदानी इलाकों में 1.20 लाख रुपये और पहाड़ी राज्यों में ₹1.30 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। योजना के कार्यान्वयन का वित्तीय बोझ केंद्र और राज्य मैदानी क्षेत्रों में 60:40 और पहाड़ी राज्यों के लिए 90:10 के अनुपात में साझा करते हैं। जबकि लद्दाख सहित केंद्र शासित प्रदेशों में, केंद्र सरकार, ग्रामीण आवास योजना के कार्यान्वयन पर होने वाले खर्च का 100 प्रतिशत वहन करता है।
पीएमएवाय-जी के तहत लाभार्थी
पीएमएवाय-जी लाभार्थी बनने के लिए, प्राथमिकता निम्नलिखित सामाजिक-आर्थिक कारकों पर आधारित है -
● अगर परिवार में 16 से 59 वर्ष की आयु के बीच कोई वयस्क सदस्य नहीं है
● उनके पास 25 वर्ष से अधिक आयु का कोई साक्षर सदस्य नहीं है
● परिवार का नेतृत्व महिला कर रही हो और 16 से 59 वर्ष की आयु के बीच का कोई वयस्क मेंबर न हो
● विकलांग मेंबर वाले परिवार और कोई सक्षम वयस्क नहीं होना चाहिए
● ऐसे परिवार, जिनके पास कोई जमीन नहीं है और अधिकतर अनौपचारिक मजदूरी के माध्यम से कमाते है
पात्रता मानदंड
● आवेदक के परिवार के पास कोई घर/संपत्ति नहीं होनी चाहिए
● ऐसे घरों वाले परिवार, जिनके पास शून्य, एक या दो कमरे हों जो कच्ची दीवार और कच्ची छत वाले हों
● अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अल्पसंख्यक समूहों से संबंधित परिवार
● उनके पास मोटर चालित टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, फोर-व्हीलर, कृषित उपकरण या फिशिंग बोट नहीं होना चाहिए
● उनके पास 50 हजार से कम लिमिट का किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) होना चाहिए
● परिवार के किसी मेंबर को सरकारी सेवा में कार्यरत नहीं होना चाहिए या प्रति माह ₹10 हजार से अधिक कमाई न हो
● आवेदक या उनके परिवार के मेंबर इनकम टैक्स या प्रोफेशनल टैक्सपेयर नहीं होने चाहिए। परिवार के पास किसी रेफ्रिजरेटर या लैंडलाइन फोन कनेक्शन नहीं होना चाहिए।












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