क्या है आईपीसी की धारा 497, एडल्टरी कानून, जिसे SC कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया
नई दिल्ली। पिछले कई दिनों ने भारतीय दंड संहिता की धारा 497 चर्चा का विषय बनी हुई थी। मीडिया समेत सोशल मीडिया पर यह धारा बहस का मुद्दा थी। आज सुप्रीम कोर्ट ने भी इस धारा को लेकर अपना अहम फैसला सुनाया है और धारा 497 को असंवैधानिक करार दिया है। जिसके बाद हर किसी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिरकार यह धारा अगर असंवैधानिक थी तो इसे पहले क्यों नहीं रद्द किया गया है। लेकिन कोर्ट ने इस धारा को आज असंवैधानिक करार दिया है। आइए जानते हैं क्या है यह धारा 497 और आखिर क्यों इसे कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया है।

क्या है धारा 497, एडल्टरी कानून
आईपीसी की धारा 497 यानि एडल्टरी का कानून मुख्य रूप से महिलाओं के लिए था, यह कानून 158 साल पुराना था, जिसके अंतर्गत सजा दिए जाने का प्रावधान था। जब कोई शादीशुदा महिला अपने पति से इतर किसी व्यक्ति से अपनी मर्जी से संबंध बनाती है तो पुरुष महिला के खिलाफ धारा 497 यानि एडल्टरी कानून के तहत मुकदमा दर्ज करा सकता है। लेकिन इस धारा की सबसे बड़ी विसंगति यह थी कि अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी अन्य महिला के साथ संबंध बनाता है तो उसके खिलाफ मामला नहीं दर्ज किया जा सकता था। यही नहीं पुरुष की पत्नी भी उस महिला या अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं करा सकती थी। इस धारा के तहत महिला अपराध को व्यभिचार की श्रेणी में रखा गया है।

पांच साल की सजा का था प्रावधान
ऐसे में अगर किसी महिला ने जिस अन्य व्यक्ति के साथ संबंध बनाया था अगर वह अवैध साबित होता है तो उस व्यक्ति को पांच साल तक की सजा हो सकती थी। गौर करने वाली बात यह है कि इस तरह के मामले की सुनवाई मजिस्ट्रेट के सामने होती थी, और इसकी शिकायत किसी पुलिस स्टेशन में नहीं की जा सकती थी। इस मामले में मजिस्ट्रेट के सामने सारे सबूत पेश करने होते ते, जिसके बाद आरोपी व्यक्ति को समन भेजा जाता था।

कोर्ट ने धारा को असंवैधानिक करार दिया
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच ने इस मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया। फैसला पढ़ते वक्त चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि पति पत्नी का मालिक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 497 महिला और पुरुष में भेदभाव दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि आईपीसी की धारा 497 असंवैधानिक है। पांच जजों की बेंच से एडल्टरी को अपराध नहीं माना और व्यभिचार को लेकर धारा 497 को खारिज कर दिया।
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