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बिहार चुनाव: जानिए क्या होती है आचार संहिता, पूर्ण विवरण

पटना (मुकुंद सिंह)। चुनाव आयोग द्वारा जैसे ही बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कार्यक्रम घोषित किया गया, वैसे ही पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई। चुनाव से जुड़े सभी राजनीतिक दलों, सरकारी महकमे व पुलिस प्रशासन सहित प्रत्येक उम्मीदवारों के लिए आदर्श आचार संहिता का पालन करना आवश्यक हो गया है।

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चुनाव आयोग के अनुसार सत्ताधारी दल चाहे वह केंद्र में हो या राज्य में उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि उससे जुड़े सभी लोग आचार संहिता का पालन करें।

चलिये समझते हैं कि आखिर ये आचार संहिता क्या होती है और इसके नियम क्या होते हैं-

  • कोई दल अपने निर्वाचन अभियान के प्रयोजनों के लिए सरकारी तंत्र का प्रयोग नहीं कर सकता।
  • मंत्री अपने शासकीय दौरों को, निर्वाचन से संबंधित प्रचार के साथ नहीं जोड़ सकते।
  • कोई भी मंत्री निर्वाचन के दौरान प्रचार करते हुए शासकीय मशिनरी अथवा कार्मिकों का प्रयोग नहीं कर सकता है।
  • सरकारी विमानों, सरकारी वाहनों, मशीनरी और कार्मिकों का सत्ताधारी दल के हित को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग नहीं किया जाएगा।

सत्ताधारी दल सार्वजनिक स्थान जैसे मैदान इत्यादि पर सभाएं आयोजित करने के लिये एकाध‍िकार नहीं जामा सकते हैं। विश्रामगृहों, डाक बंगलों या अन्य सरकारी आवासोंपर एकाधिकार नहीं जमा सकते हैं।

चुनाव अवधि के दौरान सत्ताधारी दल के हितों को अग्रसर करने की दृष्टि से उनकी उपलब्धियां दिखाने के उद्देश्य से राजनीतिक समाचारों तथा प्रचार की पक्षपातपूर्ण ख्याति के लिए सरकारी खर्च से विज्ञापन जारी किया जाना, सरकारी जन माध्यमों का दुरुपयोग से बचना होगा।

  • मंत्रियों और अन्य प्राधिकारों को विवेकाधीन निधि में से अनुदानोंए अदायगियों की स्वीकृति नहीं दे सकते हैं।
  • मंत्री व अन्य प्राधिकार किसी भी रूप में कोई भी वित्तीय मंजूरी या वचन देने की घोषणा नहीं कर सकते।
  • किसी प्रकार की परियोजनाओं की आधारशिला आदि नहीं रख सकते।
  • सड़कों के निर्माण का कोई वचन नहीं दे सकते, पीने के पानी की सुविधाएं नहीं दे सकते हैं।
  • शासन, सार्वजनिक उपक्रमों आदि में ऐसी कोई भी तदर्थ नियुक्ति नहीं कर सकते जिससे सत्ताधारी दल के हित में मतदाता प्रभावित हों।
  • निर्वाचन आयोग की सहमति के बिना सरकारी कर्मियों का किसी प्रकार स्थानांतरण या पदस्थापन नहीं करेंगे।

आचार सहिंता के वक्त साधारण आचरण

किसी दल या अभ्यर्थी को ऐसा कोई आचरण नहीं करना चाहिए, जो विभिन्न जातियों और धार्मिक या भाषायी समुदायों के बीच विद्यमान मतभेदों को बढ़ाए या घृणा की भावना उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे।

जब अन्य राजनीतिक दलों की आलोचना की जाए, तो वह उनकी नीतियों और कार्यक्रमए पूर्व रिकॉर्ड तक ही सीमित होनी चाहिए। यह भी आवश्यक है कि व्यक्तिगत जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना नहीं की जानी चाहिए, जिनका संबंध अन्य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक क्रियाकलाप से न हो।

दलों या कार्यकर्ताओं के बारे में ऐसी कोई आलोचना नहीं की जानी चाहिए, जिनकी सत्यता स्थापित न हुई हो या जो जोड़.तोड़कर कही गई बातों पर आधारित हों।

ऐसे कोई कार्य न करें जिससे आचार संहिता का उल्लंघन हो

सभी दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे सभी कार्यों से ईमानदारी के साथ बचना चाहिए, जो निर्वाचन विधि के अधीन भ्रष्ट आचारण और अपराध है। जैसे कि मतदाताओं को रिश्वत देना, मतदाताओं को डरानाए धमकाना, मतदान केंद्र के 100 मीटर के भीतर मत याचना करना, मतदान की समाप्ति के लिए नियत समय को खत्म होने वाली 48 घंटे की अवधि के दौरान सार्वजनिक सभाएं करना और मतदाताओं को वाहन से मतदान केंद्र तक ले जाना और वहां से वापस लाना।

किसी भी राजनीतिक दल या अभ्यर्थी को ध्वजदंड बनाने, ध्वज टांगने, सूचनाएं चिपकाने, नारे लिखने आदि के लिए किसी भी व्यक्ति को भूमि, भवन, दीवार आदि का उसकी अनुमति के बिना उपयोग करने की अनुमति अपने अनुयायियों को नहीं देनी चाहिए।

  • राजनीतिक दलों और अभ्यर्थियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके समर्थक अन्य दलों द्वारा आयोजित सभाओं-जुलूस आदि में बाधाएं उत्पन्न न करें या उन्हें भंग न करें।
  • दल या अभ्यर्थी को किसी प्रस्तावित सभा के स्थान और समय के बारे में स्थानीय प्राधिकारियों को उपयुक्त समय पर सूचना देनी चाहिए ताकि वे यातायात को नियंत्रित
  • करने और शांति तथा व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम कर सकें। यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उस स्थान पर जहां सभा करने का प्रस्ताव है, कोई
  • प्रतिबंधात्मक आदेश लागू तो नहीं है। यदि ऐसे आदेश लागू हों तो उनका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
  • लाउडस्पीकर के उपयोग या किसी अन्य सुविधा के लिए अनुज्ञा या लाइसेंस प्राप्त करनी हो तो दल या अभ्यर्थी को संबंधित प्राधिकारी के पास काफी पहले से आवेदन करना चाहिए।
  • सभा के आयोजक को सभा में विघ्न डालने वाले या अव्यवस्था फैलाने का प्रयत्न करने वाले व्यक्तियों से निबटने के लिए ड्यूटी पर तैनात पुलिस की सहायता लेनी चाहिए।
  • जुलूस का आयोजन करने वाले दल या अभ्यर्थी को पहले ही यह बात तय कर लेनी चाहिए कि जुलूस किस समय और किस स्थान से शुरू होगा, किस मार्ग से होकर
  • जाएगा और किस समय और किस स्थान पर समाप्त होगा। सामान्यत: कार्यक्रम में कोई फेरबदल नहीं होनी चाहिए।

आयोजकों को चाहिए कि वे कार्यक्रम के बारे में स्थानीय पुलिस प्राधिकारियों को पहले से सूचना दे दें ताकि वे आवश्यक प्रबंध कर सकें। यह सुनिश्चित करने के लिए कि मतदान शांतिपूर्वक और सुव्यवस्थित ढंग से हों और मतदाताओं को इस बात की पूरी स्वतंत्रता हो कि वे बिना किसी परेशानी या बाधा के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें, निर्वाचन कत्र्तव्य पर लगे हुए अधिकारियों के साथ सहयोग करें। अपने प्राधिकृत कार्यकर्ताओं को उपयुक्त बिल्ले या पहचान पत्र दें।

आपको बताते चले क्या है आदर्श आचार संहिता चुनाव आचार संहिता, आदर्श आचार संहितद्ध का मतलब है चुनाव आयोग के वे निर्देश जिनका पालन चुनाव खत्म होने तक हर पार्टी और उसके उम्मीदवार को करना होता है। अगर कोई उम्मीदवार इन नियमों का पालन नहीं करता तो चुनाव आयोग उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। उसे चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है, उम्मीदवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है और दोषी पाए जाने पर उसे जेल भी जाना पड़ सकता है।

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