Special Olympics: क्या होते हैं स्पेशल ओलंपिक, जानें इसकी विशेषता
स्पेशल ओलंपिक 17 से 25 जून तक बर्लिन, जर्मनी में आयोजित होंगे। इस साल इन स्पेशल ओलंपिक्स में 26 प्रतिस्पर्धाएं शामिल की गयी हैं, जिनमें 190 देशों के 7,000 विशेष एथलीट हिस्सा लेंगे। इन एथलीटों को 3,000 से अधिक ट्रेनर्स और 20,000 के आसपास वालंटियर्स का सपोर्ट रहेगा।
दरअसल, स्पेशल ओलंपिक मानसिक रूप से मंद लोगों के लिए आयोजित किये जाते हैं। इसका आयोजन स्पेशल ओलंपिक कमेटी (एसओसी) द्वारा होता है। इसका मकसद बौद्धिक रूप से अशक्त अथवा अल्पबुद्धि बच्चों और वयस्कों को समर्थन प्रदान करना है। इस खेल का ध्येय है - 'Joy and Happiness to All the Children of the World' यानि दुनिया के सभी बच्चों को खुशी और प्रसन्नता मिले।

साल 2022 में यह रूस में आयोजित होने थे लेकिन यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के चलते स्पेशल ओलंपिक इंटरनेशनल ने यह तय किया कि इन्हें रद्द किया जायेगा। अब एक साल बाद इनका जर्मनी में आयोजन हो रहा है।
स्पेशल ओलंपिक्स का इतिहास
स्पेशल ओलंपिक की शुरुआत यूनिस केनेडी श्राइवर ने की थी। 50 के दशक में यूनिस केनेडी श्राइवर ने महसूस किया कि मानसिक रूप से कमजोर लोगों के साथ अन्याय तथा अनुचित व्यवहार होता है। उन्होंने यह भी देखा कि मानसिक विकलांग बच्चों के पास खेलने तक की जगह उपलब्ध नहीं है। इसलिए उन्होंने इस समस्या से निजात पाने का फैसला किया। जिसके बाद 1968 में शिकागो के सोल्जर फील्ड में पहले स्पेशल ओलंपिक समर गेम्स का आयोजन किया गया। उस दौरान अमेरिका और कनाडा के लगभग 1,000 स्पेशल एथलीटों ने इस आयोजन में भाग लिया था।
1971 में, अमेरिकी ओलंपिक समिति ने 'ओलंपिक' नाम का इस्तेमाल करने के लिए स्पेशल ओलंपिक को मंजूरी दे दी। फिर साल 1977 में, पहले स्पेशल ओलंपिक शीतकालीन खेलों का आयोजन अमेरिका के कोलोराडो में किया गया। साल 1988 में, स्पेशल ओलंपिक को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता मिल गयी। स्पेशल ओलंपिक खेलों का आयोजन अब हर दो साल में होता है। साल 2018 में, स्पेशल ओलंपिक ने अपनी 50वीं वर्षगांठ मनाई थी।
कितने देश और खिलाड़ी लेते हैं हिस्सा?
स्पेशल ओलंपिक्स अल्पबुद्धि बच्चों एवं वयस्कों का दुनिया का सबसे बड़ा खेल टूर्नामेंट है। इस स्पेशल ओलंपिक खेलों में दुनिया के लगभग सभी देश हिस्सा लेते हैं। सामान्यतः इसमें शामिल होने वाले खिलाड़ियों की संख्या सात से आठ हजार के आसपास रहती है। खिलाड़ियों को स्पेशल ओलंपिक में खेलने के लिए कोई फीस नहीं लगती। स्पेशल ओलंपिक में अफ्रीका के 40 देश, एशिया-प्रशांत के 35 देश, पूर्वी एशिया के 6 देश, यूरोप-यूरेशिया के 58 देश, लैटिन अमेरिका के 20 देश, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के 22 देश और उत्तरी अमेरिका के 23 देश शामिल हैं।
स्पेशल ओलंपिक्स में कौन-कौन से खेल शामिल?
मुख्य रूप से इसमें स्कीइंग, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बास्केटबाल, बॉलिंग, साइक्लिंग, घुड़सवारी, हॉकी, गोल्फ, सेलिंग/कयाकिंग, फुटबॉल, सॉफ्टबॉल, स्विमिंग, टेबल टेनिस, टेनिस, क्रिकेट, कराटे, पावर लिफ्टिंग, वॉलीबॉल शामिल हैं। स्पेशल ओलंपिक में इन खेलों को इस तरह खिलाया जाता है जिससे मानसिक रूप से अशक्त या कमजोर खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का भरपूर मौका मिले।
स्पेशल ओलंपिक में भारत
भारत में 'स्पेशल ओलंपिक भारत' के नाम से दिमागी रूप से कमजोर खिलाड़ियों का मान्यता प्राप्त कार्यक्रम चलता है। इसकी शुरुआत 1988 में 'स्पेशल ओलंपिक इंडिया' के रूप में हुई लेकिन 2001 में इसका नाम बदलकर 'स्पेशल ओलंपिक भारत' रखा गया। इस संस्था को भारत सरकार और ओलंपिक इंटरनेशनल द्वारा आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त है।
2019 के स्पेशल ओलंपिक में भारत के 284 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। इन सभी खिलाड़ियों का प्रदर्शन सराहनीय था। उस दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 368 मेडल जीते थे। इन 368 मेडलों में 85 गोल्ड, 154 सिल्वर और 129 ब्रॉन्ज मेडल्स शामिल थे। जबकि भारतीय पावरलिफ्टरों ने 20 गोल्ड, 33 सिल्वर और 43 ब्रोंज मेडलों के साथ सबसे अच्छा प्रदर्शन कर सबसे ज्यादा मेडल जीते थे। स्पेशल ओलंपिक 2019, 14 मार्च से 21 मार्च तक अबू धाबी में आयोजित हुए थे।












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