#Lenin: जानिए कौन हैं लेनिन, जिनकी मूर्ति तोड़ने पर त्रिपुरा में मचा बवाल
अगरतला। आज त्रिपुरा में रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति को ढहाने के बाद काफी तनाव उत्पन्न हो गया है। वामपंथी दलों ने इस बात के लिए बीजेपी को कोसा है और हिंसा की राजनीति का आरोप लगाया है।
चलिए जानते हैं कि व्लादिमीर लेनिन थे कौन, जिनकी प्रतिमा को तोड़ने पर इस वक्त पूरे त्रिपुरा में बवाल मचा है..
व्लादिमीर इलीइच लेनिन (1870-1924) रूस में बोल्शेविक क्रांति का नेता एवं रूस में साम्यवादी शासन का संस्थापक थे, जिनका जन्म सिंविर्स्क नामक स्थान में हुआ था और उनका वास्तविक नाम 'उल्यानोव था। ये शुरू से ही क्रांतिकारी के रूप में जाने जाते थे। बताया जाता है कि उच्च योग्यता के साथ स्नातक बनने पर लेनिन ने 1887 में कज़ान विश्वविद्यालय के विधि विभाग में प्रवेश लिया था लेकिन शीघ्र ही विद्यार्थियों के क्रांतिकारी प्रदर्शन में हिस्सा लेने के कारण विश्वविद्यालय ने निष्कासित कर दिया गया।

साल 1889 में मार्क्सवादियों का संगठन बनाया
साल 1889 में उन्होंने स्थानीय मार्क्सवादियों का संगठन बनाया था और उसके बाद वो मार्क्सवादियों के एक बड़े नेता के रूप में उभरे, जिसके चलते उन्हें रूसी क्रांति के दौरान जेल भी जाना पड़ा था। उन्होंने रूसी क्रांति पर तीस से ज्यादा किताबें भी लिखी हैं।

मार्क्सवादी विचारक लेनिन
मार्क्सवादी विचारक लेनिन के नेतृत्व में 1917 में रूस की क्रांति हुई था। लेनिन की अध्यक्षता में सोवियत सरकार की स्थापना की गई थी। प्रारंभ से ही सोवियत शासन ने शांतिस्थापना पर बल देना शुरू किया। जर्मनी के साथ उसने संधि कर ली। जमींदारों से भूमि छीनकर सारी भूसंपत्ति पर राष्ट्र का स्वामित्व स्थापित कर दिया गया, व्यवसायों तथा कारखानों पर श्रमिकों का नियंत्रण हो गया और बैकों तथा परिवहन साधनों का राष्ट्रीकरण कर दिया गया।

रूसी क्रांति
जिससे श्रमिकों और किसानों को पूंजीपतियों और जमींदारों से छुटकारा मिला और समस्त देश के निवासियों में पूर्ण समता स्थापित कर दी गई। लेनिन ने इस दौरान "दि इमीडिएट टास्क्स ऑफ दि सोवियत गवर्नमेंट" तथा "दि प्रोले टेरियन रिवाल्यूशन ऐंड दि रेनीगेड कौत्स्की" नामक पुस्तकें लिखीं (1918)। लेनिन ने बतलाया कि मजदूर भी एक इंसान होते हैं और उन्हें भी सम्मान के साथ जीने का हक है। रूसी कम्युनिस्ट पार्टी (बोल्शेविक पार्टी) के संस्थापक लेनिन के मार्क्सवादी विचारों को 'लेनिनवाद' के नाम से जाना जाता है। ये रूसी क्रांति थी, जिसने रूस का भविष्य बदल दिया।

हमारे देशवासियों को युद्ध की आग में न झोंका जाए: लेनिन
जहां तक सोवियत शासन की विदेश नीति का प्रश्न है, लेनिन के अविकल रूप से शांति बनाए रखने का निरंतर प्रयत्न किया। उसने कहा कि हमारी समस्त नीति और प्रचार का लक्ष्य यह होना चाहिए कि चाहे कुछ भी हो जाए, हमारे देशवासियों को युद्ध की आग में न झोंका जाए।
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