धार्मिक असहिष्णुता की गलत परिभाषा गढ़ रहे हैं हम
बेंगलुरु। छह हथियारबंद लोगों के साथ गलत समझी जाने वाली अवधारणा, 28 लाशों से पटे ढाका शहर में हुए आतंकवादी हमले ने विश्व को फिर से हिलाकर रख दिया। हमलावरों ने एक कैफे पर हमला बोला और 12 घंटे की घेराबंदी के दौरान वे सबके गले से कुरान की आयतें सुनना चाह रहे थे। यह कट्टरता से भरा एक नाटक था।

फेसबुक पर की आतंकी बनने की अपील
यह आश्चर्य का विषय है कि किस तरह से यह सब प्रमुखता से सामने आया। सभी आतंकी 20 वर्ष के आसपास रहे होंगे तथा सभी मीडिया से वाकिफ और जिहादी सोच के साथ डिग्रीधारी थे।
इस्लामिक कट्टरता इनमें भरी हुई थी। इनमें से जो दो युवा थे और जाकिर नाइक के भाषणों से प्रभावित थे। इससे पहले भी एक युवा आतंकवादी द्वारा जाकिर के संदेष 'सभी मुस्लिमों को आतंकवादी बनना चाहिये' को फेसबुक पर दिया था।
जाकिर नाईक भारत में इस्लामिक अनुसंधान संगठन चलाते हैं जिसे ब्रिटेन व कनाडा में बेन किया गया है और मलेशिया के उन 16 प्रतिबंधित इस्लामिक लोगों में से एक जाकिर है।
श्रीश्री ने याद की जाकिर से अपनी मुलाकात
बांग्लादेश में जाकिर ने पीस टीवी के माध्यम से प्रसिद्धि पाई। हाल ही में मुझे श्री श्री रविशंकर जी से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, एक आध्यात्मिक लीडर जिनकी कई तकनीकों ने जाति और धर्म की सीमाओं को तोडा है। जैसा कि सर्वविदित है श्री श्री संघर्ष कर रहे युद्धरत देष, विवादित समाज के मध्य एक सेतु का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने उन लोगों से भी बात करने का बीडा उठाया जो सिर्फ बंदूक की भाषा ही जानते हैं। हाल ही में श्री श्री को भी जाकिर नाईक के विवादों में घसीटा जा रहा है। मैं इसकी वजह की पड़ताल करना चाहता हूं।
श्री श्री ने जाकिर नाईक से फरवरी 2006 में हुई बातचीत को याद किया जिसमें जाकिर ने भगवान, हिन्दुत्व और इस्लाम पर श्री श्री के साथ बात करने के लिए बुलाया था।
हिंदु धर्म पर की थी अपमानजनक टिप्पणी
जाकिर के बारे में ज्यादा नहीं जानने के बाद भी श्री श्री को बाध्य किया गया था। आष्चर्य का विषय यह था कि जाकिर ने हिन्दूत्व के बुनियादी सिद्धांतों पर हमला करते हुए अपमानजनक बयानबाजी की। श्री श्री की एक पुस्तक का जिक्र करते हुए उसने हिन्दुत्व व इस्लाम के विषय में कुतर्क दिए।
श्री श्री कहते हैं कि वहां उपस्थित हिन्दु और मुस्लिमों लोगों में इन कुतर्कों से भ्रम व अस्पष्टता परिलक्षित हुई। वह लगातार श्रोताओं पर कई कुतर्क से भरे प्रष्नों को आरोपित कर हिन्दुत्व का अपमान करते जा रहा था।
एक व्यक्ति वहां उठकर विष्णु सहस्त्र के मंत्र बोला और कहा कि वह पहले हिन्दु पंडित था और अब उसने मुस्लिम धर्म अपना लिया है।
उसके मंत्र उच्चारण के ढंग से आप साफ तौर पर बोल सकते हैं कि वह वास्तविक नहीं था। ऐसे व्यक्ति से बात करने का कोई तुक नहीं था जो सिर्फ विवाद खडे करना चाह रहा हो। श्री श्री ने अपनी बात रखते हुए धर्म को लेकर हो रहे विवाद को सावधानी से वहां उत्पन्न तनाव को खत्म किया।
क्या कहा था श्रीश्री ने
श्री श्री ने मुस्कुरा कर कहा कि मैं उसके भडकाने में नहीं आउंगा। ''हमने उस स्थिति को चतुराई से स्पष्ट किया वरना बैंगलौर शहर उसके कुतर्कों से घिर गया था। जाकिर तभी से प्रसिंद्ध धार्मिक लीडरों के इकट्ठा हुए आंकडों के आधार पर सामाजिक मीडिया का उपयोग कर स्वयं को साबित कर जहर उगलने का कार्य करता आ रहा है। मैने श्री श्री और जाकिर के विडियो को यू ट्यूब पर देखा है और इससे स्थिति और स्पष्ट हो जाती है।
एक दिन में कोई नहीं होता कट्टर
अमेरिका और यूरोप में जार्ज वाषिंगटन विष्वविद्यालय एवं ब्रुकिंग संस्थान द्वारा किए गए अध्ययनों से यह और भी पुष्ट हो जाता है। इनके अनुसंधान में बताया गया है कि जो युवा धर्म निरपेक्ष भाव से आते हैं उसके बाद उनमें कट्टरता के बीज बोए जाते हैं। ज्यादातर वे इन्हे सामाजिक मीडिया से लेते हैं।
कोई भी एक दिन में कट्टर नहीं हो सकता। यह धीमा जहर विभाजनकारी संदेषों और छद्म बौद्धिक बयानबाजी से निजी हितों को गलत ढंग से प्रस्तुत कर युवाओं को बरगलाता है।
यही जहर अच्छे और पढे-लिखे लोगों को जिहादी बनाने में मदद करता है और यह हमारा कर्तव्य बनता है कि इस तरह से सामाजिक मीडिया के माध्यम से इस कट्टरता फैलाने वाले मायाजाल को दूर करें। प्रत्येक व्यक्ति को यह स्वतंत्रता है कि वह षांति और खुषी के मार्ग पर अपने अनुसार चले।
क्या कहता है आध्यात्म
प्रत्येक विश्वास, धर्म, सिद्धांत हमें विवाद रहित रहने की प्रेरणा देते हैं और दूसरे का विरोध किए बगैर साथ आगे बढने के लिए मार्ग दिखाते हैं। इसी में मानवता जीवित रह सकती है। आध्यात्मिक ज्ञान हमें उॅंचा उठाने, एक करने और अलग-अलग विचारधाराओं के मध्य सेतु का कार्य करता है।
आध्यात्म के हमें अधुरे ज्ञान के कारण हम धार्मिक असहिष्णुता को गलत ढंग से परिभाषित कर रहे है जबकि आज इसे ठीक ढंग से परिभाषित कर आध्यात्म को रोपने की आवष्यकता है।
कुषल चैकसी कुषल न्यूयार्क में क्लेविलनो केपिटल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। वे इंटरप्रेनियौर है और लगतार अर्थषास्त्र, घटनाक्रम और आध्यात्म पर लिखते रहते हैं। वे मानव मूल्यों के अंर्तराष्ट्रीय एसोसिएशन के स्वयंसेवक भी है।











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