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Congress Leaving CMs: पिछले दस वर्षों में मुख्यमंत्री रहे इन दिग्गज नेताओं ने छोड़ी कांग्रेस, देखिए लिस्ट

पिछले दिनों कांग्रेस नेता कमलनाथ के कांग्रेस छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थी। माना जा रहा था कि वो और उनके बेटे भाजपा में शामिल हो सकते हैं। पर कमलनाथ और उनके बेटे नकुल ने हर अफवाह पर विराम लगाया कि वो कांग्रेस में ही बने रहेंगे।

ये पहला मामला नहीं है जब किसी बड़े नेता के कांग्रेस छोड़ने की बात हुई हो। पिछले दस वर्षों में कई पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस को अलविदा कह चुके हैं। आइए जानते हैं कौन कौन हैं ये नेता?

These veteran leaders who were Chief Ministers in the last ten years left Congress, see the list

गुलाम नबी आजाद

किसी जमाने में गांधी परिवार के खास माने जाने वाले गुलाम नबी आजाद ने 2022 में कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। कांग्रेस से अलग होकर गुलाम नबी ने डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी का गठन किया है। राजनीतिक करियर की बात करें 1973 से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले आजाद 2005 से लेकर 2008 तक जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के तीसरे मुख्यमंत्री रहे हैं। इसके साथ ही वो केंद्र की सत्ता में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। साल 2022 में इन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया था।

कैप्टन अमरिंदर सिंह

पंजाब के मुख्यमंत्री रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में से एक रहे हैं। पर अनदेखी के कारण 2021 में इन्होंने कांग्रेस से किनारा कर लिया। इससे पहले भी 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के चलते इन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। वहीं आपको बता दें कि अमरिंदर सिंह के पिता महाराजा यादवेंद्र सिंह पटियाला रियासत के अंतिम राजा थे। वर्तमान में इन्होंने पंजाब लोक कांग्रेस नाम से पार्टी का गठन किया है और पिछले पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा का साथ दिया था।

विजय बहुगुणा

2012 से 2014 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे विजय बहुगुणा देश के जाने माने राजनेताओं में से एक रहे हैं। कभी दिल्ली हाई कमान में अपनी पैठ के लिए जाने जाने वाले बहुगुणा ने 2017 विधानसभा चुनाव के ठीक पहले बीजेपी का दामन थाम लिया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इनके पिता हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

नारायण राणे

एक भारतीय राजनीतिज्ञ और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री रहे नारायण राणे ने 2017 में कांग्रेस से किनारा कर लिया था। इन्होंने अपना सियासी करियर शिवसेना से शुरू किया था और पार्षद भी बने थे। इन्होंने 1 फरवरी 1999 से 17 अक्टूबर, 1999 तक बतौर मुख्यमंत्री महाराष्ट्र की बागडोर संभाली थी।

अशोक चव्हाण

हाल ही में कांग्रेस को अलविदा कहकर गए अशोक चव्हाण 2008 से लेकर 2010 तक महाराष्ट्र के रहे हैं। इसके साथ ही आपको बता दें कि महाराष्ट्र के इतिहास में पिता और बेटे की पहली जोड़ी है, जो मुख्यमंत्री बनी है। इनके पिता शंकरराव चव्हाण भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे हैं।

दिगंबर कामत

2007 से 2012 तक गोवा के मुख्यमंत्री रहे दिगंबर कामत ने अपना करियर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य के रूप में शुरू किया था। पर साल 2022 में इन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और भाजपा में शामिल हो गए थे। इनके बारे में रोचक बात ये है कि इन्होंने मंदिर में जाकर कांग्रेस न छोड़ने की शपथ ली थी और जब पार्टी छोड़ने पर इनसे सवाल किया गया तो इन्होंने कहा था कि भगवान ने उनसे कहा था, 'तुम्हें जो ठीक लगे वही करो।

प्रताप सिंह राणे

सात बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे प्रताप सिंह राणे को गोवा विधानसभा ने आजीवन कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया था। हालांकि बाद में इस पर बहुत विवाद हुआ था। राणे ने मार्च 2022 में राजनीति से संन्यास ले लिया था। इनके बेटे विश्‍वजीत राणे और बहू देविया राणे भाजपा से विधायक हैं। माना जाता है कि बेटे की ओर से उन पर कांग्रेस छोड़ने का दबाव बनाया गया था।

लुइजिन्हो फलेरो

गोवा के पूर्व CM फलेरो ने 2021 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। इसके साथ ही इस दौरान फलेरो ने सोनिया को पत्र लिखकर कहा था कि पार्टी का पतन रुकने की कोई उम्मीद नहीं है। वे 1999 में कुछ दिनों के लिए गोवा के मुख्यमंत्री रहे थे।

एस. एम. कृष्णा

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एस.एम. कृष्णा ने 2017 में कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। कांग्रेस में शामिल होने के बाद एस.एम. कृष्‍णा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की थी।

किरण कुमार रेड्डी

किरण कुमार रेड्डी ने साल 2023 में कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया था। रेड्डी 2010 से लेकर 2014 तक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। इन दिनों वे भाजपा में हैं।

प्रेमा खांडू

2015 में अरुणाचल प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने प्रेमा खांडू ने 2016 में कांग्रेस पार्टी का साथ छोड़ दिया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि कांग्रेस की आलाकमान संस्कृति ने पार्टी में न तो युवा सोच बचने दी है और न ही जमीन पर काम करने की क्षमता रखी है।

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