Sudan Fighting: क्या गोल्ड की ‘आग’ में तप रहा है सूडान, जानें हिंसा का असली कारण?
सूडान में बीते 7 दिनों से देश की सेना और अर्द्ध सैनिक बलों के बीच हिंसा जारी है, जिसकी वजह से अफ्रीकी देशों में उथल-पुथल मची हुई है।

Sudan Fighting: अफ्रीकी देश सूडान से इन दिनों जबरदस्त हिंसा की खबरें आ रही हैं। राजधानी खार्तूम में सेना और देश के ताकतवर अर्धसैनिक बल (आरएसएफ) के बीच बीते 15 अप्रैल 2023 से भयंकर लड़ाई छिड़ी हुई है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक इस लड़ाई की वजह से अब तक कम से कम 270 नागरिकों की मौत हो चुकी है और लगभग 2,000 घायल हो गये हैं।
रॉयटर्स समाचार एजेंसी के मुताबिक देश के उत्तरी छोर पर बसे मेरोव शहर में 15 अप्रैल से ही भारी गोलीबारी हो रही है। आरएसएफ की ओर से जारी बयान में दावा किया गया कि खार्तूम हवाई अड्डे पर उनका नियंत्रण हो गया है साथ ही राष्ट्रपति भवन को भी पूरी तरह से नियंत्रण में ले लिया गया है। हालांकि, सेना ने इन दावों का खंडन किया है।
लड़ाई शांत कराने में जुटी दुनिया
इस बीच, हिंसा समाप्त करने के लिए सूडान पर कूटनीतिक दबाव भी बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री, संयुक्त राष्ट्र महासचिव, यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख, अरब लीग के प्रमुख और अफ्रीकी संघ आयोग के प्रमुख सहित शीर्ष राजनयिकों ने दोनों पक्षों से लड़ाई बंद करने का आहृवान किया है। लेकिन, इसका कुछ खास असर होता नहीं दिख रहा है।
बीबीसी के मुताबिक आरएसएफ (रैपिड सपोर्ट फोर्स) प्रमुख मोहम्मद हमदान दगालो उर्फ हेमेदती का कहना है कि सेना के सभी ठिकानों पर कब्जा होने तक उनकी लड़ाई चलती रहेगी। वहीं दूसरी तरफ सेना ने भी बातचीत की किसी संभावना को नकारते हुए कहा है कि अर्धसैनिक बल आरएसएफ के भंग होने तक उनकी कार्रवाई जारी रहेगी।
आखिर क्या है सूडान में हिंसा का कारण?
सूडान में मौजूदा समय में जो संघर्ष चल रहा है इसकी शुरुआत अक्टूबर 2021 से होती है। तब देश में राजनैतिक तख्तापलट हुआ था। तभी से देश की सेना और आरएसएफ मिलकर सूडान को चला रहे थे। ये दोनों सूडान की सरकार चलाने वाली एक काउंसिल का हिस्सा है।
इस काउंसिल के मुखिया सूडान की सेना के जनरल अब्देल फतह अल बुरहान हैं और आरएसएफ प्रमुख जनरल मोहम्मद हमदान दगालो उर्फ हेमेदेती इस काउंसिल के उपाध्यक्ष हैं। एक तरह से बुरहान राष्ट्रपति है और हेमेदती दूसरे सबसे बड़े नेता हैं। खबरों के मुताबिक यह संघर्ष इन दोनों के बीच पावर और पैसों की वजह से है।
दरअसल यह काउंसिल आरएसएफ को सूडान की सेना में शामिल करना चाहती है लेकिन उनका कहना है कि इस काम को 10 साल के लिए टाल दिया जाये। लेकिन, सुडानी सेना मानने को तैयार नहीं है क्योंकि आरएसएफ तेजी से अपनी पावर और सोना (पैसा) खदानों पर दबदबा बढ़ा रहा है। यही कारण है कि दोनों के बीच तनाव बढ़ा और जिसका नतीजा 15 अप्रैल को आरएसएफ और सेना के जवानों के बीच मुठभेड़ होने लगी। अब यह लड़ाई हिंसक रूप ले चुकी है। वहीं दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं कि हमले की शुरुआत दूसरे ने की है।
कैसे सुडान का सोना बना 'अभिशाप'?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ 2022 में ही सुडान ने 41.8 टन सोने के निर्यात से करीब 150 बिलियन सूडानी पाउंड ($260 मिलियन के बराबर) की कमाई की थी। इस संघर्ष के कई कारणों में सबसे बड़ा कारण 'सोना' भी है। पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में सबसे बड़ा भंडार सूडान में मौजूद है।
दरअसल साल 1956 में सूडान का इलाका ब्रिटिश शासन से आजाद हुआ। उसी दौरान देश के दक्षिण इलाके में भारी तेल का भंडार मिला। जो मुख्य वित्तीय स्रोत बन गया। इसके बाद 1980 के दशक के दक्षिणी हिस्से में आजादी के लिए संघर्ष शुरू हो गया। तकरीबन 40 सालों के संघर्षों के बाद 2011 में रिपब्लिक ऑफ साउथ सूडान बना और इसी के साथ कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली दो तिहाई आमदनी सूडान के हाथ से चली गई।
जब मिला सोना तो मच गई लूट?
साल 2012 में सूडान का 'किस्मत' ने साथ दिया और देश के उत्तरी हिस्से में स्थिल 'जेबेल अमीर' इलाके में सोने का विशाल भंडार मिला। इतना सोना कि इससे पूरे देश की अर्थव्यवस्था आसानी सुधर जाती। लेकिन सोने की खोज जल्द ही अभिशाप साबित हुई क्योंकि इस पर कब्जे की जंग शुरू हो गई। सोने की अनियंत्रित लूट शुरू हो गई। सोने की लूट करने पहुंचे कई लोग भुरभुरी खदान धंसने से मारे गये या सोना का शोधन करते समय मर्करी और आर्सेनिक के जहर से।
रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 में वेस्ट कोर्डोफान प्रांत में सोने की एक खदान धंसने से 31 लोग मारे गये थे। वहीं मार्च 2023 में भी एक अन्य खदान के धंसने की वजह से 14 लोग मारे गये थे। वहीं देश में सोने के खनन वाली 40,000 जगहें हैं। जिसमें 13 प्रांतों में सोने का शोधन करने वाली 60 कंपनियां हैं और इनमें 15 कंपनियां सिर्फ दक्षिणी कोर्डोफान में हैं। ये पर्यावरणीय मानदंडों को नहीं मानती और लगातार खनन कर रही हैं।
सोने के लिए 800 लोगों को मार डाला?
बीबीसी की मानें तो जब सोने का पता चला तो सुडान के पूर्व राष्ट्रपति अल बशीर के कट्टर समर्थक और जाने माने कबायली नेचा मूसा हलील ने एक विशेष जनजाति का सामूहिक नरसंहार कर, उस सोने वाले क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। इस नरसंहार में 800 लोगों को मार डाला गया। इसके बाद हलील ने सोने का खनन करना और बेचना शुरू कर दिया।
हालांकि, हलील का 2017 में पतन हो गया और इसके बाद आरएसएफ के नेता हेमेदती का यहां कब्जा हो गया। जब हेमेदती ने कब्जा किया तो उस समय देश के कुल निर्यात में सोने की हिस्सेदारी 40% होती थी। अब इस सोने ने ही हेमेदती को देश का सबसे ताकतवर नेता बना दिया। यही कारण है कि अगर आरएफएस को सेना में मिला दिया गया तो हेमेदती का पावर खत्म हो जाएगा। इसी विवाद के कारण सूडान में हिंसा भड़क उठी है।
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