Free Electricity: 27 राज्यों में बिजली पर सब्सिडी और 6 राज्यों में बिजली मुफ्त, अब बढ़ने लगा है कर्जा
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की राह पर चलते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी राज्य में 100 यूनिट बिजली प्रतिमाह मुफ्त करने की घोषणा की है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 31 मई 2023 की रात ट्वीट कर ऐलान किया कि राज्य में 100 यूनिट प्रतिमाह तक बिजली का बिल नहीं आएगा। फिर 100 यूनिट प्रतिमाह से ज्यादा उपभोग करने वाले वर्ग के परिवारों को पहले 100 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी। 200 यूनिट प्रतिमाह तक बिजली उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं को पहले 100 यूनिट बिजली मुफ्त के साथ 200 यूनिट तक के स्थायी शुल्क, फ्यूल सरचार्ज एवं तमाम अन्य शुल्क माफ होंगे एवं इनका भुगतान राज्य सरकार करेगी
इस निर्णय से राजस्थान भी अब उन राज्यों के साथ शामिल हो गया है जो पहले से अपने नागरिकों को मुफ्त अथवा सब्सिडी पर बिजली दे रहे हैं। गौरतलब है कि इस मुफ्त बिजली का भार राज्य सरकारों पर पड़ता है और उनके कर्जे दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं।
किन राज्यों में हैं मुफ्त बिजली?
फिलहाल देश में 27 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं जहां बिजली के बिलों पर उपभोक्ताओं को सब्सिडी मिलती है। इसमें सबसे ज्यादा खर्चीले मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्य हैं। साल 2020-21 में इन तीन राज्यों ने कुल ₹48,248 करोड़ बिजली पर सब्सिडी देने में खर्च कर दिये। दिल्ली भले ही छोटा राज्य क्यों न हो मगर सब्सिडी के मामलें में वह भी पीछे नहीं हैं। राज्य सरकार जहां पहले ₹1699 करोड़ की बिजली सब्सिडी दे रही थी वह अब ₹3149 करोड़ का अतिरिक्त भार झेल रही है।
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की मुफ्त बिजली की योजना को चुनावों में कामयाबी का कारक माना जाता है। इसके बाद पंजाब में भी पार्टी को इसका फायदा हुआ। अब ऐसे ही चुनावी वादों का प्रयोग कांग्रेस और दूसरे दल करने लगे हैं और इसका फायदा भी उन्हें मिलता दिख रहा है।
मुफ्त बिजली देने वाले राज्य
- दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने 200 यूनिट तक बिजली का बिल मुफ्त कर रखा है।
- कर्नाटक में कांग्रेस की सिद्धारमैया की सरकार ने 200 यूनिट बिजली मुफ्त की है।
- छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की भूपेश बघेल की सरकार गरीब परिवारों को 30 यूनिट तक बिजली मुफ्त में दे रही है। जबकि किसानों को 400 यूनिट बिजली मुफ्त में मिलती है।
- राजस्थान में कांग्रेस की अशोक गहलोत की सरकार ने 100 यूनिट तक बिजली का बिल मुफ्त कर दिया है।
- हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार है। यहां पर 125 यूनिट बिजली मुफ्त है।
- पंजाब में आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार ने 300 यूनिट तक बिजली का बिल मुफ्त कर रखा है।
राज्य जिन्होंने भारी-भरकम छूट दे रखी है
- उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने निजी नलकूप वाले किसानों को बिजली बिल में 100 प्रतिशत की छूट देने की घोषणा की हुई है।
- मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार में 100 यूनिट बिजली पर केवल 100 रुपये का बिल आता है।
- तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम की एम.के. स्टालिन की सरकार है। यहां पर पावरलूम कर्मचारियों को 1000 यूनिट तक बिजली मुफ्त में मिलती है।
- तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्र समिति के चंद्रशेखर राव की सरकार है। जहां पर सैलून, लॉन्ड्री और धोबी घाटों को 250 यूनिट बिजली मुफ्त है।
- हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर की सरकार किसानों को 10 पैसे प्रति यूनिट बिजली दे रही है।
इन राज्यों ने मुफ्त बिजली को कहा 'न'
देश में ओडिशा और बिहार कुछ ऐसे राज्य हैं जिन्होंने मुफ्त बिजली न देने का फैसला किया हुआ है। मार्च 2023 में ओडिशा विधानसभा में चर्चा के दौरान विपक्षी विधायकों ने दिल्ली-पंजाब की तरह मुफ्त बिजली की मांग की, तो बिजली मंत्री प्रताप देव ने कहा कि पानी, हवा और बिजली सभी के लिए जरूरी है, ऐसे में मुफ्त देने से श्रीलंका जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी।
मार्च 2023 में बिहार सरकार ने भी मुफ्त बिजली की मांग को सिरे से खारिज कर दिया था। हालांकि राज्य में बिजली पर सरकार सब्सिडी देती है और वर्तमान वित्तीय वर्ष में ₹7801 करोड़ का अनुदान दिया जा चुका है।
मुफ्त की रेवड़ी और बढ़ता कर्जा
आरबीआई की जून 2022 की अपनी रिपोर्ट में, 2021-22 के लिए कुछ राज्यों के उच्च ऋण-सकल घरेलू उत्पाद अनुपात को चिह्नित किया था। जिसमें पंजाब, राजस्थान, केरल, पश्चिम बंगाल, बिहार, आंध्र प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा पर सबसे ज्यादा कर्ज था। जुलाई 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य सरकारों से बिजली कंपनियों के बकाया का भुगतान करने की अपील कर चुके हैं। राज्य सरकारों पर करीब ₹2.5 लाख करोड़ का बिल बकाया है।
मुफ्त में 300 यूनिट बिजली देने वाला राज्य पंजाब आज देश में सबसे बड़ा कर्जदार है। मौजूदा समय में पंजाब पर ₹2.82 लाख करोड़ का कर्ज हो चुका है, जो राज्य की जीडीपी का तकरीबन 56 प्रतिशत है।
दिल्ली की बात करें तो जुलाई, 2022 में कैग (CAG) रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली सरकार का कर्ज पिछले 4 सालों में 7 प्रतिशत बढ़ गया है। कैग के मुताबिक, साल 2015-16 में कर्ज ₹32,497.91 करोड़ था। जोकि 2019-20 के आखिर में ₹34,766.84 करोड़ हो गया। मतलब सीधे ₹2,268.93 करोड़ का इजाफा हो गया है।
राजस्थान सरकार के वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2019 से 2023 तक के चार साल में प्रति व्यक्ति कर्ज का भार ₹20,481 से बढ़कर ₹65,541.53 हो गया है। वहीं पूरे राज्य पर मार्च 2023 तक ₹5,31,050 करोड़ का कर्ज है।
'फ्री की रेवड़ी' पर सुप्रीम कोर्ट भी सख्त
अगस्त 2022 में ही सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में चुनाव से पहले रेवड़ी कल्चर को खत्म करने को लेकर सख्ती दिखाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह एक गम्भीर मुद्दा है और चुनाव आयोग और सरकार इससे पल्ला नहीं झाड़ सकते। सरकार और चुनाव आयोग इस पर रोक लगाने के लिए विचार करें। दरअसल देश भर में चुनाव से पहले लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां वोट के लिए बड़े-बड़े ऐलान करती हैं। खास कर कई राज्यों में बिजली बिल पर भारी-भरकम सब्सिडी दी जाती है।












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