State Name Change: स्वतंत्रता के बाद बदले 11 राज्यों के नाम, इसमें आता है सैकड़ों करोड़ का खर्च
State Name Change: स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक 11 राज्यों के नाम बदले गए हैं। इनमें कुछ केंद्रशासित प्रदेश भी शामिल हैं। किसी भी राज्य का नाम बदलने के लिए तकरीबन 1000 करोड़ का खर्च आता है। हाल ही में केरल ने अपना नाम बदलने की अनुशंषा केंद्र सरकार को भिजवाई है। जबकि दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने 2018 में इस आशय का एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भिजवाया था। लेकिन राज्य का नाम बदलने के प्रस्ताव को अभी तक मंजूरी नहीं दी गई है। आइए जानते हैं कैसे बदलता है किसी राज्य का नाम और क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है।
यह है राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया
संविधान का अनुच्छेद-3 देश की संसद को किसी भी राज्य का नाम बदलने का अधिकार देता है। केंद्र सरकार अगर किसी राज्य का नाम बदलना चाहे तो वह राष्ट्रपति की अनुशंसा पर राज्य के नाम में बदलाव का बिल संसद में ला सकती है। लेकिन अगर कोई राज्य स्वयं अपना नाम बदलना चाहे तो अनुच्छेद 3 में इसकी प्रक्रिया भी बताई गई है।

राज्य के नाम परिवर्तन की शुरुआत विधानसभा से होती है। वहां की सरकार विधानसभा में बहुमत से नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित करती है और यह प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास और वहां से राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। राष्ट्रपति अगर इसे उचित मानें तो इस पर केंद्र सरकार को अनुशंसा कर देंगे। फिर एक बिल संसद में पारित होगा तो दोबारा राष्ट्रपति के पास जाएगा और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ ही नाम बदलने की अधिसूचना जारी कर दी जाती है। लेकिन कई बार राजनीतिक कारणों के चलते केंद्र सरकार इस प्रकार की अनुशंषा को स्वीकार नहीं करती है और प्रकरण को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
आजादी के बाद इन राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के बदले नाम
आजादी के बाद से लेकर अब तक 11 राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों ने राजनीतिक, सांस्कृतिक व सामाजिक कारणों से अपने नाम बदले हैं। इसके अलावा वर्तमान में केरल और पश्चिम बंगाल भी इसी कतार में खड़े हैं।
आंध्र स्टेट बना नया राज्य: मद्रास प्रेसीडेंसी के तेलुगू भाषी हिस्से को एक अक्टूबर, 1953 को आंध्र स्टेट राज्य का दर्जा मिला। हैदराबाद भी इसमें शामिल था। एक नवंबर, 1956 को आंध्र स्टेट का नाम बदला गया और उसे आंध्र प्रदेश किया गया।
त्रावणकोर-कोचीन बना केरल: एक नवंबर, 1956 को त्रावणकोर- कोचीन का नाम बदलकर केरल किया गया।
मध्य भारत बना मध्य प्रदेश: एक नवंबर, 1959 को मध्य भारत का नाम बदलकर मध्य प्रदेश किया गया।
ईस्ट पंजाब बना पंजाब: 1966 में पंजाब का विभाजन कर हरियाणा, हिमाचल और पंजाब तीन राज्य बने।
मद्रास स्टेट बना तमिलनाडु: 14 जनवरी, 1969 मद्रास स्टेट का नाम बदलकर तमिलनाडु रखा गया।
मैसूर स्टेट बना कर्नाटक: 1 नवंबर, 1973 को मैसूर स्टेट का नाम बदलकर कर्नाटक रख दिया गया।
लक्कदीव, मिनिकॉय और अमनदीवी बने लक्षद्वीप: 1 नवंबर, 1973 को लक्कदीव, मिनिकॉय और अमनदीवी का नाम बदलकर लक्षद्वीप रखा गया।
यूनाइटेड प्रोविन्स बना उत्तर प्रदेश: इस बदलाव को 24 जनवरी, 1950 को लागू किया गया था और साल 2000 में उत्तर प्रदेश का विभाजन हुआ और उत्तरांचल राज्य बना।
पॉन्डिचेरी बना पुड्डुचेरी: पॉन्डिचेरी का नाम 1 अक्टूबर, 2006 को बदलकर पुडुचेरी रखा।
उत्तरांचल बना उत्तराखंड: साल 2000 में यूपी से अलग होने के बाद उत्तरांचल बना और 2007 में उत्तरांचल का नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया।
उड़ीसा बना ओडिशा: नवंबर, 2011 को उड़ीसा का नाम बदलकर ओडिशा किया गया।
अब केरल और पश्चिम बंगाल सरकार को नाम बदलने का इंतजार
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने हाल ही में केरल का नाम बदलकर केरलम करने का प्रस्ताव प्रेषित किया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य की भाषा मलायम में केरल को केरलम ही कहा और लिखा जाता है। राज्य सरकार ने केरलम नाम रखने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव भी पारित किया है। राज्य सरकार के इस अनुरोध को अगर केंद्रीय गृह मंत्रालय मान लेता है तो केरल को केरलम के नाम से जाना जाएगा।
लेकिन एक राज्य ऐसा भी है जिसका नाम बदलने का अनुरोध केंद्र सरकार ने अब तक नहीं माना है। 2018 में पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार के राज्य का नाम बदलने के प्रस्ताव को अभी तक केंद्र सरकार ने मंजूरी नहीं दी है। राज्य विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से अनुरोध किया था कि राज्य का नाम पश्चिम बंगाल से बदल कर बंगाल कर दिया जाए। मामला अभी तक केंद्रीय गृह मंत्रालय में अटका हुआ है।
राज्य के नाम बदलने पर आता है एक हजार करोड़ का खर्च
एक रिपोर्ट के अनुसार किसी भी बड़े शहर या राज्यों का नाम बदलने पर तकरीबन एक हजार करोड़ रुपये तक का खर्च आ सकता है और यह धन भारत सरकार की संचित निधि से खर्च होता है। सबसे पहले तो किसी भी राज्य का नाम बदलने की अधिसूचना जारी किए जाने के साथ ही केंद्र और राज्य के सभी सरकारी कागजातों में राज्य का नाम बदला जाता है। इसके बाद गूगल मैप से लेकर साइन बोर्ड, रेलवे, एयरपोर्ट सहित अन्य सभी प्रमुख स्थानों पर राज्य का नया नाम बदलना पड़ता है।
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