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Space Debris: अंतरिक्ष का ‘कचरा’, धरती के लिए बन गया है बड़ा खतरा

तीन साल पहले अंतरिक्ष में छोड़ा गया करीब 700 पाउंड का कचरा पिछले सप्ताह धरती पर आकर गिर गया। अनुमान है कि हजारों मीट्रिक टन मानव निर्मित कचरा पृथ्वी की कक्षा में घूम रहा है।

Space Debris garbageof space has become a big threat to the earth

अमेरिका के कैलिफोर्निया में 17 मार्च 2023 (शुक्रवार) की रात एक हैरतअंगेज नजारा देखने को मिला। वहां स्पेस स्टेशन का एक एंटीना 27 हजार किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से धरती पर आकर गिर गया। इस दौरान आसमान चमकीला दिखने लगा। असल में यह स्पेश स्टेशन से छोड़ा गया 'मानवनिर्मित कचरा' था जिसे तीन साल पहले फरवरी 2020 में छोड़ा गया था।

सवाल पैदा होता है कि आखिर तीन पहले छोड़ा गया कचरा, अब धरती पर क्यों गिरा? दरअसल, तीन साल तक यह धरती के चक्कर काट रहा था। यह करीब 700 पाउंड का एक बेकार यंत्र था, जो अब धरती पर गिर गया।

कितने उपग्रह हैं अंतरिक्ष में
अमेरिकी सरकार की अकाउंटेबिलिटी ऑफिस (जवाबदेही कार्यालय) की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 1957 में स्पुतनिक नाम के एक कृत्रिम यानी मानवनिर्मित उपग्रह को पहली बार अंतरिक्ष में भेजा गया। उसके बाद से पृथ्वी की कक्षा में उपग्रहों की संख्या में लगातार तेजी आई है। साल 2015 तक ये संख्या लगभग 1400 थी, जबकि 2022 के शुरुआत तक बढ़कर 5500 के करीब पहुंच गयी है। वहीं लगभग 58,000 अतिरिक्त उपग्रहों को इस दशक के अंत तक लॉन्च किया जा सकता है। यह संख्या सक्रिय उपग्रहों की वर्तमान संख्या से 10 गुना अधिक है।

पृथ्वी की कक्षा में हजारों टन मलबा
26 मई 2021 को अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा की रिपोर्ट के मुताबिक अंतरिक्ष में प्राकृतिक उल्कापिंड और मानवनिर्मित मलबे, दोनों शामिल हैं। उल्कापिंड, सूर्य की कक्षा में मौजूद हैं। जबकि अधिकांश मानवनिर्मित मलबा पृथ्वी की कक्षा में है। फिलहाल तकरीबन 23,000 मलबे के टुकड़े एक सॉफ्टबॉल के आकार के है। यह मलबा अधिकतम 17,500 मील प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रहा है। जोकि किसी उपग्रह अथवा अंतरिक्ष यान को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी है।

नासा का कहना है कि इस मलबे के अलावा आधा मिलियन टुकड़े यानी 5 लाख मानवनिर्मित कचरा किसी कंचे की गोली (मार्बल) और उससे थोड़े बड़े आकार का है। इन टुकड़ों का साइज 0.4 इंच से 1 सेंटीमीटर तक है। जबकि लगभग 100 मिलियन मानवनिर्मित टुकड़ें .04 इंच (एक मिलीमीटर) या उससे बड़े हैं। वहीं सबसे छोटा मलबा माइक्रोमीटर का आकार, 0.000039 इंच व्यास है।

अंतरिक्ष में 9 हजार मीट्रिक टन कचरा?
नासा की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2022 तक पृथ्वी की कक्षा में कुल मलबा 9,000 मीट्रिक टन या उससे भी अधिक हो सकता है। वहीं एयरलॉक के मुताबिक चार अंतरिक्ष यात्री हर साल 2,500 किलोग्राम कचरा पैदा करते हैं। बता दें कि अंतरिक्ष में मानवनिर्मित अपशिष्ट की समस्या एक लंबे समय से चली आ रही है। फिर भी सार्वजनिक रूप से इस पर कभी कोई चर्चा नहीं की जाती जबकि ये बड़ी चुनौती बन सकता है।

धरती पर भी गिरते हैं टुकड़ें
गौरतलब है कि अधिकतर मानवनिर्मित मलबे के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते ही उसमें आग लग जाती है। इस प्रकार ज्यादातर धरती पर गिरने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं। वहीं पृथ्वी के 70 प्रतिशत हिस्से में पानी है। यदि अंतरिक्ष का कोई मलबा समुद्र में गिरता है तो किसी को पता भी नहीं चलता और वह डूब जाता है। यही कारण है कोई भी स्पेस एजेंसी स्पष्ट रूप से यह नहीं बता पाती कि आखिर कितना 'स्पेस कचरा' धरती पर कब और किन-किन इलाकों में गिरा।
फिर भी कई बार भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में ऐसे मानव निर्मित मलबे के अंतरिक्ष से गिरने की कई खबरें सामने आ चुकी हैं। जैसे साल 1969 में एक जापानी जहाज पर सवार पांच नाविक घायल हो गये थे, जब सोवियत अंतरिक्ष यान का मलबा उनकी नाव पर आकर गिरा था। वहीं साल 1979 में 'स्काईलैब' द्वारा फेंके गये कचरे के हिस्से ऑस्ट्रेलिया के शियर ऑफ एस्पेरेंस सिटी के आसपास के क्षेत्र में आ गए थे। जिसके बाद नासा पर $400 का जुर्माना लगाया गया था। वहीं साल 1997 में अमेरिकी वायुसेना के एक उपग्रह के प्रणोदक टैंक के 10×13 सेमी आकार के एक छोटे से टुकड़े से ओक्लाहोमा की एक महिला लोटी विलियम्स के कंधे पर गंभीर चोट आई थी।

इसी तरह 12 मई 2022 को पश्चिमी भारत में गुजरात में अंतरिक्ष से कुछ मलबे के टुकड़े गिरते देखे गये। शुरुआती जांच में इसे चीनी रॉकेट का हिस्सा माना गया। रिपोर्ट के मुताबिक कोई हताहत या संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ। वहीं दुर्घटनाग्रस्त वस्तुओं को 15 किलोमीटर के दायरे में खोजा गया था, और उनमें से लगभग पांच किलोग्राम वजन वाली एक काली धातु की गेंद मिली थी।

अंतरिक्ष का कचरा, धरती पर खतरा
नेचर एस्ट्रोनॉमी के जुलाई 2022 में प्रकाशित एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि अगले 10 सालों में मानवनिर्मित कचरे के गिरने से इंसानों और जानवरों दोनों के हताहत होने की संभावना है। स्टडी में सामने आया है कि जकार्ता, ढाका, लागोस, न्यूयॉर्क, बीजिंग और मॉस्को में ऐसी घटनाएं होने की सबसे ज्यादा संभावना है। हालांकि, अभी तक अंतरिक्ष से कोई मलबा गिरने के कारण किसी तरह की दुर्घटना से मौत नहीं हुई है लेकिन चोट लगने और संपत्ति को नुकसान के मामले सामने आये हैं। साथ ही इस अध्ययन में ये भी कहा गया है कि हर दिन और हर मिनट अंतरिक्ष से हमारे ऊपर मलबा बरसता हैं। यह एक ऐसा खतरा है जिससे हम लगभग पूरी तरह से अनजान हैं।

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