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Soybean: सोयाबीन की खेती - प्रोटीन से भरपूर व किसानों के लिए लाभकारी

सोयाबीन का वैज्ञानिक नाम 'ग्लाईसीन मैक्स' है। इसे तिलहन व दलहन दोनों प्रकार की फसल माना जाता है। शाकाहारियों के लिए सोयाबीन को प्रोटीन प्राप्त करने का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है।

सोयाबीन में 42 प्रतिशत प्रोटीन, 22 प्रतिशत तेल, 21 प्रतिशत कार्बोहाइट्रेट व 15 प्रतिशत अन्य पदार्थ होते हैं।

soybean

भारत में सोयाबीन की खेती व उत्पादन
सोयाबीन की खेती के लिए चिकनी दोमट मिट्टी अधिक उपयुक्त होती है, इसके साथ-साथ रेतीली मिट्टी को छोड़कर सभी प्रकार की मिट्टी में इसकी खेती की जा सकती है।

भारत में सबसे ज्यादा सोयाबीन की खेती मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र व राजस्थान में की जाती है। इसके अलावा छत्तीसगढ़, उत्तरी कर्नाटक, गुजरात और उत्तरी तेलंगाना में भी सोयाबीन की खेती हो रही है। वर्ष 2022-23 के आंकड़ों के अनुसार सोयाबीन उत्पादन में महाराष्ट्र पहले स्थान पर है।

सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान भारत में 12.07 मिलियन हेक्टेयर भूमि में सोयाबीन की खेती हुई। जिससे 13.98 मिलियन टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ। यानि औसतन 1158 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर सोयाबीन का उत्पादन हुआ। जबकि वर्ष 2021-22 के दौरान भारत में सोयाबीन का उत्पादन 12.61 मिलियन टन हुआ था, जो वर्ष 2020-21 से 1.4 मिलियन टन अधिक था।

अगर राज्यवार प्रति हेक्टयर सोयाबीन उत्पादन देखें तो महाराष्ट्र में 14-15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर सोयाबीन उत्पादन होता है, जबकि मध्य प्रदेश में यह 11-12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर ही होता है। वहीं सोयाबीन का बाजार भाव 4500 से 5000 रूपये प्रति क्विंटल होता है। इस हिसाब से प्रति हेक्टेयर 1.5 लाख रूपये का सोयाबीन उत्पादन हो जाता है। जबकि सोयाबीन की फसल मात्र 3-4 महीने की ही होती है।

विश्व स्तर पर सोयाबीन उत्पादन
अगर विश्वस्तर पर सोयाबीन के उत्पादन की बात करें तो अमरीका के कृषि विभाग (यूएसडीए) के जुलाई 2023 में जारी आंकड़ों के अनुसार ब्राजील में सबसे ज्यादा 163 मिलियन टन प्रति वर्ष सोयाबीन का उत्पादन हुआ, जो वैश्विक स्तर पर कुल उत्पादन का लगभग 42 प्रतिशत है। 117 मिलियन टन (लगभग 30 प्रतिशत) उत्पादन के साथ अमरीका का दूसरा स्थान व 48 मिलियन टन (लगभग 13 प्रतिशत) प्रति वर्ष सोयाबीन उत्पादन के साथ अर्जेंटीना का तीसरा स्थान है। वहीं चीन 20.5 मिलियन टन (लगभग 5 प्रतिशत) प्रति वर्ष सोयाबीन उत्पादन में चौथे पर है।

भारत में लगभग 13 मिलियन टन प्रतिवर्ष सोयाबीन का उत्पादन होता है, जो वैश्विक स्तर पर पांचवें स्थान पर आता है। वहीं विश्व स्तर पर सोयाबीन उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 3 प्रतिशत है।

सोयाबीन का उपयोग
सोयाबीन में प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन-ई, थाइमीन, राइबोफ्लेविन अमीनो अम्ल, सैपोनिन, साइटोस्टेरॉल, फेनोलिक एसिड तथा अन्य कई पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद हैं। सोयाबीन में प्रोटीन एवं तेल की भरपूर मात्रा के कारण दुनिया भर में खाद्य तेल एवं पौष्टिक आहारों के रूप में इसका प्रयोग होता है।

सोयाबीन के सेवन से मधुमेह (शुगर), हृदय संबंधी बीमारियां, कैंसर, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण आदि बीमारियों में लाभ मिलता है। इसके साथ-साथ यह हड्डियों को भी मजबूत करता है तथा वजन घटाने में भी सहायक है। सोयाबीन त्वचा व बालों को स्वस्थ व सुंदर बनाता है।

सोयाबीन का आयात/निर्यात
भारतीय में सोयाबीन का कुल तिलहन फसलों में 42 प्रतिशत और कुल खाद्य तेल उत्पादन में 22 प्रतिशत का योगदान है। विश्व की सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश यानि भारत में खाद्य तेल की मांग लगातार बढ़ रही है। जबकि भारत अपनी तिलहनी फसलों द्वारा 40 प्रतिशत ही मांग को पूरा कर पाता है, जबकि 60 प्रतिशत खाद्य तेलों की पूर्ति के लिए अन्य देशों से आयात पर निर्भर है। भारत अर्जेंटीना व ब्राजील से सबसे ज्यादा सोयाबीन का आयात करता है।

आयात के साथ-साथ भारत सोयाबीन का निर्यात भी करता है। भारत बांग्लादेश, वियतनाम व नेपाल को सोयाबीन खली का निर्यात करता है। अप्रैल 2023 में भारत ने 4.93 लाख टन सोयाबीन खली का निर्यात किया था, जबकि अप्रैल 2022 में यह 3.32 लाख टन था।

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