Poetry Festival of Medellin: ड्रग्स के लिए बदनाम मेडेलिन बना कवियों का तीर्थ स्थल
ड्रग्स के लिए दुनियाभर में कुख्यात दक्षिण अमेरिका का शहर मेडेलिन (कोलंबिया) अब कवियों के लिए तीर्थ स्थल के रूप में मशहूर हो रहा है। कोलंबियाई कवि फर्नांडो रेंडो के प्रयास से करीब बारह बरस पहले मेडेलिन में वर्ल्ड पोएट्री मूवमेंट की शुरुआत हुई। दुनियाभर के जाने-माने कवि इस मूवमेंट से जुड़े। उद्देश्य एकदम स्पष्ट है, मानवता के हक में अपनी बात रखना और शांति स्थापित करने के प्रयासों को बल देना। इसी उद्देश्य के साथ हर साल जुलाई में दुनिया के विभिन्न देशों में कविता पाठ आयोजित किए जाते हैं।
मेडेलिन में खासतौर पर कविता पाठ के साथ वैचारिक सत्र भी रखे जाते हैं। इस बार इस मूवमेंट के तहत प्रथम ऐतिहासिक कांग्रेस अधिवेशन होने जा रहा है। अधिवेशन 13 जुलाई को मेडेलिन (कोलंबिया) व काराकस (वेनेजुएला) में प्रारंभ होकर 24 जुलाई तक चलेगा। इस बीच दुनिया के कई देशों में कविता पाठ आयोजित किए जाएंगे। एक जुलाई से ही इसका प्रचार शुरू हो जाएगा। इस अभियान के तहत पांच महाद्वीपों के सौ चुने हुए कॉर्डिनेटर भाग लेंगे। भारत में भी कई स्थानों पर हिंदी और अन्य प्रांतीय भाषाओं में कविता पाठ का आयोजन किया जाएगा।

शांति का मंत्र बनी कविता
वर्ल्ड पोएट्री मूवमेंट ने कविता को शांति मंत्र के रूप में स्थापित किया। इस मूवमेंट की शुरुआत ड्रग्स के लिए कुख्यात शहर मेडेलिन (कोलंबिया) से हुई। मेडेलिन वही शहर है, जो कभी दुनिया के सबसे बड़े अपराधी पाब्लो एस्कोबार का अड्डा रह चुका है। एस्कोबार ने ड्रग्स के कारोबार में इतना पैसा बनाया कि 1989 में फोर्ब्स पत्रिका ने उसे दुनिया का सातवां सबसे अमीर शख्स घोषित किया। ड्रग्स और हिंसा ने कोलंबिया की छवि ऐसी बना दी कि लोग वहां जाने से कतराते। जो विदेशी कोलंबिया की ओर रुख करते, उन्हें अमेरिका का वीजा नहीं मिलता था।

ऐसे में दुनिया से अलग-थलग पड़े कोलंबिया के कवियों ने राहत कविताओं में खोजी। फर्नांडो अपने कुछ साथी कवियों के साथ कविता पाठ करते। यह वो दौर था, जब कोलंबिया के लोग अपने घरों से निकलने से भी डरते थे। इस दौर में फर्नांडो ने खुले में ही कविता पाठ करना शुरू किया, धीरे-धीरे कविता शांति का मंत्र बनती गई और पोएट्री एक मूवमेंट के रूप में बदल गई। इस मूवमेंट ने कभी ड्रग्स के लिए बदनाम मेडेलिन को कवियों के तीर्थ स्थल के रूप में स्थापित कर दिया।
2011 से शुरू हुआ वर्ल्ड पोएट्री मूवमेंट
2011 की बात है, जब कोलंबियाई कवि फर्नांडो ने मेडेलिन पोएट्री फेस्टिवल का आयोजन किया। इस आयोजन में उन्होंने दुनियाभर में चल रहे पोएट्री फेस्टिवल के आयोजकों को आमंत्रित किया। भारत से कृत्या पोएट्री फेस्टिवल की फाउंडर रति सक्सेना ने भाग लिया। वे डब्ल्यूपीएम की फाउंडर मेंबर में से एक चुनी गईं। मेडेलिन फेस्टिवल में कविता पाठ के साथ ही वैचारिक सत्र भी रखे गए और अवाम के हक में आवाज उठाने पर जोर दिया गया।

ऐसे में फर्नांडो ने वर्ल्ड पोएट्री मूवमेंट की रूपरेखा तय की, तब से अब तक लगातार इस मूवमेंट के तहत कविताओं के जरिए दुनिया में अमन और शांति स्थापित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। एक खास बात यह भी रही कि फर्नांडो ने खुद को सिर्फ कविता लिखने तक ही सीमित नहीं रखा, राजनीतिक सक्रियता भी दिखाई। उन्होंने चुनाव भी लड़ा। इस चुनाव में उन्हें सफलता भले ही नहीं मिली, लेकिन उनकी पार्टी ने जीत हासिल की। ड्रग्स माफिया के खिलाफ पार्टी के अभियान ने ही यह सफलता दिलाई।
पोएट्री थेरेपी काम करती है...
पोएट्री थेरेपी पर एक महत्वपूर्ण किताब 'द फिस्ट विच ओपन्स' लिखने वाली कवि रति सक्सेना का कहना है कि मुश्किल दौर में कविताओं ने थैरेपी की तरह ही काम किया है। कंसंट्रेशन कैंप की यातनाओं को झेलने के लिए भी लोगों ने कविताओं का सहारा लिया था।

वे कहती हैं कि हमारे तमाम मंत्र, भजन ये सब भी तो एक कविता ही हैं, जिनके पाठ से मुश्किल दिनों में भी हम संतोष से रहना सीख जाते हैं। रति वर्ल्ड पोएट्री मूवमेंट की एशिया की हैड कॉर्डिनेटर भी हैं। वे कहती हैं कि कविता के लिए जैसी दीवानगी मेडेलिन में देखी, वैसी कहीं और नहीं देखी, इसके पीछे वजह यही है कि वहां के लोगों ने ड्रग्स की वजह से काफी हिंसा झेली है। ऐसे में कविताओं ने मेडेलिन को फिर से सिर उठाकर जीने का हौसला दिया है।












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