रायबरेली: सोनिया के सामने जीत का अंतर बढ़ाने की चुनौती

स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार मधुसूदन मिश्रा कहते हैं कि यहां सोनिया के खिलाफ सारे बाहरी उम्मीदवार हैं, जिन्हें कोई जानता नहीं है। ऐसा लगता है कि विरोधी दलों ने अपने उम्मीदवार उतारकर महज फर्ज अदायगी की, ताकि उनके राजनीतिक वजूद पर सवाल न खड़े हों।
मिश्रा कहते हैं कि महंगाई को लेकर भले ही लोगों में यहां थोड़ा गुस्सा हो, लेकिन उन्हें पता है कि सोनिया के अलावा दूसरा कोई उम्मीदवार रायबरेली का इतना विकास नहीं कर सकता। यहां बाकी मुद्दों पर विकास का मुद्दा भारी है। यहां के लोगों को कांग्रेस के भ्रष्टाचार या घोटालों से कोई लेना-देना नहीं है, दुनिया में देश की भले ही बदनामी हो, मगर रायबरेली का विकास होना चाहिए। स्थानीय लोग सिर्फ इतने से ही संतुष्ट हैं।
रायबरेली के लोगों का कहना है कि पहले फिरोज गांधी, फिर इंदिरा गांधी और बीते 10 साल से सोनिया ने यहां के विकास के लिए काफी काम किए। इसलिए रायबरेली में गांधी परिवार के खिलाफ जातीय समीकरण काम नहीं करते और उन्हें हर वर्ग और जाति का वोट मिलता है।
पढ़ें- पांच साल में नौ गुनी हो गई सोनिया गांधी की संपत्ति
सोनिया को वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में यहां 72 फीसदी के साथ 4,81,490 मत मिले थे। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के आऱ एस़ कुशवाहा को रिकार्ड 3,72,165 वोटों से हराया था। कुशवाहा को 1,09,325 मत मिले थे, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अपना दल के उम्मीदवार जमानत भी नहीं बचा पाए थे।
पिछले चुनावों की तरह समाजवादी पार्टी (सपा) ने सोनिया के खिलाफ इस बार अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है, तो बसपा से प्रवेश सिंह, तृणमूल कांग्रेस से अंजू सिंह, आम आदमी पार्टी (आप) से पूर्व न्यायाधीशा फखरुद्दीन और भाजपा से वकील अजय अग्रवाल मैदान में हैं।
स्थानीय निवासी कुलदीप नारायण तिवारी कहते हैं, "सोनिया 10 साल से लगातार रायबरेली के विकास के लिए काम कर रही हैं। वह लगभग हर दो महीने में क्षेत्र का दौरा करती हैं। लोगों की समस्याएं सुनती हैं। चुनाव में उतरे बाकी उम्मीदवार अचानक प्रकट हो गए। चुनाव के बाद ये लापता हो जाएंगे। इसलिए हम ऐसे नेता को चुनेंगे जो हमारे सुख-दुख में हमेशा साथ रहता है।"
स्थानीय पत्रकार रामेंद्र सिंह कहते हैं कि नेहरू-गांधी परिवार की परंपरागत रायबरेली सीट पर हर वर्ग के लोगों का सोनिया के प्रति इतना झुकाव है कि किसी और दल के नेता की दाल यहां नहीं गल सकती। यही कारण है कि दूसरे दलों से कोई बड़ा नेता गांधी परिवार के खिलाफ मैदान में नहीं उतरता। यहां 'लोकतंत्र' की एक अलग तस्वीर दिखती है।
सिंह कहते हैं कि इस चुनाव में सोनिया की जीत का अंतर 10-20 हजार मतों से कम या ज्यादा हो सकता है, लेकिन रायबरेली से उनकी हार नामुमकिन है। रायबरेली में तीसरे चरण में 30 अप्रैल को मतदान होना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
-
Assam Election 2026: असम चुनाव में बड़ा गेम, कांग्रेस की 3rd लिस्ट जारी, रायजोर दल से गठबंधन—क्या बदलेगी सत्ता -
Gold Rate Today: फिर सस्ता हो गया सोना, हाई से 28,000 तक गिरे भाव, अब कितने में मिल रहा है 22K और 18K गोल्ड -
'मैंने 6 मर्दों के साथ', 62 साल की इस बॉलीवुड एक्ट्रेस ने खोलीं लव लाइफ की परतें, 2 शादियों में हुआ ऐसा हाल -
Aaj Ka Chandi ka Bhav: अमेरिका-ईरान जंग के बीच चांदी धड़ाम! ₹38,000 सस्ती, आपके शहर का लेटेस्ट Silver Rate -
Irani Nepo Kids: अमेरिका में मौज कर रहे ईरानी नेताओं-कमांडरों के बच्चे, जनता को गजब मूर्ख बनाया, देखें लिस्ट -
Gold Rate Today: सोना सस्ता या अभी और गिरेगा? Tanishq से लेकर Kalyan, Malabar तक क्या है गहनों का भाव? -
Iran Espionage Israel: दूसरों की जासूसी करने वाले इजरायल के लीक हुए सीक्रेट, Iron Dome का सैनिक निकला जासूस -
Mamta Kulkarni: क्या साध्वी बनने का नाटक कर रही थीं ममता कुलकर्णी? अब गोवा में कर रहीं ऐसा काम, लोग हुए हैरान -
कौन थे कैप्टन राकेश रंजन? होर्मुज में 18 दिनों से फंसा था शिप, अब हुई मौत, परिवार की हो रही है ऐसी हालत -
Mojtaba Khamenei: जिंदा है मोजतबा खामेनेई! मौत के दावों के बीच ईरान ने जारी किया सीक्रेट VIDEO -
कौन है हाई प्रोफाइल ज्योतिषी? आस्था के नाम पर करता था दरिंदगी, सीक्रेट कैमरे, 58 महिलाओं संग मिले Video -
Uttar Pradesh Silver Rate Today: ईद पर चांदी बुरी तरह UP में लुढकी? Lucknow समेत 8 शहरों का ताजा भाव क्या?












Click it and Unblock the Notifications