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#EngineersDay मनायें या चपरासी की नौकरी करें?

[अजय मोहन] सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर सुबह से #EngineersDay ट्रेंड में है, क्योंकि आज सर मोक्षागुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती है। पूरे भारत में इंजीनियरों के तमाम संगठन छोटे-बड़े आयोजन कर रहे हैं, लेकिन लाखों की संख्या में ऐसे इंजीनियर भी हैं, जो हाथ में डिग्री लेकर बैठे हैं और सोच रहे हैं कि आज अभ‍ियांत्रिकी दिवस मनायें या चपरासी की नौकरी करें?

जी हां सच तो यही है, क्योंकि मई 2012 में मध्य प्रदेश के महालेखाकार कार्यालय में जब चपरासी और ड्राइवर के पद निकले, तो उसमें कुछ आवेदन बीटेक व एमबीए छात्रों के भी आये। बड़ी हंसी उड़ी। आज वो हंसी दर्द बन गई है, क्योंकि 2015 में उत्तर प्रदेश के सचिवालय में चपरासी की पोस्ट के लिये कुल 18 लाख आवेदन आये हैं, जिनमें दो लाख से ज्यादा आवेदन बीटेक छात्रों ने किये हैं।

न्यूनतम अर्हता 5वीं पास आवेदक बीटेक

यूपी सचिवालय के सेवायोजन अध‍िकारी की मानें इस पद के लिये न्यूनतम अर्हता 5वीं पास रखी गई थी, लेकिन 2 लाख बीटेक, 10 हजार से ज्यादा एमबीए और करीब 1 हजार पीएचडी स्कॉलर्स के आवेदन देख प्रशासन के होश उड़ गये हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि 18 लाख अभ्यर्थ‍ियों का इंटरव्यू कैसे होगा।

अगर बीटेक छात्र का हुआ इंटरव्यू तो-

  • जिस छात्र ने सेक्सटेंट से इमारत की ऊंचाई ज्ञात करना सीखा हो उससे पूछा जायेगा कि इमारत में झाड़ू कैसे लगाओगे?
  • जिस छात्र ने 10 लाख रुपए के खर्च पर इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है, उससे पूछा जायेगा कि वो अफसर को सलाम कैसे ठोकेगा और पानी कैसे पिलायेगा।
  • जिस छात्र ने कभी जिरॉक्स मशीन के मॉडल पढ़े होंगे उससे पूछा जायेगा कि फोटो कॉपी करनी आती है या नहीं?

नौकरी मिलने के बाद खुदा न खास्ता अगर ऑफ‍िस में कुछ खराब हो गया, तो वहां मौजूद सीधा कमेंट पास करेंगे, "अरे शुक्ला जी तुमतो इंजीनियर हो, जरा देख लो क्या खराबी है..."

बच्चे के हाथों में पेंचकस देख उसे इंजीनियर की उपाध‍ि दे डालने वाले लोग शायद मुस्कुरा रहे होंगे, लेकिन यह भारत का दुर्भाग्य है कि सरकार "Make in India" की बात करती है लेकिन "Who Make India" की बात नहीं करती।

इस दिशा में क्या कदम उठाने चाहिये, यह सोचने के लिये सरकार के पास बहुत बड़ा थिंक टैंक है। और इस थिंक टैंक के सामने बहुत सारी चुनौतियां खड़ी हैं। चुनौतियां क्या हैं ये आपको इंजीनियरिंग से जुड़े कुछ शर्मसार करने वाले तथ्यों में मिलेंगे इस स्लाइडर में।

हर साल 15 लाख इंजीनियरिंग

हर साल 15 लाख इंजीनियरिंग

देश में हर साल 15 लाख इंजीनियरिंग के छात्र निकलते हैं, लेकिन नौकरी बहुत कम लोगों को मिलती है।

3,345 इंजीनियरिंग कॉलेज

3,345 इंजीनियरिंग कॉलेज

देश में 3,345 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, लेकिन आधे से ज्यादा कॉलेज क्वालिटी एजूकेशन नहीं दे पा रहे हैं।

IIT से तुलना

IIT से तुलना

IIT के पास आउट की सैलरी 9 से 10 लाख रुप तक होती है, जबकि सेकेंड ग्रेड कॉलेजों के छात्रों को 1 से 2 लाख रुपए सालाना मिलता है।

प्राइवेट कॉलजों में छात्रों की संख्या

प्राइवेट कॉलजों में छात्रों की संख्या

प्राइवेट कॉलेजों में छात्रों की संख्या अमेरिका-चीन में सालाना पैदा होने वाले इंजीनियरों की संख्या के बराबर होती है।

एंट्री लेवल की सैलरी में कोई बदलाव नहीं

एंट्री लेवल की सैलरी में कोई बदलाव नहीं

इंजीनियरिंग छात्रों के लिये एंट्री लेवल की सैलरी में पिछले 10 साल से कोई इजाफा नहीं हुआ है।

33% को नौकरी नहीं मिलने का रिस्क

33% को नौकरी नहीं मिलने का रिस्क

देश के 33% इंजीनियरिंग छात्रों को नौकरी नहीं मिलने का रिस्क हमेशा बना रहता है।

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