Bhagat Singh Jayanti 2021 : 'मुझे मार सकते हैं, मेरे विचारों को नहीं....', पढ़ें भगत सिंह के 10 अनमोल विचार

'मुझे मार सकते हैं, मेरे विचारों को नहीं....', पढ़ें भगत सिंह के 10 अनमोल विचार

नई दिल्ली, 27 सितंबर: भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह की 28 सितंबर को 114वीं जयंती है। शहीद भगत सिंह की जयंती पर हर कोई उनके बलिदान को याद कर रहा है। सोशल मीडिया पर लोग भगत सिंह को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। भगत सिंह भारत की आजादी के लिए महज 23 साल की उम्र में जान दे दी थी। भगत सिंह को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों ने 23 साल की उम्र में फांसी पर लटका दिया था। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब प्रांत में हुआ था। ये हिस्सा अब बंटवारे के बाद पाकिस्तान में पड़ता है। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव तीनों स्वतंत्रता सेनानियों ने मिलकर ब्रिटिश शासकों की रातों की नींद उड़ा दी।

Bhagat Singh Jayanti 2021

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को टिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या के लिए लाहौर साजिश के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। 23 मार्च 1931 को पंजाब के लाहौर सेंट्रल गॉल जेल में भगत सिंह को फांसी दी गई थी।

भगत सिंह अपने साहस और देशभक्ति से भारत की आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करेंगे। भगत सिंह ने आजादी की लड़ाई के दौरान कई नारे भी दिए, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं।

आइए जानें भगत सिंह के 10 अनमोल विचार (Bhagat Singh Slogan)...।

- "क्रांति मानव जाति का एक अविभाज्य अधिकार है। स्वतंत्रता सभी का एक अविनाशी जन्म अधिकार है"

-''वे मुझे मार सकते हैं, लेकिन वे मेरे विचारों को नहीं मार सकते। वे मेरे शरीर को कुचल सकते हैं, लेकिन वे मेरी आत्मा को कुचल नहीं पाएंगे"

- ''मेरा धर्म मेरे देश की सेवा करना है।''

-''जिंदा रहने की हसरत मेरी भी है लेकिन मैं कैद रहकर अपना जीवन नहीं बिताना चाहता।''

-"मैं ऐसा पागल हूं कि जेल में भी आजाद हूं।''

-"किसी को भी 'क्रांति' शब्द की उसके शाब्दिक अर्थ में व्याख्या नहीं करनी चाहिए। इसका उपयोग या दुरुपयोग करने वालों के हितों के अनुसार इस शब्द के अलग-अलग अर्थ और महत्व को जिम्मेदार ठहराया जाता है। शोषण की स्थापित एजेंसियों के लिए यह खून की भावना को जोड़ता है, क्रांतिकारियों के लिए, यह एक पवित्र वाक्यांश है"

भगत सिंह के नारे

-''मैं महत्वाकांक्षा और आशा और जीवन के आकर्षण से भरा हूं। लेकिन जरूरत के समय मैं सब कुछ त्याग सकता हूं''

-"बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं होती। क्रांति की तलवार विचारों के पत्थर पर तेज होती है"

-"लोग स्थापित चीजों के आदी हो जाते हैं इसलिए परिवर्तन के विचार से कांपते हैं। इस सुस्ती की भावना को क्रांतिकारी भावना द्वारा प्रतिस्थापित करने की आवश्यकता है"

Bhagat Singh Slogan Inquilab Zindabad

-''मरकर भी मेरे दिल से वतन की उल्फत नहीं निकलेगी, मेरी मिट्टी से भी वतन की ही खुशबू आएगी।''

-''आज जो मै आगाज लिख रहा हूं, उसका अंजाम कल आएगा। मेरे खून का एक-एक कतरा कभी तो इंकलाब लाएगा।''

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