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Titanic and Titan: अमीरों का शौक बना टाइटैनिक जहाज का मलबा, देखने के लिए लाखों-करोड़ों खर्च कर देते हैं रईस

Titanic and Titan:अप्रैल 1912 से अटलांटिक सागर में डूबे टाइटैनिक जहाज के मलबे को दिखाने गयी पनडुब्बी 'टाइटन' में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गयी है। इस बात की पुष्टि अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने की है। अमेरिकी कोस्ट गार्ड के रियर एडमिरल जॉन मॉगर ने बताया है कि पनडुब्बी के पांच हिस्से टाइटैनिक जहाज के मलबे के अगले हिस्से के 1600 फीट नीचे मिले हैं।

दरअसल 18 जून 2023 को जब पनडुब्बी ने समुद्र में गोता लगाया, उसके 1 घंटा 45 मिनट के बाद 'द टाइटन' से संपर्क टूट गया था। इस पनडुब्बी में ब्रिटिश व्यवसायी हामिश हार्डिंग, फ्रांसीसी गोताखोर और एक्सप्लोरर पॉल-हेनरी नार्गोलेट, पाकिस्तानी अरबपति शहजादा दाऊद और उनका बेटा सुलेमान दाऊद सहित पनडुब्बी का संचालन करने वाली कंपनी ओशनगेट के सीईओ स्टॉकटन रश भी शामिल थे।

rich spend millions to see wreckage of Titanic and Titan

कब डूबा टाइटैनिक जहाज?

10 अप्रैल 1912 को ब्रिटेन के साउथैम्पटन से न्यूयॉर्क सिटी के लिए अपनी यात्रा पर टाइटैनिक जहाज निकला था। तकरीबन चार दिनों के बाद 14 अप्रैल की आधी रात एक आइसबर्ग से टकराकर यह जहाज उत्तरी अटलांटिक महासागर में डूब गया था। हिस्ट्री चैनल के मुताबिक इस जहाज में चालक दल समेत 2,240 यात्री सवार थे। जिसमें से 1,500 से ज्यादा की मौत हो गयी थी। जबकि तकरीबन 700 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को आरएमएस कार्पेथिया (शिपयार्ड) द्वारा बचाया गया था।

अमीरों का शौक बना मलबा खोजना

टाइटैनिक के डूबने के तुरंत बाद उसका सटीक स्थान दुनिया के लिए अज्ञात हो गया। फिर जो धनी पीड़ित परिवार इस जहाज के डूबने से पहले बच गये थे, उन्होंने इस जहाज के मलबे को खोजने का अभियान शुरू किया। इन अमीरों में गुगेहाइम्स परिवार, एस्टर्स परिवार और विडेनर्स परिवार जैसे नाम शामिल थे। इसके लिए उन्होंने मेरिट, चैपमैन डेरिक और व्रेकिंग कंपनी के साथ अनुबंध भी किया। हालांकि, गहराई ज्यादा होने के कारण टाइटैनिक की खोज पर मिलियन डॉलर खर्च भी कर दिये लेकिन कोई खास नतीजा नहीं निकला। फिर प्रथम विश्वयुद्ध और दूसरे विश्वयुद्ध के कारण यह खोजी अभियान ठंडे बस्ते में चला गया।

60-70 के दशक में एकबार फिर इंग्लैंड के डगलस वूली नाम के शख्स बाथिस्कैप (एक फ्री-डाइविंग, स्व-चालित गहरे समुद्र में उपयोगी पनडुब्बी) की मदद से टाइटैनिक की खोज करने निकले। मगर वह भी असफल रहे। तब बर्लिन के कुछ व्यापारियों ने उन्हें आर्थिक सहायता दी थी। इसके बाद भी कई समुद्री खोजकर्ताओं ने कोशिशें की लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगी। इन खोजी अभियानों को करोड़पति ऑयलमैन जैक ग्रिम द्वारा फाइनेंस किया गया था।

डूबे टाइटैनिक को बलार्ड ने ऐसे खोजा

CBS News के मुताबिक रॉबर्ट बैलार्ड एक समुद्र विज्ञान के प्रोफेसर और सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी थे। जो टाइटैनिक के मलबे को ढूंढना चाहते थे। इसके लिए उन्हें फंड की जरूरत थी। तब उन्होंने अमेरिकी सेना से मदद मांगी। अमेरिकी नौसेना ने बलार्ड की प्रोफाइल को देखते हुए सहमति दे दी। मगर इससे पहले अमेरिकी नौसेना ने कहा कि वह नौसेना की दो परमाणु पनडुब्बियों (यूएसएस थ्रेशर और यूएसएस स्कॉर्पियन) के मलबे को खोजें। यह दोनों पनडुब्बियां 1960 के आसपास रहस्यमय तरीके से अटलांटिक महासागर में खो गयी थी।

अमेरिकी नौसेना ने बलार्ड से इस अभियान को गुप्त रखने को कहा। बलार्ड ने अपने मिशन की गोपनीयता को बनाये रखा और अपनी तकनीक के माध्यमों से यूएसएस थ्रेशर और यूएसएस स्कॉर्पियन के अवशेषों को खोजने लगे। इस दौरान उन्हें काफी कुछ और सीखने को मिल गया। बलार्ड ने अमेरिकी नौसेना के इस मिशन को पूरा किया और उन्हें टाइटैनिक खोजने के लिए केवल दो सप्ताह का समय दिया गया।

अगस्त 1985 के अंत में बलार्ड ने अपनी खोज शुरू की। उन्होंने इस अभियान में शामिल होने के लिए जीन-लुई मिशेल के नेतृत्व में एक फ्रांसीसी शोध दल को आमंत्रित किया था। नौसेना के समुद्र विज्ञान सर्वेक्षण जहाज, नॉर के जरिये बलार्ड और उनकी टीम ने टाइटैनिक के डूबने वाले स्थान से 1,000 मील के इलाके में मलबा खोजना शुरू किया।

आखिरकार 1 सितंबर 1985 की सुबह 73 सालों के बाद बलार्ड और उनकी टीम ने टाइटैनिक को खोज निकाला। यह मलबा न्यूफाउंडलैंड के तट के दक्षिण-पूर्व में लगभग 370 समुद्री मील (690 किलोमीटर) दूर मिला था। जबकि मलबा 12,500 फीट (3,800 मीटर) की गहराई में मौजूद था।

कैसे टाइटैनिक का मलबा बना बिजनेस मॉडल?

ओशनगेट एक अमेरिकी कंपनी है। यह वैज्ञानिकों, खोजकर्ताओं को समुद्र में रिसर्च के लिए क्रू सबमर्सिबल (पनडुब्बी व अन्य) प्रदान करती है। कंपनी की स्थापना 2009 में स्टॉकटन रश द्वारा की गई थी। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक ओशनगेट अपने टाइटन सबमर्सिबल से टाइटैनिक जहाज को दिखाने के लिए ग्राहकों को चार्ज करती है।

आठ दिनों की यात्रा के लिए 250,000 अमेरिकी डॉलर यानी 2 करोड़ रुपये से भी अधिक राशि की टिकट खरीदी जाती है। इस यात्रा के जरिए टाइटैनिक के मलबे को समुद्र में 3,800 मीटर नीचे जाकर देखा जा सकता है।

ओशनगेट के पास पूरा 'बिजनेस मॉडल'

ओशनगेट की वेबसाइट के मुताबिक उनके पास तीन पनडुब्बियां थी। जिनमें से केवल टाइटन ही टाइटैनिक के मलबे के पास पहुंचने में सक्षम थी, जोकि अब डूब गयी है। इस पनडुब्बी का वजन लगभग 10,432 किलोग्राम और लंबाई 6.7 मीटर थी। यह पानी के अंदर 13,100 फुट की गहराई तक जा सकती थी।

मिशन के दौरान इसमें पायलट के अलावा 4 लोग रह सकते थे। ये लोग सामान्य तौर पर आर्कियोलॉजिस्ट या समुद्र जीवविज्ञानी होने के अलावा शौकिया अमीर भी होते थे। द टाइटन, टाइटेनियम और कार्बन फाइबर से बनी थी। इसमें 4 इलेक्ट्रिक थ्रस्टर डिवाइस मौजूद थे। इसके अलावा पानी में निगरानी के लिए इसमें कैमरे, लाइट्स और स्कैनर्स भी लगे हुए थे।

हालांकि, ABC न्यूज की बेवसाइट ने लिखा कि साल 2003 में टाइटैनिक हिस्टोरिकल सोसाइटी के तत्कालीन अध्यक्ष एड कामुडा ने द एसोसिएटेड प्रेस से कहा था कि टाइटैनिक के मलबे वाली जगह में पर्यटन और अभियानों सहित मानव गतिविधि को सीमित करने की आवश्यकता है।

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