Revenge Porn: संबंध टूटने पर बढ़ रहे हैं रिवेंज पॉर्न के मामले, जानें इस संगीन जुर्म से कैसे निपटें?
Revenge Porn: तकनीकों के साथ बदलते दौर में अपराध ने भी कई नये रूप ले लिए हैं। हाल ही में अमेरिकी के टेक्सास कोर्ट ने अपनी एक्स गर्लफ्रेंड की निजी तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड करने के मामले में एक शख्स मार्कस जमाल जैक्सन पर 1.2 बिलियन डॉलर अर्थात लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। रिवेंज पॉर्न के मामले में इसे अब तक का सबसे भारी जुर्माना माना जा रहा है। उसने अपनी पूर्व गर्लफ्रेंड को मैसेज किया था कि तुम अब अपनी बाकी जिंदगी इंटरनेट से खुद को मिटाने की कोशिश में और इसमें फेल होते हुए बिताओगी... हैप्पी हंटिंग। यह मैसेज यूएस कोर्ट में उसको दोषी करार देने के लिए अहम सबूत भी माना गया।
इस मामले में साल 2016 में एक युवती ने भरोसे में अपने प्रेमी से कुछ इंटिमेट तस्वीरें साझा कर लीं। 2020 में ब्रेकअप होने के बाद प्रेमी ने बदला लेने के लिए उन तस्वीरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और एडल्ट कंटेंट वाली वेबसाइट्स पर डाल दिया। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रेमी ने बेहद निजी तस्वीरों को प्रेमिका के परिवार, रिश्तेदार, दोस्तों, सहकर्मियों और कुछ जानने वालों को भी भेज दिया।

मेटा को हर महीने मिलती है रिवेंज पॉर्न की लाखों शिकायतें
प्रताड़ना और तरह-तरह के मैसेज से तंग आकर पीड़िता ने अप्रैल 2022 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अगस्त में यह फैसला आने के बाद दुनिया भर में खासकर आधी आबादी के खिलाफ अपराधों के मामले में रिवेंज पॉर्न फिर से सुर्खियों में है। एनबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक, इंस्टाग्राम, मैसेंजर और वॉट्सऐप का संचालन करने वाली कंपनी मेटा को हर महीने रिवेंज पोर्न की लगभग 5,00,000 रिपोर्ट्स का सामना करना पड़ता है।
किसे कहते हैं रिवेंज पॉर्न, दुनिया के लिए बना चिंता का बड़ा मुद्दा
हाल ही में इंडोनेशिया में भी रिवेंज पॉर्न के मामले में बेंटन स्टेट कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी अल्वी हुसैन मुल्ला को 6 साल की कैद के अलावा इंटरनेट के इस्तेमाल पर आजीवन पाबंदी लगाने की सजा सुना दी। मुल्ला ने एक लड़की की सहमति के बिना उसकी प्राइवेट तस्वीरों और वीडियो को इंटरनेट पर डाल दिया था। पीड़िता के परिवार ने इसके खिलाफ कोर्ट जाने के अलावा सोशल मीडिया पर भी एक अभियान चलाया था।
दुनिया के इन दोनों ताजा मामले से साफ हो गया है कि रिवेंज पॉर्न किसे कहते हैं। इसका मतलब होता है कि अपनी पार्टनर या एक्स की प्राइवेट फोटो या वीडियो को उसकी सहमति के बिना और उसे बदनाम और परेशान करने की नियत से सार्वजनिक करना। इंटरनेट के दौर में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एडल्ट वेबसाइट्स पर इसे अपलोड करना आसान होने से ऐसे कई मामले लगातार सामने आ रहे हैं। आरएमआईटी यूनिवर्सिटी और मोनाश यूनिवर्सिटी के अध्ययन के हवाले से बीबीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया में प्रत्येक पांच में से एक व्यक्ति रिवेंज पोर्न का शिकार रहा है।
संसद-अदालत-पुलिस सबने माना - देश में बढ़ रहे रिवेंज पॉर्न के मामले
पड़ोसी देश सिंगापुर ने रिवेंज पॉर्न (पूर्व प्रेमी-प्रेमिका द्वारा एक-दूसरे की अनुमति के बगैर अंतरंग तस्वीरें या वीडियो साझा करना) और साइबर फ्लैशिंग (इंटरनेट के जरिए किसी के गुप्तांगों की अश्लील तस्वीरें भेजना) को गैर-कानूनी घोषित कर दिया है। भारत में भी हम अपने आसपास ऐसे आपराधिक मामले बढ़ते हुए देखते हैं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के डेटा के मुताबिक साल 2012 से 2014 के बीच महज दो सालों में रिवेंज पॉर्न के मामले में 104 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। साल 2020 में संसद में केंद्र सरकार ने भी इस बात को माना कि देश में रिवेंज पॉर्न के मामले बढ़ रहे हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अक्टूबर 2021 में ऐसे ही एक मामले में आरोपी को जमानत देने से मना करते हुए कहा था कि भले ही तस्वीरें या वीडियो बनाते वक्त सहमति रही हो फिर भी कोई अंतरंग फोटो-वीडियो को बगैर रजामंदी के सार्वजनिक नहीं कर सकता है। अगर वह अश्लीलता के दायरे में आ रही हो तो वैसे कंटेंट को पब्लिक करना पहले से कानूनन अपराध है।
भारतीय दंड संहिता और आईटी एक्ट के तहत दर्ज होता है रिवेंज पॉर्न का मामला
रिवेंज पॉर्न के ज्यादातर मामले बेहद संगीन होते हैं। आम तौर पर इन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 354 ए, बी, सी और डी के तहत दर्ज किया जाता है। इनमें यौन उत्पीड़न, निजता भंग करने और सेक्सटॉर्शन जैसे दंडनीय अपराध के तहत सजा का प्रावधान है। वहीं इंटरनेट से जुड़ा होने की वजह से ऐसे मामले आईटी एक्ट के सेक्शन 66सी, 66ई, 67 और 67ए तहत भी दर्ज किए जाते हैं।
नया शब्द होने के चलते भारतीय संविधान में फिलहाल रिवेंज पॉर्न शब्द मौजूद नहीं है, तो जाहिर है कि इसकी कोई संवैधानिक परिभाषा या व्याख्या भी नहीं दी गई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साल 2017 में प्राइवेसी यानी निजता को मौलिक अधिकार बताया है और उसको भंग करने की सजा पहले से तय है। इसके बाद रिवेंज पॉर्न जैसे मामलों पर भी चर्चा तेज हो गई है।
'राइट टू प्राइवेसी' का हिस्सा बनाया जाए 'राइट टू बी फॉरगोटन'
भारत में कानूनी तौर पर रिवेंज पॉर्न को लेकर सबसे पहले साल 2020 के नवंबर महीने में ओडिशा हाई कोर्ट ने इस बारे में काफी महत्वपूर्ण और जरूरी सुझाव दिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले में पीड़ित महिलाओं को इंटरनेट पर मौजूद अपनी आपत्तिजनक तस्वीरों को हटवाने का कानूनी हक मिलना चाहिए। इसे 'राइट टू बी फॉरगोटन' यानी भुलाए जाने का अधिकार कहा गया है। कोर्ट ने कहा कि रिवेंज पॉर्न जैसे मामले को लेकर अलग से कानून नहीं होने के चलते इसको 'राइट टू प्राइवेसी' यानी निजता के अधिकार का ही हिस्सा बनाया जा सकता है। कई बार रिवेंज पॉर्न के मामलों में ब्लैकमेलिंग का मामला भी जोड़ा जाता है, खासकर जब उसे हटाने के एवज में कोई फिरौती मांगी जाती है, भले ही वह रकम के तौर पर हो या दूसरे किसी और रूप में।
रिवेंज पॉर्न जैसे किसी मामले का शिकार हो जाएं तो क्या करना चाहिए
हम खुद या हमारे आसपास कोई रिवेंज पॉर्न जैसे किसी मामले का शिकार हो जाए तो क्या करना चाहिए। इसका पहला जवाब है कि इंटरनेट या सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफॉर्म या ऐप्स पर आपत्तिजनक फोटो, ऑडियो या वीडियो वायरल होने पर सबसे पहले उसका स्क्रीन शॉट या यूआरएल जैसे सबूत रखें। जिस प्लेटफॉर्म पर कंटेंट दिख रहा हो वहां उसे रिपोर्ट करें। वेबसाइट्स को डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट (DMCA) नोटिस भेजें। नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर साइबर सेल में रिपोर्ट दर्ज करवाएं। नाबालिग पीड़ित हो तो पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज करने को कहें। एफटीसी में भी शिकायत करें। इसके अलावा नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन द्वारा संचालित टेक इट डाउन टूल की गुमनाम रूप से कंटेंट हटवाने की सुविधा का फायदा उठाएं। हां, सबसे बड़ी और आखिरी बात आप पीड़ित हैं, अपराधी नहीं, इसलिए घबराएं या डरें नहीं।












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