Republic Day Parade 2023: जानें गणतंत्र दिवस परेड के लिए कैसे होता है झांकियों का चयन
गणतंत्र दिवस पर हर साल परेड के साथ-साथ झांकियों को लेकर देश-दुनिया के लोगों के बीच यह रोचकता बनी रहती है कि आखिर इस बार किस राज्य की झांकी बेस्ट होगी?

Republic Day Parade 2023: इस बार गणतंत्र दिवस की परेड में कुल 23 झांकियां देखने को मिलने वाली हैं। इस बार सभी झांकियों की थीम भी अलग-अलग होगी। जिसमें ज्यादातर झांकियों की थीम नारी सशक्तिकरण को लेकर हो सकती है। इनमें 17 झांकियां देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की होंगी जबकि छह अलग-अलग सरकारी मंत्रालयों और विभागों की होंगी।
इन झांकियों के लिए कर्तव्य पथ पर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा पिछले साल सितंबर में राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्यपथ किया गया था। यह पहला मौका है जब यहां गणतंत्र दिवस की परेड होगी। इस दिन के आयोजन की जिम्मेदारी भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय की होती है। इस आयोजन में लगभग 70 अन्य विभाग व संगठन मिलकर रक्षा मंत्रालय की मदद करते हैं।
कैसे होता है झांकियों का चयन
गणतंत्र दिवस पर परेड के दौरान निकाली गयी झांकियों के चयन की प्रक्रिया अलग-अलग स्टेज से होकर गुजरती है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय की ओर से एक सलेक्शन कमेटी तैयार की जाती है, जो राज्यों की झांकियों का चुनाव करती है। इस दौरान सलेक्शन करने वाली कमेटी में कल्चर, पेंटिंग, संगीत, कृषि, कोरियोग्राफी, कला, साहित्य और अन्य क्षेत्रों के एक्सपर्ट शामिल किए जाते हैं। कई एंगल से रिव्यू करने के बाद कमेटी मेंबर्स द्वारा झांकियों का फाइनल सलेक्शन होता है। इसके बाद कमेटी उस झांकी के लिए अपनी सिफारिश रक्षा मंत्रालय को भेजती है।
चरणबद्ध होती है सलेक्शन की प्रक्रिया
गणतंत्र दिवस के लिए झांकियों के सलेक्शन की प्रक्रिया कई चरणों से होकर गुजरती है। जिसकी शुरुआत झांकियों के स्केच, डिजाइन और प्रदर्शनों की थीम पर आधारित होती है। इसके बाद झांकी के मॉडल पर एक्सपर्ट कमेटी और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों/ मंत्रालयों के बीच कई दौर की मीटिंग, और बातचीत के बाद निष्कर्ष निकाला जाता है।
झांकियों के सलेक्शन के लिए पहले फेज में सभी प्रस्तावों के डिजाइन की जांच होती है। जरूरी होने पर उसमें सुधार के लिए सुझाव दिए जाते हैं। एक बार जब कमेटी डिजाइन को अप्रूव कर देती है तो प्रतिभागियों को अपने प्रस्तावों के 3D मॉडल के साथ आने को कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि झांकी का लगभग चयन हो गया। इसके बाद सलेक्शन कमेटी विभिन्न आधार पर झांकियों के 3D मॉडल की जांच करती है। फिर 6 से 7 राउंड प्रस्तावकों और सलेक्शन कमेटी के बीच बैठकें होती हैं। इस दौरान अगर झांकियों का कोई भी प्रतिनिधि उस संबंधित मीटिंग में शामिल नहीं होता है तो उसकी झांकी खारिज कर दी जाती है। इसी बैठक के बाद कुछ प्रस्तावों को खारिज और शॉर्टलिस्ट किया जाता है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि यदि किसी झांकी में नृत्य शामिल है, तो वह पारंपरिक अथवा लोक नृत्य होना अनिवार्य है। जिसमें पारंपरिक परिधान सहित और भारतीय वाद्य यंत्र शामिल हो। साथ ही उनके द्वारा झांकी के प्रस्ताव में नृत्य की एक वीडियो क्लिप भी देनी होती है। उसे भी एक्सपर्ट समिति जांच के बाद फाइनल करती है।
इन आयामों पर खरा उतरना जरुरी
झांकियों का सलेक्शन कई बातों पर निर्भर करता है। इसमें झांकी विजुअली तौर पर कितना प्रभाव डालेगी, इसका आइडिया और थीम कैसा है, और इसके पीछे का संगीत व ध्वनि कैसी रहेगी सहित मुख्य बिंदू शामिल होते हैं। सलेक्शन कमेटी के द्वारा लिमिटेड टाइम और स्पेस की कमी को देखते हुए परेड में भाग लेने के लिए लिमिटेड संख्या में ही झांकियों को शॉर्टलिस्ट किया जाता है। इसलिए रक्षा मंत्रालय का सलेक्शन कमेटी पर यह जोर होता है कि चयन प्रक्रिया को कमेटी अच्छी तरह से जांच लें और सबसे अच्छी झांकी को ही परेड में शामिल होने का ग्रीन सिग्नल दें क्योंकि पूरी दुनिया की इस पर नजर होती है।
डिजाइन बनाते समय किन बातों का ध्यान रखा जाता है
● झांकियों का जो डिजाइन या स्कैच हो उसमें स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए कि झांकी खींचने वाले वाहन का भी थीम के पार्ट के रूप में उपयोग हो।
● झांकियों पर आगे राज्य का नाम हिंदी में, पीछे अंग्रेजी और साइड में क्षेत्रीय भाषा में लिखा जा सकता है।
● झांकियों पर किसी तरह का लोगो (logo) लगाने की अनुमति नहीं होती है।
● झांकी की ग्राउंड लेवल से लंबाई 45 इंज, चौड़ाई 14 इंच और ऊंचाई 16 इंच से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। साथ ही झांकियों के लिए ट्रैक्टर या ट्रेलर जिसका भी उपयोग किया जा रहा है। उनके बीच 6 से 7 फीट का अंतर हो ताकि वो आपस में न टकराये या आसानी से मुड़ सकें।
झांकियों के लिए मंत्रालय से मिलती है ये सुविधाएं
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गणतंत्र दिवस के दौरान झांकियों के प्रदर्शन के लिए रक्षा मंत्रालय की स्पष्ट गाइडलाइन तो है, साथ ही झांकी में मिलने वाली सुविधाएं भी हैं। जिसके तहत रक्षा मंत्रालय की ओर से झांकी तैयार करने के लिए एक ट्रैक्टर और एक ट्रेलर फ्री में मुहैया कराया जाता है। झांकियों में अलग कुछ करना है तो उसके लिए राज्य सरकार या प्रस्तावक विभाग को खुद ही अन्य वाहन का खर्चा उठाना होगा। वहीं जहां तक संभव हो सके, झांकियों पर कुछ मूवमेंट के साथ साउंड और एनिमेशन भी होना चाहिए। इस दौरान सिर्फ परंपरागत और ओरिजनल फोक डांस और डांसर, उनकी वेशभूषा होनी चाहिए।
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