Opinion: जनता की जुबान से सुनिये कौन है 'आप' और उसका 'बाप'

संपादक की ओर से उद्घोषणा: यह लेख पाठक द्वारा भेजा गया है, जिसमें सिर्फ भाषा और व्याकरण के सुधार किये गये हैं।
राहुल गांधी ने कहा यदि देश में मोदी की लहर है, तो मोदी सुरक्षित सीट से क्यों लड़ रहे हैं। मेरे प्रिय राहुल गांधी जी, मेरा मतलब है फेक गांधी, क्या आप सुरक्षित सीट का मतलब समझा सकते हैं? क्या आप किसी भी नेता के जीतने का दावा किसी भी सीट से कर सकते हैं?
यह असंभव है, आप कैसे किसी सीट को सुरक्षित सीट कह सकते हैं? तथाकथिथ सेफ सीट और सामान्य सीट में क्या फर्क है? दोनों ही प्रकार की सीटों पर हर मतदाता को वोट देने का अधिकार है और जनता जिसे चाहे उसे चुन सकती है।
यदि आप वाराणसी की बात करें तो वहां पर भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी के पहले किसी भी नेता पर मुहर नहीं लगायी थी। और ऐसा करने पर जब चुनाव आयोग ने कोई प्रश्न नहीं उठाये तो विरोधी दलों को क्यों खलबली मच रही है। मेरे प्रिय राहुल जी यह लोकतांत्रिक व्यवस्था है। अगर आपकी नजर में मोदी के लिये वाराणसी सेफ सीट है, तो आप अमेठी और रायबरेली के लिये क्या कहेंगे। क्यों आप दोनों हमेशा से इन्हीं दोनों सीटों पर लड़ते आ रहे हैं? आप वाराणसी, बैंगलोर या गुवाहाटी से क्यों नहीं लड़ते? आप क्यों एक सेफ सीट से चिपके हुए हैं?
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एक खबर में मैंने पढ़ा था कि कांग्रेस ने कहा कि भाजपा बुजुर्गों को साइडलाइन कर रही है और मोदी को बढ़ावा दे रही है। अब मेरा सवाल यह है कि क्या भाजपा को पहले आपसे पूछना चाहिये क्या कि मोदी कहां से लड़ें? दूसरी बात क्या कभी भाजपा ने ऐसा कहा कि कांग्रेस का फलां नेता फलां सीट से क्यों लड़ रहा है? नहीं। तो आप अपना माथा भाजपा के सीट वितरण पर क्यों फोड़ रहे हैं। तीसरी बात अगर मोदी गुजरात से खड़े होंगे तो आप कहेंगे, "मोदी घर से बाहर आकर के देखो, तो मैं तुम्हें बताता हूं"।
आप और उसका बाप
उम्मीद है लोग आप और उसके बाप के खेल को समझ गये होंगे और कांग्रेस को 10 से भी कम सीटें मिलेंगी, क्योंकि पैसा खाने वाले सभी मंत्रियों को अपनी सेफ सीट से हारना ही चाहिये।
अरविंद केजरीवाल जी, आपको कुछ नहीं पता है कि आपने क्या किया है और क्या कर रहे हैं। 60 सालों में पहली बार देश के लोग जाति, धर्म और बाकी सभी चीजों से ऊपर उठे थे, एक जुट हुए थे, देश भर में जनसैलाब उठा। यह जन सैलाब भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ था। सभी को उम्मीद थी कि आप और अन्ना हजारे सब कुछ बदल कर रख देंगे, सब सोच रहे थे कि यह आम आदमी ईमानदार है और इस भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेकेंगे और हमारे जीवन में नया परिवर्तन लायेंगे।
लेकिन किसी को नहीं पता था कि अरविंद केजरीवाल आप अन्ना के घर में घुस कर उनकी पीठ पर छुरा भोकेंगे। हालांकि अभी भी हजारों लोगों में उम्मीद बाकी है। अब आप 24 घंटे व्यस्त हैं, आप मुख्यमंत्री भी बने, आपके पीछे बड़े राजनेताओं का हाथ भी है। आपके अंदर मीडिया में ब्रेकिंग न्यूज फेंकने की ताकत भी है, लेकिन जब आप दिल्ली की जनता को कुछ नहीं दे सके, तो देश की जनता आपसे क्या उम्मीद करे।
अब आपको सारा भ्रष्टाचार नरेंद्र मोदी के गुजरात में दिखाई देता है। आप कांग्रेस के सारे घोटाले और भ्रष्टाचार को भूल गये। यह क्या कर दिया अरविंद केजीरलवा आपने, अब कैसे लोग भरोसा करेंगे आम आदमी पर। कैसे एक ईमानदार व्यक्ति पर आम जनता भरोसा करेगी।
क्यों ऐसा कर रहे हैं, आखिर चाहते क्या हैं आप, क्यों झूट पर झूठ बोलते जा रहे हैं? वैसे अब आप आम आदमी नहीं रहे हैं। अब आप खास आदमी बन गये हैं, वो खास आदमी जिसके खिलाफ अन्ना ने जंग शुरू की थी। अब यह कैमरा आगे और कैमरा पीछे की ऐक्टिंग बंद कर दीजिये क्योंकि जनता सब कुछ समझ चुकी है।
कृपया जनता को अब यह समझना होगा कि नौटंकी के सहारे देश नहीं चलता है। भारत अरविंद केजरीवाल के बगैर भी जी सकता है, कृपया यह बात इस चुनाव में सिद्ध करके दिखा दें।
लेखक परिचय- दिनेश मंडोट, वनइंडिया के पाठक हैं और चेन्नई में रहते हैं।
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