मजबूती की ओर बढ़ रहा है भारतीय लोकतंत्र

Disclaimer: यह लेख हमारे पाठक द्वारा भेजी गई प्रतिक्रिया पर आधारित है। इसमें व्याकरण संबंधित त्रुटियों के अलावा कोई भी संशोधन नहीं किया गया है।
इस देश में लोकतंत्र है, जो दिनप्रतिदिन मजबूती की और अग्रसर है। यहाँ किसी भी पार्टी पर यह आरोप तो लगभग नहीं लगाया जा सकता की वह देश के विनाश की सोच रखती है, लेकिन विकास के लिए क्या और कैसे करना चाहिए इस चिंतन में भिन्नता अवश्य है।
कभी-कभी तो ऐसा लगता है कहीं देश के विकास के लिए जद्दोजहद करने वाली पार्टियां ही इस देश के विनाश का कारण न बन जाएँ। सभी पार्टियों के कार्यकर्ताओं को कहीं भी यह लगता हो की घर के दीपक से ही घर में आग लगाने की सम्भावना है, तो उस दीपक को मंद करने में कभी संकोच न करें। 1948 में जब आरएसएस पर प्रतिबन्ध लगा और संघ प्रमुख को लगा की स्वयंसेवक क्रोध में आकर गृहयुद्ध में उलझ सकते हैं, तो उन्होंने संघ को विसर्जित कर दिया।
उनका तर्क था की संघ देश के लिए है न की देश संघ के लिए। मोदी उसी सोच की उपज है। उन पर देश भरोसा कर सकता है। इण्डिया टीवी ने रजत शर्मा और आपकी अदालत के माध्यम से मोदी के विचारों को जनता तक पहुँचाया उसके लिए देश की जनता उनका तहे दिल से आभार प्रगट करती है।
रही बात गुजरात दंगों की तो माफ़ी उन लोगों को मांगनी चाहिए जो लोग इन दंगों का कारण बने। और अब भी दंगों की साजिश रच रहे हैं। देश की जनता उन्हें कभी माफ़ नहीं करेगी। वे सोच रहे हैं की वोट बैंक की राजनीती कर वे अपने इरादों में कामयाब होजाएंगे। लेकिन भारत की जनता अब उन्हें समझ चुकी है। दंगों के कारन बने लोगों को माफ़ी नहीं सजा मिलेगी।
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