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अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली रामनवमी, जानें कैसी है देश-दुनिया में तैयारी

Ram Navami: अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहली रामनवमी है। अयोध्या के साथ-साथ देश भर में रामनवमी को लेकर हर्षोल्लास भरा माहौल है।

कब मनाई जाती है रामनवमी

भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम के जन्मदिन के रूप में रामनवमी मनाई जाती है। यह त्यौहार हिंदू कैलेंडर के चैत्र महीने में शुक्ल पक्ष के नौवें दिन पड़ता है। रामनवमी पर भगवान राम की पूजा के साथ सूर्य देव की भी पूजा की जाती है क्योंकि भगवान राम, सूर्य के वंशज थे। राम नवमी को वसंत त्योहार के अंत के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है और इसे पाँच सबसे महत्वपूर्ण हिंदू त्यौहारों में से एक माना जाता है।

Ram Navami 2024

प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में पहली रामनवमी की तैयारी कैसी?

अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार रामनवमी का आयोजन हो रहा है। आयोजन की भव्यता को मद्देनज़र रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन ने अयोध्या में कड़ी सुरक्षा और व्यवस्था की है।

आपको बता दें कि इस वर्ष रामनवमी पर लगभग 25 लाख भक्तों के अयोध्या पहुंचने की उम्मीद है। शहर को 7 जोन और 39 सेक्टर में बांटा गया है। आयोजन को शांतिपूर्वक और बिना किसी रुकावट निपटाने के लिए 11 एसीपी, 26 डीएसपी, 150 इंस्पेक्टर, 400 एसआई, 25 महिला इंस्पेक्टर, 1,305 कांस्टेबल, 270 महिला कांस्टेबल तैनात रहेंगे।

राम मंदिर में भक्तों के अच्छे दर्शन अनुभव के लिए राम पथ पर 15 ड्रॉप-डाउन बैरियर्स और 13 होल्डिंग एरिया तैयार किए गए हैं। इसी के साथ राम मंदिर और आसपास के क्षेत्र में 111 सीसीटीवी कैमरों की मदद से निरंतर निगरानी की जायेगी।

रामलला का होगा सूर्य तिलक

अयोध्या के राम मंदिर में 17 अप्रैल को मनाया जाने वाला रामनवमी उत्सव बहुत खास है और इस अवसर को खास बनाने के लिए रामलला का 'सूर्य तिलक' किया जाएगा। इस वर्ष, मंदिर में आने वाले भक्तों को रामलला का 'सूर्य तिलक' देखने का अनूठा अवसर प्राप्त होगा, जहाँ सूर्य की किरणें राम लला की नई मूर्ति के माथे पर सुशोभित होगी, जिससे एक दिव्य दृश्य देखने को मिलेगा।

यह दृश्य रामनवमी के दिन दोपहर 12:00 बजे देखने को मिलेगा जो लगभग 5 मिनट तक जारी रहेगा। सूर्य तिलक का ट्रायल भी 12 अप्रैल को सफल हो चुका है। सूर्य तिलक के लिए आईआईटी रुड़की सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) ने एक खास ऑप्टोमैकेनिकल सिस्टम तैयार किया है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में कैसे मनाई जाती है रामनवमी

देश के अलग-अलग हिस्सों में रामनवमी कई अलग-अलग अंदाज में मनाई जाती है। जैसे, सबसे पहले बात करते हैं तेलंगाना के भद्राचलम की, वहां पर रामनवमी बहुत उत्साह और हर्ष के साथ मनाई जाती है, जिसमें सीता रामचंद्रस्वामी मंदिर आकर्षण का केंद्र होता है।

वहीं तमिलनाडु के रामेश्वरम में लोग श्री राम और भगवान शिव से आशीर्वाद लेने के लिए 'जय श्री राम' का नारा लगाते हुए रामनाथस्वामी मंदिर जाते हैं। यह मंदिर हिंदू धर्म ग्रंथों में अपने महत्व के लिए जाना जाता है, क्योंकि यह वह स्थल है जहां भगवान राम ने लंका (वर्तमान श्रीलंका) जाने से पहले रामनाथस्वामी (शिव) के लिंगम की स्थापना की थी।

बिहार के सीतामढ़ी में यह त्यौहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, क्योंकि यह देवी सीता का जन्म स्थान है। सीतामढ़ी के जानकी मंदिर में रामनवमी का उत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है और बहुत बड़ी संख्या में लोग इस उत्सव का हिस्सा बनने के लिए वहां पहुंचते हैं।

दूसरी तरफ, कर्नाटक में यह त्यौहार भगवान राम और सीता के विवाह की रस्म के साथ मनाया जाता है, जिसे 'कल्याणम' के नाम से जाना जाता है और मूर्तियों के साथ जुलूस निकाला जाता है, जिसे देखने के लिए हजारों लोग इकट्ठे होते हैं। कर्नाटक में रामनवमी पर मंदिरों में प्रसाद के रूप में गुड और पानी को मिलाकर बांटा जाता है।

बता दें कि ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल जैसे दक्षिण-पूर्वी राज्यों में जगन्नाथ मंदिर और क्षेत्रीय वैष्णव समाज रामनवमी मनाते हैं और इस गर्मियों में उनकी वार्षिक जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारी शुरू करने वाला दिन मानते हैं।

विदेशों में रामनवमी का आयोजन

रामनवमी दुनिया भर में बहुत उत्साह और भक्ति के साथ मनाई जाती है। नेपाल में रामनवमी के दिन अवकाश होता है और कुछ शहरों में परेड और जुलूस भी होते हैं। बांग्लादेश में राम नवमी को रामसरत के रूप में जाना जाता है और बैशाख महीने के पहले दिन मनाया जाता है।

श्रीलंका में राम नवमी को वैकुंडा एकादशी के रूप में मनाया जाता है और यह दस दिवसीय उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। मॉरीशस में राम नवमी बहुत उत्साह के साथ मनाई जाती है, और यह त्यौहार सार्वजनिक अवकाश होता है। मंदिरों को सजाया जाता है और विशेष पूजा की जाती है। अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, त्रिनिदाद और टोबैगो, गुयाना, सूरीनाम, जमैका, फिजी और मलेशिया जैसे देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासी भी राम नवमी को बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं।

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