Rahul Gandhi Bungalow: जब राहुल की दादी इंदिरा गांधी को भी छोड़ना पड़ा ‘सरकारी बंगला’

लोकसभा की सदस्यता चली जाने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सरकारी बंगला खाली करने का आदेश मिला है। इससे पहले आपातकाल के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी अपना ‘बंगला’ छोड़ना पड़ा था।

Rahul Gandhi To Vacate MP Bungalow congress history Indira Gandhi also had to leave the bungalow

Rahul Gandhi Bungalow: कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अब सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस मिला है। दरअसल बीते 24 मार्च 2023 को संसद सदस्यता जाने के बाद लोकसभा की हाउस कमेटी ने यह नोटिस जारी किया है। राहुल गांधी 12 तुगलक लेन स्थित सरकारी बंगले में रहते हैं। राहुल गांधी को 22 अप्रैल तक अपना सरकारी आवास खाली करना होगा।

यहां आपको बता दें कि राहुल गांधी की तरह एक बार उनकी दादी और देश-दुनिया में 'आयरन लेडी' के नाम से मशहूर पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी अपना विशाल सरकारी बंगला छोड़, अपेक्षाकृत एक छोटे बंगले में शिफ्ट होना पड़ा था। यह बात तब की है जब वह आपातकाल के बाद लोकसभा चुनाव हार गई थीं। तब उन्हें 1, सफदरजंग रोड का विशाल सरकारी आवास छोड़कर 12 विलिंगडन क्रिसेंट (अब मदर टेरेसा मार्ग) स्थित बंगले में शिफ्ट होना पड़ा था।

जब इंदिरा गांधी ने की आपातकाल की घोषणा

यह किस्सा शुरू होता है साल 1971 से, जब इंदिरा गांधी अपनी रायबरेली सीट से विजयी घोषित की गईं। तब उनके सामने चुनाव लडे राजनारायण चुनावी प्रक्रिया से संतुष्‍ट नहीं थे। उन्‍होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में इंदिरा के खिलाफ याचिका लगा दी। तकरीबन चार साल बाद 12 जून 1975 को जस्टिस सिन्हा ने भ्रष्ट आचरण के दो मानदंडों पर इंदिरा गांधी को दोषी ठहराया। इसके बाद 1, सफदरजंग रोड (तत्‍कालीन पीएम आवास) पर इंदिरा के करीबियों की भीड़ जुटने लगी।

इसके बाद 25 जून 1975 को इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर दी। विपक्ष के सभी बड़े नेता जेल में डाल दिए गए। प्रेस की स्‍वतंत्रता खत्‍म करके सेंसरशिप लागू कर दी गई। इसके दो साल बाद जोरदार जन आक्रोश और अंतरराष्ट्रीय दबाव में आपातकाल हटा और मार्च, 1977 में देश में लोकसभा के चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस की बुरी तरह से हार हुई और पहली बार मोरारजी देसाई की अगुवाई में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।

जब इंदिरा गांधी को किया गया गिरफ्तार

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर अपनी किताब 'जीवन जैसा जिया' में लिखते हैं कि आपातकाल में इंदिरा गांधी द्वारा किए गए अत्याचार को लेकर जनता पार्टी के कई सीनियर नेता इंदिरा गांधी को जेल में डालना चाहते थे। मैं इस राय से सहमत नहीं था, क्योंकि मेरा मानना था कि चुनाव में हार जाना ही सबसे बड़ी सजा है। लेकिन कई लोग सरकार में इस राय के खिलाफ थे। खुद प्रधानमंत्री, गृहमंत्री वगैरह। एक दिन मुझे पत्रकारों से मालूम चला कि सरकार जीप स्कैम मामले में उन्हें जेल में डाल सकती है।

मैंने सीधा मोरारजी भाई के घर जाकर उनसे पूछा कि क्या गृहमंत्री इंदिरा जी को जेल भेजने की तैयारी कर रहे हैं? प्रधानमंत्री ने इससे साफ इंकार कर दिया। इसके बाद मैं मुंबई चला गया। तब मालूम चला कि 3 अक्टूबर 1977 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद मैं तुरंत दिल्ली पहुंचा और सीधा मोरारजी भाई के पास गया। उनसे पूछा कि यह कैसे हो गया? तब उन्होंने कहा कि फैसला गृहमंत्री जी (चौधरी चरण सिंह) का है, पर मैंने फाइल देख ली है। मैं उनकी बात सुनकर हैरान रह गया। हालांकि, दूसरे दिन मजिस्ट्रेट ने बिना जमानत लिए इंदिरा जी को रिहा कर दिया।

जब घर देने से प्रधानमंत्री ने किया इंकार

अपनी किताब में चंद्रशेखर लिखते हैं कि चुनाव नतीजे आने के बाद मैं एक बार इंदिरा गांधी से मिलने गया। यह बात लोकसभा चुनाव के तत्काल बाद की है। उन दिनों इंदिरा जी सफदरजंग की अपनी सरकारी कोठी में ही थीं। बात करते हुए मैंने महसूस किया कि इंदिरा गांधी बेहद परेशान हैं। उनको अपनी और परिवार की चिंता सता रही है। कहने लगीं कि बहुत परेशानी है, लोग आकर बताते हैं कि संजय गांधी को जलील किया जाएगा। दिल्ली में घुमाया जाएगा। मुझे मकान नहीं मिलेगा। हमारी सुरक्षा खत्म कर दी जाएगी।

इंदिरा गांधी की बात सुनकर मुझे हैरानी हुई। मैं सीधे वहां से मोरारजी भाई के पास गया। मैंने उनसे पूछा कि क्या आप इंदिरा जी को मकान नहीं देंगे? मोरारजी भाई ने कहा कि नहीं देंगे क्योंकि नियम में नहीं आता। मैंने उन्हें बताया कि जाकिर हुसैन, लाल बहादुर शास्त्री, ललित नारायण मिश्र के परिवार को मकान मिला हुआ है? मोरारजी भाई ने कहा कि मैं उनका भी कैंसिल कर दूंगा। मैंने उनसे कहा कि जिस परिवार ने स्वराज भवन और आनंद भवन देश को दे दिया, जो महिला 11 साल प्रधानमंत्री रहीं, उनको रहने के लिए आप मकान तक नहीं देंगे? इसके बाद मोरारजी भाई से मेरी बड़ी बहस हुई। अंत में वह माने, यह कहते हुए कि जब आप कहते हैं तो मकान दे दूंगा।

ऐसे इंदिरा परिवार संग पहुंची '12, विलिंग्डन क्रिसेंट'

वैसे मकान खाली करने को लेकर इंदिरा गांधी काफी परेशान थीं। इस मामले पर राशिद किदवई अपनी किताब 24 अकबर रोड में लिखते हैं कि आपातकाल के बाद का समय इंदिरा गांधी के लिए परीक्षा साबित हो रहा था। न केवल वह अपनी सारी पावर गंवा चुकी थी बल्कि पद जाने के साथ ही उनका सरकारी आवास भी हाथ से निकल गया था। उनका महरौली स्थित फार्म हाउस भी अभी अधबना ही था और बहुत तेजी के साथ उनके दोस्त भी साथ छोड़ रहे थे, जिनमें विश्वसनीय दोस्त भी शामिल थे। जब इंदिरा गांधी की दिक्कतें और बढ़ीं तो उनके पुराने वफादार मोहम्मद युनूस ने अपना 12 विलिंगडन क्रीसेंट सरकारी आवास उनके परिवार को रहने के लिए दिया और खुद दक्षिण दिल्ली स्थित अपने निजी आवास में चले गये। इस तरह 12 विलिंगडन क्रीसेंट गांधी परिवार का नया ठिकाना बना।

इंदिरा गांधी वहां राजीव गांधी, सोनिया गांधी, बच्चे राहुल और प्रियंका, संजय गांधी, मेनका गांधी और पांच पालतू कुत्तों के साथ आईं लेकिन इस घर में इतनी जगह नहीं थी कि यहां से किसी तरह की राजनीतिक गतिविधियां चलाई जा सकें। इसलिए 24 अकबर रोड को कांग्रेस का नया हेडक्वॉर्टर बनाया गया जो कि अगले चार दशक बहुत भाग्यशाली साबित हुआ। इस भवन का एक फायदा यह भी था कि इसका एक दरवाजा 10 जनपथ को जोड़ता था, जो उस समय यूथ कांग्रेस का दफ्तर हुआ करता था। कई वर्षों से 10, जनपथ सोनिया गांधी को मिला हुआ बंगला है। यह बंगला प्रधानमंत्री आवास से भी बड़ा है।

कौन थे मोहम्मद युनुस?

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    मोहम्मद युनुस खान, इंदिरा गांधी के काफी करीबी माने जाते थे। यूनुस साल 1974 में वाणिज्य मंत्रालय के सचिव के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। उसके बाद 1975 में उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के विशेष दूत के रूप में नियुक्त किया गया था। वहीं 1975 से 1977 यानि आपातकाल के दौरान , यूनुस खान, इंदिरा गांधी के सबसे भरोसेमंद सलाहकारों में से एक थे। तब मोहम्मद युनुस इसी सरकारी बंगले 12 विलिंगडन क्रिसेंट में रहते थे।

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