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Indira Gandhi Killers: 6 जनवरी 1989 को इंदिरा गाँधी के हत्यारों सतवंत सिंह और केहर सिंह को फांसी दी गयी

आज ही के दिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के हत्यारों सतवंत सिंह और केहर सिंह को फांसी पर लटकाया गया था।

prime minister Indira Gandhi Killers hanged on 6 january 1989 history

Indira Gandhi Killers: 6 जनवरी 1989 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के आरोप में सतवंत सिंह (27 वर्ष) और केहर सिंह (54 वर्ष) को दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में फांसी पर लटकाया गया था। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उन्हीं के दो अंगरक्षकों बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने 31 अक्टूबर 1984 को ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। बेअंत सिंह को घटनास्थल पर ही दूसरे सुरक्षाकर्मियों ने मार गिराया था।

इस हत्या की साजिश रचने के आरोप में केहर सिंह और बलबीर सिंह पर भी मुकदमा चलाया गया। हालांकि, सबूतों के अभाव में बलबीर सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने रिहा कर दिया। जबकि अदालत ने पीएम इंदिरा गांधी पर गोलियां चलाने वाले सतवंत सिंह और उनकी हत्या की साजिश रचने वाले केहर सिंह को मौत की सजा सुनाई।

हत्यारों को मिली मौत की सजा

पीएम इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद, दिल्ली पुलिस और जांच एजेंसियां दोषियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा दिलाने में जुट गयी। बेअंत सिंह को तो मौके पर ही मार गिराया गया था और सतवंत सिंह को जीवित पकड़ लिया गया था। अगले तीन दिनों में प्रधानमंत्री हत्या के अन्य साजिशकर्ताओं - केहर सिंह और बलबीर सिंह को भी पकड़ लिया गया। इसके बाद सतवंत सिंह, केहर सिंह और बलबीर सिंह पर निचली अदालत में मुकदमा चलाया गया। निचली अदालत ने तीनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई।

कुछ दिनों बाद इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत की सजा को बरकरार रखा। इसके बाद, यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो कोर्ट में बचाव पक्ष की ओर से राम जेठमलानी, पी.एन. लेखी और जस्टिस आर.एस. सोढ़ी जैसे बड़े वकील पेश हुए। सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बलवीर सिंह को रिहा कर दिया। बाकी दो अभियुक्तों सतवंत सिंह और केहर सिंह की मौत की सजा को बरकरार रखा।

इन वकीलों के कानूनी दांवपेच के चलते कई बार फांसी को टाला भी गया। एक बार तो वकीलों की दलील पर दिसंबर 1988 में ब्लैक वारंट तक टाल दिया गया। कहा जाता है कि स्वतंत्र भारत के न्यायिक इतिहास में पहली बार यह ब्लैक वारंट टाला गया था। अंततः 6 जनवरी 1989 को सुबह छह बजे सतवंत सिंह और केहर सिंह को फांसी दे दी गयी। फांसी के बाद सतवंत सिंह और केहर सिंह के शव उनके परिजनों को नहीं सौंपे गये, बल्कि जेल प्रशासन ने ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया।

कोई मलाल नहीं था हत्यारों को

इंडिया टुडे में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, एम्स के फॉरेंसिक डिपार्टमेंट में रहे डॉ. टी.डी. डोगरा ने 2010 में एक किस्सा मीडिया से साझा करते हुए कहा, "मुझे दो अन्य विशेषज्ञों के साथ इंदिरा गांधी के शव का पोस्टमार्टम करने के लिए कहा गया। फॉरेंसिक डिपार्टमेंट से जुड़े रहने के कारण मैं मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाह के तौर पर अदालत में पेश हुआ। जब मैं कोर्ट परिसर के शौचालय में गया, तो वहां मेरी मुलाकात सतवंत सिंह से हुई। सतवंत ने व्यंग्य करते हुए मुझसे पूछा, 'माफ करो डॉक्टर साहब! मेरी वजह से आपको तकलीफ हो रही है। ये बताओ कि इंदिरा गांधी को कितनी गोलियां लगी थी?' इस पर मैंने सतवंत को कोई जवाब नहीं दिया।"

पीएम इंदिरा गांधी की हत्या की साजिश के पीछे की कहानी

पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट के अनुसार, सितंबर 1984 के एक दिन बलबीर सिंह प्रधानमंत्री आवास पर तैनात था। दोपहर लगभग डेढ़ बजे उसे एक बाज दिखाई दिया, जो उड़ता हुआ सीधे प्रधानमंत्री आवास में एक पेड़ पर जाकर बैठ गया। बलवीर ने जैसे ही बाज को देखा, उसने बेअंत को बुलाया और बाज की तरफ इशारा किया। दरअसल, बाज का संबंध श्री गुरु गोविंद सिंह से है। बस इस एक सामान्य घटना को दोनों ने धार्मिक कट्टरपन से जोड़ लिया। कहा जाता है कि इस घटना से दोनों को लगा कि बाज गुरु का संदेश लेकर आया है।

पूछताछ के दौरान सतवंत सिंह ने पुलिस को बताया कि 17 अक्टूबर को जब बेअंत अपनी पगड़ी बांध रहा था, तभी उसने सतवंत से कहा कि पंजाब में जो कुछ हो रहा है, उससे सिख बहुत गुस्से में हैं और इसकी जिम्मेदार इंदिरा गांधी है। इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी। सतवंत ने बेअंत सिंह से सहमति प्रकट की और इसके बाद सतवंत, बेअंत और केहर सिंह इंदिरा गांधी की हत्या का प्लान बनाने लगे।

सतवंत और बेअंत की ड्यूटी उन दिनों रात में होती थी। इसलिये इन दोनों ने एक बहाना बनाकर अपनी ड्यूटी को सुबह में बदलवा लिया। 31 अक्टूबर की सुबह 9 बजे इंदिरा गांधी जब अपने आवास से निकली, तो गेट पर उनके अंगरक्षक बेअंत सिंह और सतवंत सिंह स्टेनगन लेकर खड़े थे। जैसे ही इंदिरा गांधी बेअंत के करीब आईं बेअंत ने रिवाल्वर इंदिरा गांधी पर तान दी। इंदिरा गांधी बोलीं कि तुम क्या कर रहे हो? इसी बीच बेअंत सिंह ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी और गोली इंदिरा के पेट में लगी। इसके बाद, बेअंत ने चार और गोलियां इंदिरा पर दाग दी। तभी बेअंत ने चिल्लाते हुए सतवंत से कहा कि गोली चलाओ। यह सुनते ही सतवंत ने इंदिरा गांधी पर अपनी स्टेनगन से लगातार 25 गोलियां चला दी। बुरी तरह घायल हो चुकी इंदिरा गांधी को तुरंत एम्स में दाखिल कराया गया, मगर तब तक उनका निधन हो गया।

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    इसी दौरान आईटीबीपी के जवान घटनास्थल पर पहुंच गये थे। उन्होंने बेअंत और सतवंत को अपनी हिरासत में ले लिया। इस बीच बेअंत वहां से भागने लगा तो सुरक्षाकर्मियों ने बेअंत को गोली मारकर वहीं ढेर कर दिया।

    यह भी पढ़ें: क्या इंदिरा गांधी ने भी नेशनल हेराल्ड चलाने के लिए किया था सत्ता का दुरुपयोग?

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