भारत-नेपाल बॉर्डर से जुड़ी निगेटिव-पॉजिटिव बातें
[अजय मोहन] उत्तराखंड के टनकपुर के पास सिद्ध पीठ मां पूर्णागिरी के दरबार में लाखों लोग हर साल दर्शन के लिये जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि पड़ोसी देश नेपाल में स्थित सिद्ध बाबा के मंदिर जाये बगैर मां पूर्णागिरि के दर्शन अधूरे हैं। टनकपुर से नेपाल तक पैदल जा सकते हैं, थक गये हैं तो रिक्शा कर लीजिये। लेकिन बहुत कम लोग ही जानते हैं कि तीर्थ यात्रा की आड़ में स्मगलिंग भी होती है।

अफसोसनाक यह है कि दिल्ली में बैठी सरकार को शायद इस बात की गहराई का अंदाजा नहीं है। शायद यही कारण है कि नेपाल-बॉर्डर पर सख्ती करने के जो सुझाव शोधकर्ताओं ने केंद्र सरकार को 2014 में दिये थे, उन पर अब तक अमल नहीं हो पाया है।
ये सुझाव लखनऊ के गिरि इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज ने एक विस्तृत रिपोर्ट के साथ दिये थे। सुरक्षा के मद्देनजर दा रिपोर्ट को गोपनीय रखा गया है। हां उसके अंत में दिये गये कुछ सुझाव जरूर हम आपके साथ शेयर कर सकते हैं। जो इस प्रकार हैं-
- भारत-नेपाल बॉर्डर की लंबाई 1590 किलोमीटर है, जिसमें से 845 किलोमीटर बॉर्डर सिर्फ उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड से लगा हुआ है।
- भारत-नेपाल बॉर्डर कुल 24 जगहों पर व्यापार के लिये खुला है।
- बॉर्डर 15 जगहों पर आम लोगों के आवा-गमन के लिये खुला है।
- इन रास्तों से व्याक स्तर पर स्मगलिंग यानि तस्करी होती है।
- बॉर्डर के रास्ते ही माओवादियों को मजबूती प्रदान करने के उपकरण सप्लाई किये जाते हैं।
- भारत में नक्सलवाद को बढ़ावा मिलने का बड़ा कारण नेपाल बॉडर पर सख्ती नहीं होना है।
- आतंकवादी भारत में घुसने का इसे सबसे आसान रास्ता मानते हैं।
- नेपाल बिना सूचना के भारी मात्रा में पानी छोड़ देता है, इस वजह से बहराइच, लखीमपुर खीरी, फैजाबाद, श्रावस्ती, आदि जिलों में हर साल बाढ़ आती है।
- भारत-नेपाल बॉर्डर पर सख्ती बढ़ाने के लिये जल्द से जल्द कूटनीतिक हल निकालना चाहिये।
नेपाल के सहयोग से किस-किस क्षेत्र को बनाया जा सकता है बेहतर
- उत्तर प्रदेश के पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है, क्योंकि यहां हिंदू व बौद्ध धार्मिक स्थल बहुत ज्यादा संख्या में हैं।
- मेक इन इंडिया के तहत नेपाल की मैन-पावर का सदोपयोग किया जा सकता है।
- बॉर्डर से लगे क्षेत्रों का विकास कर, बड़ा निवेश प्राप्त किया जा सकता है।
- अगर दोनों देशों के बीच अच्छी इंटर-लिंकिंग स्थापित की जाये, तो उधर नेपाल और इधर उत्तर प्रदेश को नई आर्थिक मजबूती मिल सकती है।
- नदियों के पानी को छोड़ने को लेकर अगर नेपाल से बात की जाये, तो यूपी में हर साल करोड़ों रुपए की फसलों की बर्बादी रोकी जा सकती है।
- बॉर्डर पर अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है, ताकि जो भी व्यापार हो रहा है, उसकी निगरानी रखी जा सके।
- ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी खराब होने की वजह से व्यापार में खालल होती है। इसे दुरुस्त किया जाना चाहिये।
हम आपकाके बता दें कि केंद्र सरकार को विस्तृत रिपोर्ट गिरि विकास अध्ययन संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर सी सेनापति और एसोसिएट प्रोफेसर नागेंद्र के मौर्य ने तैयार की थी।












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