Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

बढ़ रही है AYUSH स्वास्थ्य प्रणाली की लोकप्रियता, भारत के मुख्य न्यायाधीश ने भी की प्रशंसा

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने आयुष प्रणाली के महत्त्व पर प्रकाश डालकर फिर से इसे चर्चा में ला दिया है। उन्होंने न्यायाधीशों, उनके परिवारों और अदालत के कर्मचारियों के अच्छे स्वास्थ्य के महत्व पर जोर देते हुए सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयुष समग्र कल्याण केंद्र का उद्घाटन किया।

AYUSH

उन्होंने कोविड-19 के साथ अपनी लड़ाई के दौरान आयुष के साथ अपना सकारात्मक अनुभव बयां किया, जिसमें उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपचार के लिए आयुर्वेद के वैद्य से परामर्श करने का सुझाव दिया था।

क्या है AYUSH?

AYUSH का मतलब है आयुर्वेद, योग, यूनानी, नेचुरोपैथी, सिद्धा और होम्योपैथी। यह स्वास्थ्य देखभाल और उपचार की पारंपरिक प्रणालियों का एक समूह है। इन सभी विधियों की जड़ें बहुत प्राचीन समय से देश-दुनिया में बैठी हुई हैं, और मनुष्यों द्वारा खुद को स्वस्थ रखने के लिए इन सभी प्रणालियों का इस्तेमाल बहुत लंबे समय से होता आ रहा है।

आयुर्वेद, उनमें से सबसे पुराना है और शरीर के अलग-अलग हिस्सों को संतुलित करने पर केंद्रित है। योग शारीरिक मुद्राओं और स्वास्थ्य नियंत्रण को जोड़ता है; नेचुरोपैथी प्राकृतिक तत्वों की मदद से स्वस्थ रहने में मदद करती है। यूनानी और सिद्ध ग्रीक, अरबी और द्रविड़ परंपराओं से आते हैं, जबकि होम्योपैथी 'लाइक क्योर लाइक' के सिद्धांत का पालन करती है।

आयुष के लिए देश में अलग मंत्रालय

आयुष मंत्रालय देश में आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, सहित पारंपरिक चिकित्सा विधियों पर नियंत्रण रखने और बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार है। मोदी सरकार द्वारा नवंबर 2014 में बनाए गए इस मंत्रालय का लक्ष्य पारंपरिक भारतीय चिकित्सा विधियों को पुनर्जीवित करना है और उनके विकास और प्रसार को सुनिश्चित करना है। 2014 के पहले 'आयुष मंत्रालय' नाम का कोई मंत्रालय नहीं था, हालांकि, पहले भारतीय चिकित्सा पद्धति और होम्योपैथी विभाग था, जिसे 1995 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत शुरू किया गया था। आयुष मंत्रालय, आयुष सुविधाओं को बेहतर से बेहतर करने और आयुष दवाओं और चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच में सुधार करने के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) जैसी कई परियोजनाएं भी चला रहा है।

आयुष को बढ़ावा देने के लिए क्या कर रही सरकार

आयुष को बढ़ावा देने की सरकार की नीतियों में 'नेशनल पॉलिसी ऑन आयुष' शामिल है। सरकार की इस पॉलिसी का मकसद अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देना, स्वास्थ्य सेवा में विस्तार करना, सस्ती आयुष सेवाएं सुनिश्चित कराना और आयुष के रिसर्च और डेवलपमेंट में मदद करना है।

भारत सरकार के राष्ट्रीय पोर्टल ने अपने एक प्रेस नोट में बताया कि सरकार ने सुरक्षित और अच्छी क्वालिटी की आयुष दवाएं सुनिश्चित करने के लिए, अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए 'आयुष मार्क' जैसी सुविधाओं की शुरुआत की है। इसके अलावा, भारत सरकार द्वारा औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास के लिए 'सेंट्रल सेक्टर स्कीम' जैसी योजनाएं चलाई जा रही है, और इस योजना का मकसद औषधीय पौधों के संरक्षण के साथ-साथ रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी ध्यान देना है।

आयुष के लिए अलग पढ़ाई भी

आयुष के चिकित्सकों के लिए पढ़ाई से संबंधित कई प्रोग्राम और ट्रेनिंग भी उपलब्ध है। आयुष मंत्रालय की 'आयुर्ज्ञान योजना' है, जो शिक्षा, ट्रेनिंग, कैपेसिटी बिल्डिंग, आदि प्रदान कर के आयुष में रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन में मदद करती है।
इस योजना में आयुष क्षेत्र में कैपेसिटी बिल्डिंग और 'कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन' (CME) सहित कई चीज़ें शामिल है, जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर आयुष स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ाना और विकसित करना है। CME योजना में अधिकतम संख्या में आयुष शिक्षक, डॉक्टर, पैरामेडिकल और अन्य कर्मचारी है। आयुष मंत्रालय के पास आयुष शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग योजनाएं भी है, जिन्हें अब आयुर्ज्ञान योजना के तहत मिलाने का प्रस्ताव है।

कोरोना वायरस के इलाज में आयुष ने निभाई अहम भूमिका

कोरोना वायरस महामारी के दौरान आयुष ने एक बहुत ही अहम भूमिका निभाई और आयुष की इस भूमिका को पूरी दुनिया ने सराहा। कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत में आयुष मंत्रालय ने आयुष विशेषज्ञों के एक सलाहकार पैनल के आधार पर सलाह जारी की, जिसमें इम्युनिटी बढ़ाने के लिए कुछ जड़ी-बूटियां और उपायों के उपयोग की सिफारिश की गई थी।

इसमें पारंपरिक जड़ी-बूटियां, दवाईयां और उपाय, जो सालों से बुखार, खांसी, कमज़ोरी जैसी बीमारियों के लिए उपयोग में आती रही हैं और इम्यूनिटी को बढ़ाती हैं, को लेने की सलाह दी गई। इन पारंपरिक जड़ी-बूटियों, दवाईयों और उपायों में, कुछ की वैज्ञानिक जांच भी की गई, और उन दवाईयों में आयुष 64, च्यवनप्राश, गुडुची घनवटी, आर्सेनिका एल्बम, काबासुर कुडिनीर, निलावेम्बु, जैसी दवाईयां, जड़ी-बूटियां शामिल थी।

आयुष से संबंधित कुछ आंकड़े

देश भर में आयुष विधियों का इस्तेमाल दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है और देशवासी आयुष पर पूर्ण रूप से भरोसा जता रहे हैं। आयुष क्षेत्र में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है। 2020 में इसका बाजार 18 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया और 2021 में 20.6 बिलियन डॉलर और 2022 में 30.3 बिलियन डॉलर पहुंचा।

2014 से 2020 के बीच इस क्षेत्र में 17% वार्षिक वृद्धि हुई है। आयुष मंत्रालय ने पारंपरिक भारतीय चिकित्सा विधियों को बढ़ावा देने के लिए आयुष संजीवनी ऐप, नमस्ते योग ऐप और आयुष GIS जैसे ऐप भी लॉन्च किए हैं। इसके अलावा, आयुष मंत्रालय ने लाइसेंसिंग के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू किए हैं और आयुष विधियों का स्टैंडर्ड बढ़ाने के लिए कई कॉन्ट्रैक्ट भी किए हैं। आयुष क्षेत्र से लगभग 30 लाख रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है और आयुष उत्पादों के निर्यात में भी वृद्धि हुई है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+