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Political Funding: कैसे और कहां से मिलता है राजनैतिक दलों को चंदा, चुनाव आयोग के इस कदम से आयेगी पारदर्शिता

Political Funding: चुनाव आयोग एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने जा रहा है। जिसमें देश के सभी पंजीकृत राजनैतिक दलों को अपना वित्तीय लेखा-जोखा दर्ज करना होगा। इसमें दलों को मिला चंदा सहित चुनावी खर्च और वार्षिक ऑडिट एकाउंट का ब्योरा शामिल होगा। चुनाव आयोग के मुताबिक, जो राजनैतिक दल ऑनलाइन मोड में वित्तीय रिपोर्ट दाखिल नहीं करना चाहते वे लिखित में इसकी वजह बताएंगे।

चुनाव आयोग के इस कदम को पारदर्शिता लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि, अब इससे देश की जनता को जानकारी रहेगी कि किस पार्टी के पास कितना पैसा है और चुनावों में कितना खर्च हुआ?

Political parties Funding How and from where do political parties get donations

राजनैतिक दलों का चंदा

राजनैतिक दलों की कमाई का कोई एक स्रोत नहीं होता। आमतौर पर स्वैच्छिक दान, क्राउड फंडिंग, कूपन बेचकर, पार्टी साहित्य बेचकर, सदस्यता अभियान और कॉरपोरेट से इन्हें पैसा मिलता है। साल 2018 के बाद चुनावी फंडिंग की प्रक्रिया में कुछ अन्य बदलाव किये गये। जिसके मुताबिक राजनैतिक दल विदेशी चंदा भी ले सकते हैं। यही नहीं, कोई भी कंपनी कितनी भी रकम किसी भी राजनीतिक पार्टी को चंदे के रूप में दे सकती है। साथ ही कोई भी व्यक्ति या कंपनी गुप्त रूप से चुनावी बॉन्ड (इलेक्टोरल) के माध्यम से किसी पार्टी को चंदा दे सकती है।

भाजपा की कमाई सभी दलों से तीन गुना

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के मुताबिक साल 2021-22 में राजनैतिक दलों द्वारा वार्षिक दान रिपोर्ट चुनाव आयोग में जमा करने की तारीख 30 सितंबर 2022 थी। लेकिन बीएसपी, एनसीपी और नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) ने ही अपनी रिपोर्ट समय सीमा के अंतर्गत पेश की थी। जबकि कांग्रेस, भाजपा, टीएमसी, सीपीआई (एम), सीपीआई ने अपनी रिपोर्ट एक से दो महीनों की देरी से जमा की।

2021-22 में तत्कालीन सात राष्ट्रीय पार्टियों द्वारा दी गयी जानकारी के मुताबिक ₹780.774 करोड़ इन पार्टियों को 7141 दानदाताओं से मिला था। जिसमें भाजपा को सर्वाधिक ₹614.626 करोड़ का चंदा मिला। भाजपा को मिली यह राशि बाकी 6 राष्ट्रीय दलों (कांग्रेस, एनसीपी, सीपीआई (एम), सीपीआई, एनपीपी और टीएमसी) के कुल दान से तीन गुना से भी ज्यादा थी।

जबकि कांग्रेस को 1255 दानदाताओं से ₹95.459 करोड़ मिले। सीपीआई (एम) को ₹10.055 करोड़, एनसीपी को ₹57.905 करोड़, सीपीआई को ₹1.945 करोड़, एनपीपी को ₹0.354 करोड़, टीएमसी को ₹0.43 करोड़ मिले थे। जबकि बीएसपी ने पिछले 16 सालों की तरह वित्तीय वर्ष 2021-22 में भी रिपोर्ट जमा कर कहा कि उनकी पार्टी को ₹20,000 से अधिक का दान नहीं मिला है।

किस पार्टी की बढ़ी और घटी कमाई?

वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान राष्ट्रीय दलों का कुल दान 2020-21 की तुलना में ₹187.026 करोड़ (31.50%) अधिक थी। जिसमें भाजपा का दान सबसे ज्यादा बढ़ा है। 2021-21 में भाजपा ने ₹477.545 करोड़ की दानराशि घोषित की थी। जबकि 2021-22 में ₹614.626 करोड़ यानि 28.71% की बढ़ोतरी हुई है। जबकि एनपीपी के दान में 40% और सीपीआई (एम) के दाम में 22% की गिरावट आयी है।

राष्ट्रीय राजनैतिक दल 2020-21 (करोड़ में) 2021-22 (करोड़ में)
बीजेपी ₹477.545 ₹614.626
कांग्रेस ₹74.524 ₹95.459
एनसीपी ₹26.261 ₹57.905
सीपीआई (एम) ₹12.901 ₹10.055
सीपीआई ₹1.497 ₹1.945
टीएमसी ₹0.425 ₹0.43
एनपीपी ₹0.595 ₹0.354

कॉरपोरेट दान और व्यक्तिगत दाताओं का विवरण

साल 2021-22 के दौरान इन राष्ट्रीय दलों को ₹625.883 करोड़ (कुल दान का 80%) का दान 2551 कॉरपोरेट दानदाताओं से मिला था। जबकि ₹153.328 करोड़ का दान (कुल दान का 19.6%) 4506 व्यक्तिगत दानदाताओं से मिला।

● भाजपा को 2068 कॉरपोरेट दानदाताओं से ₹548.808 करोड़ और 2876 व्यक्तिगत दानदाताओं से ₹65.774 करोड़ का चंदा मिला।
● कांग्रेस को 170 कॉरपोरेट दानदाताओं से ₹54.567 करोड़ और 1085 व्यक्तिगत दान दाताओं से ₹40.892 करोड़ मिले।
● एनसीपी को कॉरपोरेट से ₹42.625 करोड़ और व्यक्तिगत दानदाताओं से ₹15.28 करोड़ दान में मिले थे।
● सीपीआई (एम) को कॉरपोरेट दानदाताओं से ₹3.128 करोड़ और व्यक्तिगत दानदाताओं से ₹6.811 करोड़ दान में मिले थे।
● सीपीआई को कॉरपोरेट दानदाताओं से ₹0.524 करोड़, जबकि व्यक्तिगत दानदाताओं से कुछ नहीं मिला।
● टीएमसी को कॉरपोरेट दानदाताओं से ₹0.180 करोड़, जबकि व्यक्तिगत दानदाताओं से ₹0.25 करोड़ मिले।
● एनपीपी को कॉरपोरेट से ₹0.187 करोड़ और व्यक्तिगत दानदाताओं से ₹0.167 करोड़ मिले थे।

इलेक्टोरल बॉन्ड से कमाई

2 जनवरी 2018 को मोदी सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को अधिसूचित किया था। इलेक्टोरल बॉन्ड फाइनेंस एक्ट 2017 के द्वारा लाये गये थे। यह बॉन्ड साल में चार बार एसबीआई बैंक द्वारा जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर में जारी किये जाते हैं।

हालांकि, इस बात का कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं होता कि प्रत्येक बॉन्ड को किसने खरीदा और उसे किसे दान दिया गया? दरअसल चंदा देने वाले किसी भी रकम (₹1,000, ₹10,000, ₹100,000 और ₹1 करोड़ की रेंज) का बॉन्ड खरीदकर, सियासी दलों को दे सकते हैं, और कोई भी पक्ष इस लेन-देन को सार्वजनिक करने के लिए बाध्य नहीं है। इसलिए इसे अज्ञात स्रोतों से कमाई भी कहते हैं।

चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक कोई भी शख्स ₹2,000 से ज्यादा का चंदा कैश में नहीं दे सकता। इसके लिए ₹2,000 से ज्यादा का चंदा डिमांड ड्राफ्ट, चेक या इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर और इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये ही दिया जा सकता हैं। पहले यह लिमिट ₹20,000 की थी और 2018 में एक फाइनेंस बिल के जरिये इसे ₹2 हजार कर दिया गया। इसके तहत कोई शख्स अगर ₹20 हजार से ज्यादा का चंदा देता था तो रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट (RPA) 1951 के तहत राजनैतिक दलों को दानकर्ताओं के नाम चुनाव आयोग को बताना होता था।

बॉन्ड के जरिये कमाई का लेखा-जोखा

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने अप्रैल 2023 में देश के कई राजनैतिक दलों के विगत पांच सालों की वार्षिक ऑडिट में अज्ञात स्रोतों से प्राप्त आय के बारे में जानकारी दी है। लेकिन, इसके स्त्रोत से संबंधित कोई जिक्र नहीं किया गया है। ऐसे अज्ञात स्रोतों में इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से मिला दान, कूपनों की बिक्री, राहत कोष, फुटकर आय, स्वैच्छिक चंदा और बैठकों तथा मोर्चों से होने वाली आय शामिल हैं।

आप

राजनैतिक दल 2017-18 (करोड़ में) 2018-19 (करोड़ में) 2019-20
(करोड़ में)
2020-21
(करोड़ में)
2021-22
(करोड़ में)
भाजपा ₹210 ₹1450.890 ₹2555 ₹22.385 ₹1033.70
कांग्रेस 5 ₹383.260 ₹317.861 ₹10.075 ₹236.100
टीएमसी 0 ₹97.280 ₹100.465 ₹42 ₹528.143
एनसीपी 0 ₹29.250 ₹20.500 0 ₹14
टीआरएस 0 ₹141.500 ₹89.153 0 ₹153
टीडीपी 0 ₹27.500 ₹81.600 0 ₹3.500
वाईएसआर-सी 0 ₹99.840 ₹74.350 ₹96.250 ₹60
बीजेडी 0 ₹213.500 ₹50.500 ₹67 ₹291
डीएमके 0 0 ₹45.500 ₹80 ₹306
शिवसेना 0 ₹60.400 ₹40.980 0 0
आप 0 0 ₹17.765 ₹5.950 ₹25.120

आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी ने 2021-22 में ऑडिट रिपोर्ट पेश की थी। उसमें पार्टी ने अन्य माध्यमों से ₹25.12 करोड़ के दान की घोषणा तो की है लेकिन अलग से इलेक्टोरल बॉन्ड से प्राप्त दानराशि के बारे में नहीं बताया है।

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