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Pakistan Blasphemy: पाकिस्तान में ईशनिंदा की आड़ में निर्दोषों पर जानलेवा हमले

Pakistan Blasphemy: पाकिस्तान में इस्लाम, कुरान या पैगंबर के अपमान के आरोप लगाकर किसी व्यक्ति पर उग्र भीड़ का हमला करना कोई नई बात नहीं है। ऐसा ही नजारा 25 फरवरी (रविवार) को लाहौर के अछरा बाजार इलाके में भी देखने को मिला। जहां सैंकड़ों लोगों की भीड़ ने एक महिला पर ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए घेर लिया।

आरोप था कि महिला ने जो कपड़े पहने हैं उन पर 'कुरान की आयतें लिखी हैं।' तब पंजाब पुलिस की एक महिला अधिकारी ने सूझबूझ दिखाते हुए उस महिला को भीड़ से सुरक्षित निकाल लिया और कपड़े की जांच की तो इस बात की पुष्टि हुई कि कपड़े पर मौजूद प्रिंट में कुरान की आयतें नहीं लिखी हैं। महिला ने जो ड्रेस पहनी थी उस पर अरबी अक्षरों में 'हलवा' शब्द प्रिंट था। अरबी भाषा में हलवा का अर्थ सुंदर और मीठा है।

Pakistan Blasphemy law: attacks on innocents in pakistan

हालांकि, ईशनिंदा के आरोप में पाकिस्तान में भीड़ द्वारा हमला करने, दहशत फैलाने या हत्या करने से संबंधित यह कोई पहला मामला नहीं है। आज आपको बताते हैं ईशनिंदा क्या है? ईशनिंदा के आरोप में पाकिस्तान में अब तक कितने लोग मारे गए? पाकिस्तान में ईशनिंदा से जुड़ी कुछ बड़ी घटनाएं जहां सरकार का भी बखूबी साथ मिला।

ईशनिंदा और उससे जुड़े कानून क्या हैं?

ईशनिंदा का मतलब किसी धर्म या मजहब की आस्था का मजाक बनाना। किसी धर्म प्रतीकों, चिह्नों, पवित्र वस्तुओं का अपमान करना, ईश्वर के सम्मान में कमी या पवित्र या अदृश्य मानी जाने वाली किसी चीज के प्रति अपमान करना ईशनिंदा माना जाता है।

इस्लामिक देशों का ईशनिंदा कानून कहता है कि पवित्र पैगम्बर हज़रत मुहम्मद के संबंध में कोई भी अपमानजनक टिप्पणी चाहे मौखिक, लिखित, विजुअली (दृश्य), किसी तरह का लांछन, अपमान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किया गया हो। उसके एवज में उस शख्स को सजा-ए-मौत या आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी। साथ ही कई तरह के जुर्माने भी लगाए जा सकते हैं।

पाकिस्तान ने ब्रिटिशकाल में ईशनिंदा के खिलाफ बने कानून को ही लागू किया गया था। 1970 के दशक तक ईशनिंदा कानून का बहुत कम उपयोग किया गया था। लेकिन, जब 1980 के दशक में जनरल मुहम्मद जिया उल-हक की सैन्य तानाशाही थी। तब उस दौरान राज्य को इस्लामीकरण करने के अभियान के हिस्से के रूप में इसे मजबूत किया गया।

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी इस कानून का समर्थन किया था और साल 2021 में मुस्लिम-बहुल देशों से इस्लाम के पैगंबर के अपमान को अपराध मानने के लिए पश्चिमी सरकारों की पैरवी करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया था।

कितना कठोर है ईशनिंदा कानून?

पाकिस्तान में ईशनिंदा करने पर सजा-ए-मौत का प्रावधान है। पाकिस्तान पर अक्सर आरोप लगते हैं कि वहां के अल्पसंख्यक हिंदू और ईसाइयों को टारगेट करके ईशनिंदा के तहत केस चलाए जाते हैं। कइयों को तो फांसी की भी सजा भी दी गई है। पाकिस्तान पीनल कोड की धारा 295-सी में पैगम्बर का अपमान करने पर आजीवन कारावास से लेकर मौत की सजा का प्रावधान है। जबकि धारा 295-बी के तहत, कुरान को अपमानित करने का दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।

पाकिस्तान में हिंदू और ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय हैं। जून, 2022 में सेंटर फॉर पीस एंड जस्टिस की रिपोर्ट के मुताबित पाकिस्तान में 22.10 लाख हिंदू और 18.73 लाख ईसाई रहते हैं। कई रिपोर्ट बताती हैं कि उन्हें ईशनिंदा कानून के तहत सबसे आसान तरीके से टारगेट किया जाता है।

अलज़जीरा में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में 1990 के बाद से अगस्त, 2023 तक ईशनिंदा के आरोपों के संबंध में कम से कम 85 लोगों की हत्या कर दी गई है। जबकि पाकिस्तान की मानवाधिकार कानूनी सहायता समूह राष्ट्रीय न्याय की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 20 सालों में 774 मुसलमानों और विभिन्न अल्पसंख्यक धार्मिक समूहों के 760 सदस्यों पर ईशनिंदा का आरोप लगाया जा चुका है।

पाकिस्तान में ईसाई संस्था नेशनल कमीशन फार जस्टिस एंड पीस ने भी 1987 से 2018 तक ईशनिंदा के खिलाफ दर्ज हुए मामलों का आंकड़े में बताया है कि 2018 तक देश में 776 मुस्लिमों, 505 अहमदिया, 229 ईसाइयों और 30 हिंदुओं पर ईशनिंदा कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इन देशों में भी है ईशनिंदा पर मौत की सजा

अमेरिका के रिसर्च एजेंसी 'प्यू रिसर्च' की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान एक ऐसा अकेला देश नहीं है, जहां ईशनिंदा का कानून है। दुनिया के 26 फीसदी देशों में धर्म के अपमान से जुड़े कानून है, जिनके तहत सजा का नियम है। इसमें 70 फीसदी देश मुस्लिम बहुल है। सऊदी अरब, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में ईशनिंदा के मामले में मौत की सजा का प्रावधान है। जबकि इंडोनेशिया, मिस्त्र, नाइजीरिया, मलेशिया, अफ्रीकी देश मॉरीटेनिया जैसे देशों में सजा का प्रवाधान है। वैसे डेकन रिलिजियस की एक रिपोर्ट बताती है कि दुनियाभर के इस्लामिक देशों में ईशनिंदा के आरोप में पिछले 20 साल में 12 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।

भारत में ईशनिंदा पर क्या कोई कानून है?

भारत की बात करें तो यहां इसके लिए कोई अलग से कानून नहीं है। क्योंकि, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19ए में अभिव्यक्ति की आजादी का मौलिक अधिकार दिया गया है। जिसके तहत लोग किसी की भी आलोचना कर सकते हैं। हालांकि, 1927 में भारतीय दंड संहिता में धारा 295ए जोड़कर प्रावधान किया गया है कि यदि कोई जान-बूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से नागरिकों के किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाएगा या फिर उस वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वास का अपमान करेगा तो उसे 3 साल तक की सजा हो सकती है।

पाकिस्तान में ईशनिंदा से जुड़े 10 ताजा बड़े मामले

सितंबर, 2023: पाकिस्तान में रावलपिंडी के डिस्ट्रिक्ट सेशन कोर्ट के जज एहसान महमूद मलिक ने फेसबुक पर ईशनिंदा सामग्री पोस्ट करने के मामले को लेकर चार युवकों को मौत की सजा सुनाई थी। देश की शीर्ष जांच एजेंसी (फेडरल जांच एजेंसी) के मुताबिक चारों युवकों को कुरान के खिलाफ ईशनिंदा करने के लिए फांसी के साथ-साथ 28 साल की जेल की भी सजा दी गई है। हालांकि, पांचवें शख्स को सात साल की कैद की सजा सुनाई गई थी।

अगस्त, 2023: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फैसलाबाद जिले के जरनवाला शहर में इस्लाम की पवित्र पुस्तक कुरान के कथित अपमान पर ईसाइयों के 21 चर्चों और 35 घरों में आग लगा दी गई थी। पूरे शहर में हिंसा भड़क गया था।

अगस्त 2023: दक्षिणी बलूचिस्तान के तुरबत शहर में एक अंग्रेजी शिक्षक अब्दुल रऊफ बलोच की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अब्दुल रऊफ पर उनके स्टूडेंट्स ने ही ईशनिंदा का आरोप लगाया था।

फरवरी, 2023: एक मुस्लिम व्यक्ति मुहम्मद वारिस को ईशनिंदा के आरोप में गुस्साई भीड़ ने ननकाना साहिब शहर में पीट-पीट कर मार डाला था। यह घटना पुलिस के सामने हुई और पुलिस ने उस व्यक्ति को बचाने की कोशिश की लेकिन गुस्साई भीड़ ने सड़कों पर उस शख्स को घसीटा और कपड़े उतार कर लोहे की छड़ों से पीट- पीटकर हत्या कर दी गई।

फरवरी 2022: 300 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने पंजाब प्रांत में मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति को पीट-पीटकर मार डाला। उस पर कुरान का अपमान करने का आरोप लगा था। पुलिस ने उस व्यक्ति को बचाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने पथराव कर दिया था।

फरवरी, 2022: सिंध की एक स्थानीय अदालत ने एक हिंदू शिक्षक नौतन लाल को ईशनिंदा के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। नौतन लाल को सितंबर 2019 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करने के बाद गिरफ्तार किया गया था, जिसमें एक छात्र ने दावा किया था कि लाल ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ ईशनिंदा की है।

दिसंबर, 2021: पाकिस्तान के सियालकोट में एक बौद्ध श्रीलंकाई फैक्ट्री के मैनेजर प्रियंता कुमारा को एक उग्र भीड़ ने सड़क पर जमकर पीटा और उसे जिंदा जला दिया। प्रियंता पर कथित तौर पर आरोप लगाया गया कि उसने पैगंबर मुहम्मद के नाम वाले पोस्टरों का अपमान किया था।

नवंबर, 2021: खैबर पख्तूनख्वा में एक पुलिस स्टेशन को उग्र भीड़ ने आग के हवाले कर दिया। आरोप था कि वहां की पुलिस ने मानसिक रूप से अस्थिर ईशनिंदा के संदिग्ध आरोपी को भीड़ को सौंपने से इंकार कर दिया था।

सितंबर, 2021: लाहौर की एक अदालत ने एक स्कूल की प्रिंसिपल सीमा तनवीर को ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। कथित तौर पर सीमा तनवीर पर आरोप था कि उन्होंने कुरान के मुताबित भविष्य में होने वाले सच से इंकार किया और अपने एक लेखन की फोटोकॉपी वितरित की। साथ ही खुद के पैगम्बर होने का दावा किया था। जिसके लिए उन्हें सितंबर 2013 में गिरफ्तार किया गया था।

जुलाई, 2020: अमेरिका के इलिनोइस शहर के एक नागरिक ताहिर नसीम की पेशावर के एक कोर्ट रुम में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कथित तौर पर उनपर पैगंबर के अपमान का आरोप लगा था। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी नागरिक ताहिर नसीम को 2018 में फेसबुक पर धार्मिक बहस के लिए चुनौती दी गई, लेकिन पाकिस्तान पहुंचने पर नसीम को जेल में डाल दिया गया था।

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