विपक्षी गठबंधन ‘I.N.D.I.A’ के नाम पर क्या कहता है देश का कानून?
आजकल देश में INDIA शब्द पर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। दरअसल 17-18 जुलाई को बेंगलुरु के एक पांच सितारा होटल में 26 विपक्षी दलों ने बैठक की। इस बैठक में अपने गठबंधन को नया नाम INDIA दिया।
अब सवाल यह उठता है कि क्या हमारा कानून या संविधान किसी राजनैतिक संगठन को ऐसे शब्दों पर अपना नाम रखने की अनुमति देता है? या फिर राष्ट्रवाद के नाम पर जानबूझकर एक पासा फेंका गया है?

'इंडिया' के इस्तेमाल पर क्या कहता है कानून?
इस मामले पर एडवोकेट आकाश वाजपेयी बताते हैं कि Emblems and Names (prevention of improper use) Act 1950 के तहत कोई भी शख्स अपने निजी फायदे के लिए देश का नाम, प्रतीक चिन्ह, मुहर, झंडा व अन्य चीजों का इस्तेमाल सीधे तौर पर नहीं कर सकता।
आकाश ने वनइंडिया को आगे बताया कि छोटे लेवल पर यह उतना बड़ा मुद्दा नहीं बनता। लेकिन, जैसे ही आप व्यवसाय को बड़े स्तर पर ग्लोबलाईज करेंगे तो आप फंस सकते है, क्योंकि एक्ट 1950 ऐसा करने से आपको रोकता है।
आकाश ने अनुसार अगर राजनैतिक दलों की बात करें तो जब किसी नयी पार्टी का गठन होता है तो उसे अपने नाम तथा सिंबल के लिए राष्ट्रीय चुनाव आयोग की सहमति (रजिस्ट्रेशन) लेनी पड़ती है। बिना उनकी सहमति के किसी भी राजनैतिक दल को सिंबल नहीं मिलता। लेकिन, अब बात यहां पर आकर फंसती है कि राजनैतिक दल जब अलायंस (गठबंधन) करते हैं। तब उनको चुनाव आयोग से रजिस्ट्रेशन कराने की कोई जरूरत नहीं पड़ती। क्योंकि, यह गठबंधन समय के साथ बनता और टूटता है। यानी स्थिर नहीं रहता।
इस पर आप कह सकते हैं कि अभी जो कांग्रेस सहित अन्य दलों ने नये गठबंधन का नाम 'इंडिया' रखा है। वह कानूनी रूप से गलत नहीं है। कानून किसी भी राजनीतिक गठबंधन को ऐसा करने से नहीं रोक सकता। इस गठबंधन ने यहां 'इंडिया' शब्द का इस्तेमाल कानून के एक 'लो फॉल्ट' के तौर पर ढूंढ निकाला है।
'इंडिया' पर पक्ष और विपक्ष की नोंकझोंक?
विपक्षी गठबंधन का नाम 'इंडिया' रखे जाने पर असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि अंग्रेजों ने हमारा नाम इंडिया रखा और कांग्रेस ने इसे सही मान लिया। हमारे पूर्वज भारत के लिए लड़े और हम भारत के लिए काम करते रहेंगे। इंडिया के लिए कांग्रेस और भारत के लिए मोदी।
नाम पर हंगामे पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 1 में इंडिया, यानी भारत, राज्यों का एक संघ होगा। यहां पर जयराम रमेश ने भारत और इंडिया को एक बताया। दूसरी ओर राहुल गांधी ने कहा कि यह लड़ाई पीएम मोदी और इंडिया के बीच है। उनकी विचारधारा और इंडिया के बीच लड़ाई है। इन सब के बीच यह बताने की जरूरत नहीं है कि जीत किसकी होगी।
I.N.D.I.A में डी पर मचा हंगामा?
यहां मामला सिर्फ इंडिया और भारत को लेकर नहीं है। इंडिया में D अक्षर के शब्द पर भी है? दरअसल, विपक्षी एकता की मीटिंग के बाद कांग्रेस ने D का मतलब डेवलपमेंटल बताया तो शरद पवार ने डेमोक्रेसी लिखा। जिस पर बीजेपी के नेताओं ने कहा कि D का मतलब डेमोक्रेटिक है या फिर डेवलपमेंटल? जो लोग इस छोटी सी बात पर सहमत नहीं हैं, वह देश चलाने की उम्मीद कर रहे हैं। नाम बदलने से चरित्र नहीं बदलता।
वहीं भाजपा के ट्विटर हैंडल से लिखा गया कि जिस 'I.N.D.I.A' को दुनियाभर में बदनाम करते फिरते हैं, अपने अस्तित्व और परिवारों को बचाने के लिए उसके नाम का ही सहारा लेना पड़ा और तो और, वह नाम भी सही से नहीं ले पा रहे हैं।
बीजेपी नेता व यूपी के पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने लिखा कि विपक्ष का नया गठबंधन I.N.D.I.A. का असली नाम
● I का मतलब Immoral (अनैतिक)
● N का मतलब Nepotism (भाई भतीजावादी)
● D का मतलब Dishonest (बेईमान)
● I का मतलब Incapable (असमर्थ)
● A का मतलब Alliance (गठबंधन)
इंडिया शब्द पर संविधान सभा में हुई थी बहस?
17 सितंबर 1949 को संघ के नाम और राज्यों पर चर्चा शुरू हुई थी। वहीं 18 सितंबर को देश का नाम 'भारत' रखें या 'इंडिया' इस पर संविधान सभा में बहस हुई। 'इंडिया कानून' वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष डॉक्टर भीमराव अंबेडकर थे। इंडिया और भारत जैसे शब्दों को लेकर संविधान सभा में काफी बहस हुई और बहस में प्रमुख रूप से हरि विष्णु कामथ, सेठ गोविंद दास, कमलापति त्रिपाठी, श्रीराम सहाय, हरगोविंद पंत जैसे नेताओं ने हिस्सा लिया था।
उस पर सेठ गोविंद दास ने भारत के ऐतिहासिक संदर्भ का हवाला देकर देश का नाम सिर्फ भारत रखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इंडिया शब्द हमारी प्राचीन पुस्तकों में नहीं मिलता है। इसका प्रयोग तब शुरू हुआ जब यूनानी भारत आये। उन्होंने हमारी सिंधु नदी का नाम इंडस रखा और इंडस से इंडिया बना। एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका में इसका जिक्र है। इसके विपरीत, यदि हम वेदों, उपनिषदों, ब्राह्मणों और हमारे महान और प्राचीन ग्रंथ महाभारत को देखें, तो हमें भारत नाम का उल्लेख मिलता है। हमें विष्णु पुराण में भी भारत का उल्लेख मिलता है। ब्रह्म पुराण में भी इस देश का उल्लेख 'भारत' के नाम से मिलता है। ह्वेन-त्सांग नामक एक चीनी यात्री भारत आया था और उसने अपनी यात्रा पुस्तक में इस देश को भारत के रूप में संदर्भित किया है।
इस पर बीच का रास्ता निकालते हुए कमलापति त्रिपाठी कहा कि इसका नाम इंडिया अर्थात भारत की जगह भारत अर्थात इंडिया रख दिया जाये। इस पर हरगोविंद पंत ने अपनी राय रखते हुए कहा था कि इसका नाम सिर्फ भारतवर्ष होना चाहिए कुछ और नहीं। पूरी बहस प्रक्रिया के बाद विदेशों से संबंधों का हवाला और देश में सबको एक सूत्र में जोड़ने की कोशिश करते हुए संविधान के अनुच्छेद एक में लिखा गया कि इंडिया अर्थात् भारत राज्यों का संघ होगा। इसके बाद से ही देश को इंडिया और यहां के लोगों को इंडियन कहा जाने लगा।












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