Balakot Airstrike: ‘ऑपरेशन बंदर’ था बालाकोट एयरस्ट्राइक का नाम, पुलवामा हमले का था जवाब
एयर स्ट्राइक का नाम सुनते ही बालाकोट का नाम याद आ जाता है। आज ही के दिन 26 फरवरी, 2019 को भारतीय वायुसेना ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविरों पर एयर स्ट्राइक की थी और कई आतंकियों को मौत की नींद सुला दिया था।

14 फरवरी 2019 को पुलवामा में भारतीय सुरक्षाकर्मियों पर किए गए कायराना आत्मघाती बम हमले ने पूरे देश का सीना छलनी कर दिया था। हमले में सीआरपीएफ के जवानों की मौत हुई थी। पाकिस्तान के इस्लामी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने बड़ी बेहयाई से इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। जिस सुसाइड बॉम्बर ने ये हमला किया, उसका नाम आदिल अहमद डार था। रिपोर्ट्स के अनुसार डार कश्मीर का रहने वाला था। हमले के एक दिन बाद यानी 15 फरवरी 2019 को भारत के विदेश मंत्रालय ने इस हमले का आरोप पाकिस्तान पर लगाया था। पर पाक ने आरोपों का खंडन किया था।
इस मामले में देश में राजनीति भी खूब हुई थी। विपक्ष मोदी सरकार को घेरने लगा था। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि आतंकियों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। आतंकी हमले के दो सप्ताह बाद भारत ने पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी और इस बड़ी कार्रवाई को ही बालाकोट एयर स्ट्राइक कहा जाता है।
ऑपरेशन बंदर था मिशन का नाम
भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने बालाकोट में घुसकर आतंकी ठिकानों को नष्ट कर देश के अदम्य साहस का परिचय विश्व को दिया था। भारतीय वायुसेना के 12 मिराज 2000 फाइटर जेट ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविरों पर एयर स्ट्राइक की थी। सेना की एयर स्ट्राइक में 250 से 300 के करीब आतंकी मारे गए थे। मारे गए आतंकवादियों में जैश ए मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर का साला भी शामिल था। इंडियन एयरफोर्स ने इस एयर स्ट्राइक को ऑपरेशन बंदर नाम दिया था।
एक इंटरव्यू में एयर मार्शल हरि कुमार ने बताया था कि पुलवामा हमले के 3 घंटे बाद ही बदला लेने की योजना बन गई थी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के बालाकोट में 200 आतंकियों के फोन एक्टिव पाए गए थे, जिसके बाद पूरी प्लैनिंग से उनको निशाना बनाकर एयर स्ट्राइक की गई। इस स्ट्राइक में कई बड़े आतंकियों के मारे जाने की जानकारी मिली थी, जो फिदायीन हमलों के लिए आतंकी तैयार कर रहे थे।
बालाकोट का इतिहास
बालाकोट पाकिस्तान के मानसेहरा जिले में स्थित एक तहसील है। वहां की कागान घाटी पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। घाटी का अधिकतर हिस्सा बालाकोट और मानसेहरा में ही आता है। इस घाटी से निकलने वाली कुनहार नदी के किनारे यह तहसील बसी हुई है। वैसे तो यह पूरा इलाका अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके पीछे एक अलग दुनिया है। सामरिक दृष्टि से यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील माना जाता रहा है। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर की सीमाएं इससे सटी हुई हैं। चीन और पाकिस्तान को सीधे जोड़ने वाला कराकोरम हाईवे यहीं से होकर गुजरता हैं। बालाकोट से मुजफ्फराबाद का फासला मात्र 40 किलोमीटर है। मुजफ्फराबाद पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर की कथित राजधानी है, जहां से भारत के खिलाफ कई आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता रहा है।
बन चुका है आतंक का पर्यायवाची
इतिहास में देखने पर पता चलता है कि 326 ईसा पूर्व में सिकंदर की सेनाएं इस इलाके से होकर गुजरी थी। उसके उत्तराधिकारी सेल्यूकस ने बीस साल बाद इस इलाके को एक संधि के तहत चन्द्रगुप्त मौर्य को वापस सौंप दिया था। मौर्य साम्राज्य में मानसेहरा एक प्रमुख शहर था। दरअसल ब्रिटिश और भारतीय खोजकर्ताओं के दल ने 1889 वहां कुछ शिलालेखों की खोज की थी। इतिहासकारों के अनुसार सम्राट अशोक ने ही उन शिलालेखों को खुदवाया था। बाद की कुछ शताब्दियों की वहां कोई खास जानकारी नहीं मिलती। लेकिन 650 ईसवी में इस इलाके के पश्चिमी छोर पर एक बड़ा परिवर्तन हुआ। पर्शिया साम्राज्य पर अब मुसलमानों ने कब्जा कर लिया था और इसका असर दिखाई देने लगा था। सातवीं शताब्दी के आखिरी दौर के बाद से इस स्थान पर पठानों, तुर्कों और अफगानों के लगातार हमले होने लगे थे। आतंकी मसूद अजहर ने पाकिस्तान की सेना और गुप्तचर एजेंसी आईएसआई के प्रश्रय में इसी बालाकोट को आतंकवादियों का प्रमुख केंद्र बना दिया था।












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